Elon Musk: How the Billionaire CEO of SpaceX and Tesla is Shaping our Future Hindi Summary

Elon Musk: How the Billionaire CEO of SpaceX and Tesla is Shaping our Future

Elon Musk: How the Billionaire CEO of SpaceX and Tesla is Shaping our Future in hindi
---------- About Book ----------
स्पेस एक्स और टेस्ला के को-फाउंडर एलन मस्क का नाम भला किसने नहीं सुना होगा. उनकी एक्स्ट्राओर्डीनेरी पर्सनेलिटी ने करोडो लोगो को इंस्पायर किया है और आज भी कर रहे है. उनकी बायोग्राफिकल बुक है एलन जो हमे उनकी लार्जेर देन लाइफ पर्सनेलिटी की झलक दिखाती है. इस बुक के थ्रू हमे उनकी लाइफ के स्ट्रगल, अचीवमेंट्स और गोल्स के बारे में जानने का मौका मिलता है. ये बुक काफी इंस्पिरेशनल है खासकर उन लोगो के लिए जो कभी हार नहीं मानते. 

1. इस बुक से हम क्या सीखेंगे? 

एक जीनियस बच्चा जिसका बचपन बड़े स्ट्रगल में गुज़रा, जो बचपन से ही राकेट बनाने का सपना देखता था और इसी सपने को पूरा करने के वो साऊथ अफ्रीका से यूनाइटेड स्टेट्स आया. एलन मस्क वो जीनियस था जो ना सिर्फ टेक्नोलोजिकल इनोवेशसं का एक्सपर्ट था बल्कि उसे इस दुनिया को बचाने की भी उतनी ही परवाह थी इसीलिए तो उसके माइंड में इलेक्टिकल कार और स्पेसशिप बनाने का आईडिया आया. एलन मस्क की ये बुक उनके चाहने वालो के लिए एक गिफ्ट की तरह है जिसके थ्रू उन्हें इस महान इनोवेटर की लाइफ के कई अनजाने पहलुओ को जानने का मौका मिलेगा. 

2. ये बुक किस किसको पढनी चाहिए? 

हर वो इंसान जो एलन मस्क की मैजिकल और इंस्पायरिंग स्टोरी जानने में इंट्रेस्टेड है, स्पेशली एंटप्रेन्योर्स इस बुक से काफी कुछ लर्न कर सकते है, एलन मस्क ने कभी गिव अप नहीं किया और हर ग्रेट एंटप्रेन्योर में यही क्वालिटी होती है. 

3.    इस बुक के ऑथर कौन है? 

 राइटर एश्ली वांस ने एलन मस्क की बायोग्राफी’ एलन मस्क, टेस्ला, स्पेस एक्स एंड क्वेस्ट फॉर अ फेंटास्टिक फ्यूचर” लिखी है. एश्ली वांस एक अमेरिकन बिजनेस कोलमनिस्ट और ऑथर है जिन्होंने कई सारी बुक्स लिखी है लेकिन एलन मस्क पर लिखी उनकी बायोग्राफी सबसे ज्यादा पोपुलर बुक्स में से एक है. 2015 में उन्होंने ब्लूम बर्ग के लिए एक वीडियो सीरीज हेल्लो वर्ल्ड राईट और होस्ट करनी शुरू की थी. 
---------- Summary ----------

Elon Musk: How the Billionaire CEO of SpaceX and Tesla is Shaping our Future

चेप्टर 1

एलन की दुनिया साल 2000 में सिलिकोन वैली और सेन फ्रेंसिस्को डीप्रेशन में डूबे हुए थे क्योंकि इन्टरनेट का नशा उतरने लगा था। अब जमाना डॉट कॉम का था जिसके चलते वेंचर केपिटलिस्ट किसी भी इन्वेस्ट में पैसा लगाने से कतरा रहे थे। इस दौर में सिलिकोन वैली के पास सिर्फ एक क्लीक एड्स का काम ही बचा था। ट्विटर और फेसबुक ने अभी-अभी पैर पसारने शुरू किये थे। कुछ लोगो का मानना था कि टेक्नोलोजी इंडस्ट्री अब ठंडी पड चुकी है।
 
एलन मस्क भी इसी डॉट कॉम मेनिया का एक हिस्सा थे। अपनी कॉलेज की पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने ज़िप 2 बनाया और $22 मिलियन कमाए। ज़िप 2 गूगल मैप्स की ही तरह का एक सॉफ्टवेयर था। कॉमपेक ने ज़िप 2 को 1999 में खरीदा था। मस्क ने इस कमाई को एक और स्टार्ट-अप X.com खोलने के लिए इन्वेस्ट किया जो बाद में पे-पाल बना। और फिर जब 2002 में ई-बे ने पे-पाल (Pay Pal) खरीदा तो मस्क पहले से ज्यादा अमीर हो गए।
 
मस्क सिलिकोन वैली के बजाए लॉस एंजेल्स में रहने चले गए थे, जहाँ पर उन्होंने टेस्ला, स्पेस एक्स और सोलर सिटी बनाई। उनकी कंपनीज़ ELECTRIC CARS, एरोस्पेस और सोलर इंडस्ट्रीज में लीड करती है। राकेट, इलेक्ट्रिक कार और सोलर पैनल बनाकर मस्क ने फ्यूचर को बदल कर रख दिया। एलन की दुनिया में रियलिटी और साइंस फिक्शन मिलकर एक हो गए है।
 
एलन मस्क बाकी टेक्नोलोजी मिलेनियर से हटकर है। उनका सोच विश्वव्यापी है। मस्क कहते है” अगर हम कभी ना खत्म होने वाली वाली एनर्जी का हल ढूंढ ले और मल्टी प्लानेटेरी स्पीसीज़ बनने की राह में तरक्की कर ले ।।।तो ये वाकई में बहुत बढ़िया बात होगी”। आज मस्क कंपनी मे हज़ारो लोग काम करते है जिसका नेट वर्थ $10 बिलियन है।

अध्याय 2

अफ्रीका
मस्क के नाना जोशुआ हेल्डीमेन केनेडा से साउथ अफ्रीका तक खुद का जहाज उड़ाया करते थे। वे माइग्रेट होने के बाद अपने पूरे परिवार सहित हमेशा के लिए प्रेटोरिया में सेटल हो गए थे मगर कभी-कभी वे लोग नोर्वे, स्कॉट और आस्ट्रेलिया जाया करते थे।
 
मेये हेल्डीमेन (Maye Haldeman) और एरोल मस्क बचपन से ही एक दुसरे को चाहते थे। जब वे बड़े हुए तो दोनों ने शादी कर ली और उसके बाद जल्द ही एलन का जन्म हुआ। मस्क 28 जून, 1971 को पैदा हुए थे। उनके पिता एरोल मस्क एक सक्सेसफुल इंजीनियर थे वहीँ माँ मेये (Maye) एक डाइटीशिएन थी। एलन के अलावा उनके दो बच्चे और थे, किम्बल और टोस्का।
 
एलन अभी सिर्फ 5 साल के ही थे जब उनकी काबिलियत दिखने लगी थी। वे घंटो किताबो में डूबे रहते। “द लार्ड ऑफ़ द रिंग्स” और “द हिचहाइकर”स गाइड to गेलेक्सी” उनकी पसंदीदा किताबे थी। उनके पास एनसाइक्लोपीडीयया के दो बड़े सेट रखे थे जिन्हें वो तब पढ़ते जब पढने के लिए किताबे ख़त्म हो जाती थी।  मस्क परिवार एक खुशहाल परिवार था। प्रेटोरिया में उनके पास बहुत बड़ा घर था। मगर एलन जब आठ साल के हुए तो उनके माँ-बाप का तलाक हो गया था। वे और उनके भाई किम्बल अपने पिता के साथ रहने लगे। उनके पिता खुशमिजाज़ नहीं थे इसलिए एलन को कभी भी अपना बचपन खुशहाल नहीं लगा।
एलन जब 10 साल के थे जब उन्होंने पहली बार कंप्यूटर देखा। वे इसे देखकर इतने हैरान हुए कि उन्होंने अपने पिता से अपने लिए एक कंप्यूटर खरीदने की जिद की। और जब उनके पिता उनके लिए कंप्यूटर लेकर आये तो पूरे तीन दिनों मे ELON ने बेसिक प्रोग्रमिंग सीख ली। एलन अपने भाई किम्बल और कज़न पीटर, लेंडन और रस रिवे के बेहद करीब थे। वे उनके साथ मिलकर होम मेड राकेट और एक्सप्लोसिव बनाया करते थे। उन सबको एक साथ लंबी ट्रेन ट्रिप्स पे जाना और डनजियंस और ड्रेगन्स खेलना भी बहुत पसंद था। पर जब एलन स्कूल जाने लगे तो वहां उन्हें कुछ अलग ही अनुभव हुए। स्कूल में उन्हें अक्सर बुल्ली किया जाता था। एक बार उनके साथ ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिससे उन्हें गहरा सदमा लगा। एलन सीडीयों पर बैठे कुछ खा रहे थे जब एक लडके ने उन्हें पीछे से सर पर लात मारी और एक जोर का धक्का दिया। इस धक्के से एलन सीडीयों से गिर पड़े। उसके बाद उस लड़के ने उन पर मुक्को की बरसात शुरू कर दी। उन्हें इतनी चोट आई कि तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। खून से उनका बदन सन गया था। उन्हें पूरी तरह ठीक होने में पूरा एक हफ्ता लगा और उसके बाद ही वे स्कूल जाने लायक हुए। पूरे चार सालो तक एलन उसी खौफ के साए में जीते रहे। स्कूल का वो बदमाश गेंग बेवजह ही एलन को हर वक्त परेशान किया करता था। आखिरकार उन्होंने उन्हें अपना स्कूल बदलना पड़ा।
 
जब एलन 17 साल के हुए तो उन्होने साउथ अफ्रीका छोड़ कर जाने का मन बनाया। उन्हें लगता था कि  अमेरिका में उन्हें अपने लिए बेहतर मौके मिल सकते है। साथ ही उन्हें सिलिकोन वैली भी पसंद थी। जब उनके परिवार को केनेडा की सिटीजनशिप मिली तो एलन को निकल भागने का एक मौका मिल गया था।

अध्याय 3

केनेडा
केनेडा में अपने शुरुवाती दिनों में मस्क को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जब वे घर से केनेडा जाने के लिए निकले तो उनके पास वहां रहने का कोई ठिकाना नहीं था। उन्होंने वहां अपने कुछ रिश्तेदारों को खोजा और किसी तरह रहने का बंदोबस्त किया। अपना 18वा जन्मदिन उन्होंने कुछ पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ मनाया जिन्हें वे ठीक से जानते तक नहीं थे। इस दौरान मस्क ने कुछ ओड जॉब्स भी की जैसे कि सब्जिया वगैरह ले आना और लकडियाँ काटना। उनके भाई किम्बल भी बाद में उनके पास केनेडा आ गए।
 
साल 1989 में मस्क ने क्वीन्स युनिवेर्सिटी ओंटारियो (Queen’s University Ontario) में दाखिला लिया जहाँ पर उनकी मुलाकात अपनी पहली पत्नी जस्टिन विल्सन से हुई। पहली डेट के लिए जस्टिन ने उन्हें बहुत तरसाया था मगर मस्क भी कम जिद्दी नहीं थे। जस्टिन ने बाद में कहा कि “ वो किसी को भी अपना दीवाना बना सकते है”।
 
कॉलेज की पढ़ाई ने मस्क की जिंदगी में बहुत से बदलाव लाए। वे अभी भी स्पेस और एनर्जी की बाते किया करते थे जिसका उनके क्लासमेट मज़ाक उड़ाया करते। मस्क उन लोगो से मिले जिनसे उनके विचार मिलते थे। अपने खाली वक्त में वे कंप्यूटर ठीक किया करते जिससे उनकी कुछ एक्स्ट्रा कमाई हो जाती। वे अपने क्लास मेट्स को स्पेयर पार्ट भी बेचा करते थे।
 
दो साल बाद मस्क को स्कोलरशिप मिली। उन्होंने युनिवेर्सिटी ऑफ़ पेनेसिलेवेनिया से अपनी पढ़ाई जारी रखी।  वहां उन्होंने इकोनोमिक्स और फिजिक्स दोनों की पढाई की। पेनेसिल्वेनिया युनिवेर्सिटी में मस्क लंच के दौरान अपने दोस्तों से फिजिक्स पर डिसकसन किया करते। उन्होंने और उनके खास दोस्त ने मिलकर एक घर किराए पर लिया। इस घर में वे वाइल्ड पार्टीज़ रखते और जो लोग पार्टी में आते उनसे $5 पर हेड के हिसाब पैसा वसूलते। मस्क अपनी क्लास के लिए कई दिलचस्प बिजनेस आडियाज़ भी सोचा करते। उनका ऐसा ही एक आइडिया था” द इम्पोर्टेंस ऑफ़ बीइंग सोलर“ यानी सोलर पॉवर का महत्त्व। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में सोलर पॉवर टेक्नोलोजी के फील्ड में तेज़ी आएगी और बड़े-बड़े सोलर प्लांट सिस्टम लगाए जायेंगे। उन्होंने सोलर सेल्स और ऐसे कम्पाउंड के बारे में बताया जो पॉवर को ज्यादा से ज्यादा बड़ा सकते है। उन्होंने अल्ट्रा- केपेसिटर्स के बारे में भी एक पेपर लिखा था जिसमे बताया गया कि ये एक प्रकार की बेट्री सेल्स है जो बड़ी तादाद में एनेर्जी स्टोर कर सकती है। इन्हें रीचार्ज किया जा सकता है और बाकी केपेसिटर्स के मुकाबले ये 100 गुना ज्यादा पॉवर दे सकती है। मस्क ने तभी इलेक्ट्रिक कार और रॉकेट्स के बारे में सोच लिया था।
 
उनके प्रोफेसर्स ने उनके इस लाजवाब एनालिसिस की तारीफ की थी। मस्क हर तरह की मुश्किल से मुश्किल फिजिक्स कॉन्सेप्ट्स का हल ढूंढ लेते थे। उन्हें ये भी मालूम होता था कि इससे अच्छा प्रॉफिट कैसे कमाया जाता है। कॉलेज खत्म होने के बाद उनके दिमाग में पहले वीडियोगेम्स बनाने का ख्याल आया। मगर मस्क अपने लिए एक ऐसा करियर चाहते थे जिससे वे पूरी दुनिया में एक बड़ा बदलाव ला सके।
 
वे अक्सर स्पेस, रीन्युयेब्ल एनर्जी और इन्टरनेट के सपने देखा करते थे। उन्हें यकीन था कि आने वाला कल इन्ही का होगा। भविष्य में एक बड़ा बदलाव आने वाला था और इसी में उनको प्रॉफिट दिख रहा था। सिलिकोन वैली फ़ोटोज़ शेयर करने में बीजी था और मस्क दुनिया को विनाश से बचाने की तैयारी कर रहे थे।

अध्याय4

एलन का पहला स्टार्ट-अप

साल 1994 में किम्बल और एलन ने कई रोड ट्रिप्स साथ की। उन दोनों के दिमाग में इन्टरनेट के बिजनेस का आडिया था। फिर आखिरकार मस्क सिलिकोन वैली में बतौर इंटर्न काम करने लगे। और जब उन्होंने स्कूल खत्म किया तो किम्बल के साथ मिलकर उन्होंने अपनी कम्पनी स्टार्ट की। ज़िप-2 येल्लो पेजेस (yellow pages) का ऑनलाइन वेर्जन है। इसमें सभी बिजनेस एस्टब्लीशमेंट के मेप और उनकी जानकारी दी हुई है। एलन इसके लिए वेबसाइट कोडिंग करते थे और किम्बल उन साइट्स को बेचने का। किम्बल डोर-टू-ड़ोर सेल किया करते थे। मगर ज़्यादातर बिजनेसमेन को पता नहीं था कि ज़िप 2 आखिर है क्या? उन्हें कपनी कंपनी के लिए इन्वेस्टर ढूँढने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार एक Investor ने उनके काम में रूचि ली और $3 मिलियन का इन्वेस्ट किया।
 
ज़िप-2 ने न्यूजपेपर क्लासीफाइड एड देने शुरू किये। हालांकि कंपनी चल पड़ी और तरक्की करने लगी मगर एलन को मेनेजमेंट से निकाल दिया गया। वे अब चीफ टेक्नीकल ऑफिसर थे। ज़िप 2 का अब एक बड़ा सा ऑफिस था और कंपनी ने कोड्स की क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए कई प्रोग्रामर्स भी रख लिए थे। साल 1998 में $300 मिलियन की डील के साथ zip-2 सिटी-सर्च के साथ मर्ज हो गयी जो कि पहले उनकी कम्पटीटर थी।
 
मस्क बर्दस का डॉट कॉम का आइडिया एक हकीकत में तब बदला जब 1999 में कॉम्पैक ने ज़िप-2 को खरीदा। मगर सब कुछ आसान नहीं था। एलन मस्क सीईओ बनना चाहते थे।
पे-पाल माफिया बॉस
एक दशक बाद मस्क केनेडियन बैकपेकर से एक मल्टी-मिलेनियर बन चुके थे वो भी सिर्फ 27साल में। वे कुल मिलाकर $ 22 मिलियन के मालिक थे। उनके पास अब एक बड़ा सा अपार्टमेंट, एक प्लेन और सपोर्ट कार थी। मस्क अपनी McLaren F1 में सिलिकोन वैली के चक्कर काटा करते।
 
जब वे इंटर्न कर रहे थे उनके दिमाग में इन्टरनेट बैंकिंग का ख्याल आया। उन्होंने इस बारे में अपने सीनियर्स के साथ डिस्कस किया मगर उन्हें ये आइडिया जमा नहीं। ये 1990 का वक्त था, लोग उन दिनों ऑनलाइन किताबे खरीदने से कतराते थे। क्योंकि कोई भी अपना क्रेडिट कार्ड नंबर इन्टरनेट पर नहीं देना चाहता था। मस्क फिर भी अपने ऑनलाइन बैंक के आइडिया पर डटे रहे। अपने इस नए प्रोजेक्ट पर उन्होंने $12 मिलियन इन्वेस्ट किये। उन्होंने इस ऑनलाइन बैंकिंग साइट का नाम एक्स।कॉम (X.COM) रखा। उनके एक को-फाउन्डर ने कहा” यही वो खूबी है जो एलन को बाकियों से अलग करती है”। वे रिस्क लेकर अपनी जिम्मेदारी पर इतनी बड़ी रकम लगा रहे है और इस तरह की डील फायदा भी दे सकती है या फिर कंगाल भी कर सकती है। ज़िप-2 एक साफ-सुथरा सा प्रेक्टिल आइडिया था मगर X.कॉम ने तो बैंकिंग इंडस्ट्री को बदल कर रख दिया। मस्क इस बिजनेस में सिर्फ अपने PASSION को लेकर उतरे थे। उन्हें लगता था कि बैंकर्स का तरीका बिलकुल गलत है और वे उनसे बेहतर कुछ कर सकते है।
 
मस्क ने ज़िप-2 को एक फायदेमदं इन्वेस्ट के रूप में केपेटीलिस्ट के सामने पेश किया। लोगो को इसके बारे में यकीन दिलाने के लिए उन्होंने पॉवरफुल स्पीच दी और इंजीनियर्स को अपने साथ काम करने के लिए एनकरेज किया। एक्स.कॉम अब जायज रूप से फिनेंस सर्विस कंपनी बन गयी। इसमें बैंकिंग लाइसेस, म्यूचल फंड लाइसेंस और ऍफ़डीआइसी इंश्योरेंस (FDIC insurance) जैसी सुविधाए मौजूद थी। नवम्बर 1999 में साइट इन्टरनेट पर लाइव हुई। मस्क उस दिन अपने ऑफिस में पूरे 48 घंटे तक रहे क्योंकि वे चीजों को अपने सामने ही स्मूदली चलते हुए देखना चाहते थे।
 
एक्स.कॉम ने एक क्रांतिकारी पेमेंट ईजाद किया जिसे पे-पाल नाम दिया गया। इसमें किसी को पैसे भेजने के लिए सिर्फ उसका ई-मेल एड्रेस ही काफी था। कुछ महीनों के अन्दर ही पे-पाल को 200,000  क्लाइंट्स मिल गए। पैसे के लेन-देन का ये बड़ा आसान तरीका था जबकि Banks इसी प्रोसेस में कई दिन लगा देते थे।
मार्च 2000 में एक्स।कॉम अपने कॉम्पीटीटर कोनफिनिटी  के साथ मर्ज हो गयी। मस्क के पास अभी भी कंपनी के ज़्यादातर शेयर थे और कंपनी का नाम भी नहीं बदला गया। मगर फिर एक्स।कॉम और कोनफ़िनिटी की अनबन होने लगी जिसकी वजह थी दोनों का अलग कल्चर और डीसीजन मेकिंग। Employees के एक ग्रुप ने मस्क को कंपनी से बाहर करने की प्लानिंग की। मस्क के बदले वे कोनफ़िनीटी के पीटर थियेल को सीईओ बनाना चाहते थे।
 
इस दौरान मस्क अपनी पत्नी जस्टिन के साथ हनीमून मना रहे थे। उन्हें जब इस बात का पता लगा तो उन्होंने कम्पनी को अपने फैसले पर दुबारा सोच-विचार करने की गुजारिश की। मगर तब तक बात हाथो से निकल चुकी थी। उन्हें पता चला कि कंपनी ने अपना फैसला ले चुकी थी। मस्क उस कंपनी में अपनी पॉवर खो बैठे थे जिसे उन्होंने ही शुरू किया था।
जून 2001 में एक्स.कॉम पे-पाल के नाम से री-ब्रांड की गई। कंपनी एडवाइज़र के तौर पर मस्क की नौकरी सीक्योर थी। उन्होंने और पैसा इन्वेस्ट किया। अपना स्टेक बडाकर वे पे-पाल के सबसे बड़े स्टेक होल्डर बन गए। इस वक्त तक उनका डॉट.कॉम का बुखार अब उतरने लगा था। बाकी टेक कंपनीज बेचने की जल्दबाजी में लगी थी।
मस्क ने बोर्ड को offers ठुकराने के लिए मना लिया था। पे-पाल का एनुवल रेवेन्यू बड़कर $240 मिलियन हो चूका था। अब ये अपने पैरो पर मजबूती से खडी कंपनी बन चुकी थी जो अब पब्लिक हो सकती थी। और तभी 2002 में पे-पाल को ई-बे से $1।5 बिलियन का ऑफर मिला। ये एक बहुत बड़ा और शानदार ऑफर था। टैक्स काटने के बाद भी मस्क पूरे $180 मिलियन अपने पास रख सकते थे। पे-पाल डॉट।कॉम बबल से बच मिकला था। ये सब मस्क की बिजनेस इंस्टिंक्ट और टेक्नोलोजी ट्रेंड में उनकी कुशलता का नतीजा था। 9/11 के हमले के बावजूद कंपनी ने एक सक्सेसफुल आईपीओ (IPO) बनाया। भले ही टेक्नोलोजी इंडस्ट्री डाउन हो गयी मगर पे-पाल एक विनर बनकर उभरा।

अध्याय 6

स्पेस में चूहा

जून 2001 में एलन मस्क जब अपने तीसवे साल में थे, वे और उनकी पत्नी सिलिकोन वैली छोड़कर लोस एंजेल्स शिफ्ट हो गए। उनका बनाया पे-पाल एक सफल प्रोजेक्ट रहा था। अब वे अपने सपने स्पेस ट्रेवल और राकेट शिप्स पर ध्यान दे सकते थे,। और इसके लिए लोस एंजेल्स से बढ़कर कोई और बढ़िया जगह नहीं थी क्योंकि वहां का मौसम एरोनोटिक्स के लिहाज़ से अच्छा था। मस्क ने अपने जैसे ही कुछ लोग ढूंढ लिए।। उन्होंने मार्स सोसाइटी नाम का एक ग्रुप भी ज्वाइन कर लिया था जो मार्स पर जीवन की संभावना तलाश रहा था। ट्रांसलाइफ नाम से इस ग्रुप का एक प्रोजेक्ट भी था। ये एक कैप्सूल के आकार का बनने वाला था जो अर्थ के चक्कर लागाये। और इसके क्र्यू मेम्बर चूहे बनने वाले थे। मस्क ने $500,000  मार्स सोसाइटी और इसके प्रोजेक्ट के लिए दिए। उन्होंने सुझाव रखा कि ट्रांसलाइफ मिशन को मार्स तक ही एक्सटेंड करना चाहिए। एक दिन मस्क नासा की वेबसाईट ब्राउस कर रहे थे। उन्हें गहरी निराशा हुई क्योंकि मार्स एक्सप्लोरेशन का कहीं पर भी कोई एक्जेट शेड्यूल या पुख्ता प्लान नहीं दिया गया था।

मस्क ने एरोस्पेस पर कई किताबे पढ़ी। उन्होंने राकेटशिप को प्लान करने के लिए टेलेंटेड इंजीनियर्स को अपने साथ काम पर रखा। उन्होंने कम बजट वाले रॉकेट्स का परफोर्मेंस स्टडी किया। उस वक्त के रॉकेट्स सिर्फ रसियन बनाते थे। बोईंग और लॉक हील बहुत ज्यादा महंगे थे और बड़े से बड़े सेटेलाइट्स उठा सकते थे। मस्क इनसे कुछ सस्ते रॉकेट्स बनाना चाहते थे जो रिसर्च और कमर्शियल इस्तेमाल के लायक हो।
जब ई-बे ने पे-पाल खरीदा था तो मस्क ने इस डील से सौ मिलियन डॉलर की कमाई की थी। उन्होंने ये पैसा मार्स के लिए राकेट शिप बनाने में लगा दिया। जून 2002 में स्पेस एक्सप्लोरेशन टेक्नोलोजी बनाई गई। इसमें मस्क के साथ मार्स सोसाइटी के मेम्बर और लोस एंजेल्स के वे लोग भी जुड़े जो स्पेस एन्थ्युयास्टिक थे।  

स्पेस एक्स (Space-X) को लेकर मस्क बहुत एक्साइटेड थे। हालांकि इस दौरान उनके परिवार में एक दुखद घटना घट गयी। उनकी पत्नी जस्टिन ने एक बेटे को जन्म दिया था जिसका नाम नेवेडा एलेक्जेंडर मस्क रखा गया था। लेकिन 10 दिन के अंदर ही वो बच्चा चल बसा।

हुआ यूँ कि एक रात एलन और जस्टिन ने बच्चे को बिस्तर पर सुलाया। नेवेडा गहरी नीद में पीठ के बल सो गया था। जब कुछ देर बाद उसके पेरेन्टस उसे देखने गए तो उन्होंने पाया कि उसकी सांसे नहीं चल रही थी। डॉक्टरर्स इसे सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (sudden infant death syndrome) कहते है। 

जब तक पेरामेडिक्स बुलाये गए दिमागी रूप से बच्चे की मौत हो चुकी थी। उसके दिमाग में ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं पहुँच पाई थी। उसे तीन दिन तक लाइफ सपोर्ट पर रखा गया। बच्चा जब मरा तो जस्टिन ने उसे अपनी बांहों में पकड रखा था। वो बुरी तरह रो रही थी। मगर एलन मस्क ने कहा कि वो इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहते है।

जस्टिन को लगता था कि ये एलन मस्क का डिफेन्स मेकेनिस्म का तरीका है। जिसे उन्होंने बचपन से ही सीख लिया था। उसने कहा कि एलन सदमे में नहीं रह सकते। उनकी फितरत ही आगे बढने की है। और मुझे लगता है कि ये ही उनके सरवाइव करने का तरीका है”। मस्क ने अपना सारा ध्यान स्पेस एक्स के राकेट लौंच में लगा दिया।

अगले 5 सालो में जस्टिन जुड़वाँ बच्चो को जन्म दिया और उसके बाद ट्रिप्लेट्स को। मस्क ने कहा” मै इस बात पर यकीन नहीं रखता कि मुझे बेहद दुखद घटानाओं के बारे में बात करनी चाहिए। क्योंकि ये किसी भी तरह हमारे भविष्य को नहीं सुधारती। अगर आपके और बच्चे और जिम्मेदारियां है तो बीती बातो पर दुखी होने से आपका और आपके अपनों का कोई भला नहीं होने वाला”।

अध्याय 7

सब कुछ इलेक्ट्रिक

साल 2002 की बात थी। एक टेलेंटेड इंजिनियर जे.बी. स्ट्राबेल ने पोर्श गाडी खरीदी। उन्होंने इसे एक इलेक्ट्रिक कार में तब्दील किया। ये वो वक्त था जब क्लीन टेक्नोलोजी मूवमेंट का नामो-निशान तक नहीं था। उन्होंने अपने इस प्रोडक्ट के लिए इन्वेस्टर ढूढने शुरू किये। महीने पर महीने बीत गए मगर हर बार स्ट्राबेल रिजेक्ट होते रहे। आखिर में वे एलन मस्क से मिले।।

मस्क को इलेक्ट्रिक कार का आईडिया काफी बढ़िया लगा। उन्होंने खुद के बनाए बेटरी और एनेर्जी स्टोरेज का विचार रखा। वे तुरंत ही स्ट्राबेल को फण्ड देने के लिए राज़ी हो गए। और उनकी ये पार्टनरशिप सालो तक चली।

इस दौरान कई और लोग भी थे जो बिजनेस पार्टनर थे और इलेक्ट्रिक कार बनाना चाह रहे थे। इनमे से ही दो लोग थे मार्टिन ईबर्हार्ड और नार्थन केलिफोर्निया के मार्क टारपेनिंग। जुलाई 2003 उन्होंने टेस्ला मोटर्स की नींव रखी। ये कंपनी निकोलाज टेस्ला (Nicolas Tesla) के नाम पर रखी गयी थी जो इलेक्ट्रिक मोटर के इन्वेन्टर थे। ईब्र्रहार्ड और टारपेनिंग ( Eberhard and Tarpenning ) ने अपनी कंपनी लोस एंजेल्स में मस्क को ऑफर की। वे तीनो ही अमेरिका की तेल की समस्या को खत्म करना चाहते थे। मस्क तो वैसे भी हमेशा से ही क्लीन और ससटेनेबल एनर्जी के समर्थक थे। इस तरह टेस्ला शुरू हुई और मस्क उसके चेयरमेन और सबसे बड़े शेयरहोल्डर बने। जल्द ही जे.बी. स्ट्राबल भी उनकी कंपनी में शामिल हो गए। इस टीम को पता चला कि बड़ी-बड़ी कंपनीज वाकई में अब कारे नहीं बनाती। बी।एम्।डब्ल्यू आपनी कारो के पार्ट्स बाहर बनवाते है। कंपनी केवल लोकल मार्केटिंग, सेल्स और फाइनल असेंबली संभालती है। वे दिन अब लद चुके थे जब फोर्ड मोटर्स रॉ (raw) मेटेरियल से कारे बनाया करती थी। टेस्ला मोटर्स अपने यहाँ बनने वाली हर इलेक्ट्रिक कार को ढाँचे से लेकर फाइनल तक खुद ही तैयार करना चाहते थे। मस्क और उनके इंजीनियर्स की टीम ने प्रोटोटाइप के तौर पर रोडस्टर बनाई। हालांकि इस प्रोसेस में वक्त, एफर्ट और पैसा बहुत लगता था। जब टेस्ला ने अपना अगला प्रोडक्ट तैयार किया उस वक्त मस्क दिवालिया होने की कगार पर पहुँच चुके थे।

अध्याय-8

पेन, सफरिंग एंड सरवाइवाल

एलन मस्क पे-पाल बनाकर पहले ही बहुत मशहूर हो चुके थे। प्रेस उनके बारे में छापना पसंद करती थी। लोग इस अजीब से नाम वाले मल्टी-मिलेनियर के बारे में और जानना चाहते थे। सब इस बारे में जानते थे कि मस्क ने इलेक्ट्रिक कार और स्पेसशिप पर बहुत सारा पैसा लगाया हुआ है। मशहूर सेलेब्रिटीज़ और अमीर बिजनेसमेन के साथ मस्क का उठना-बैठना था ।
 
कुल मिलाकर वे किसी शोमेन से कम नहीं थे। मगर असलियत में वे परेशानी से गुज़र रहे थे। उनकी परेशानी का सबब थी टेस्ला और स्पेस एक्स की फिनेंशियल हालत इलेक्ट्रिक कार प्रोटोटाइप और राकेट लांच अटेमप्स पर उनका बेहिसाब पैसा खर्च हो रहा था। प्रेस भी उनके फेल्ड प्रोडक्ट्स के लिए उनकी जमकर खिंचाई कर रहा था।
 
और इस सबसे बढकर परेशानी थी उनकी निजी ज़िन्दगी की मुश्किलें। उनकी पत्नी जस्टिन के साथ उनका रिश्ता लगभग टूटने की कगार था।
 
टेस्ला को अपने प्रोटोटाइप रोडस्टर को री-क्रियेट करने की ज़रुरत थी। स्पेस एक्स भी फाल्कोन 1 के लांच की तैयारी में था। दोनों प्रोज्केट्स में मस्क को समय और पैसा दोनों लगाना पड़ रहा था। वे ज़्यादातर अब अपने काम में ही बीजी रहते थे और हफ्ते के सातों दिन ऑफिस में रहते थे। घर से उनक नाता लगभग टूट ही गया था। जस्टिन को लगने लगा कि वो मस्क की सिर्फ ट्राफी वाईफ बनकर रह गयी है ना कि लाइफ पार्टनर। जून 2008 में मस्क ने जस्टिन से तलाक लेने के लिए केस फ़ाइल कर दिया।
 
जस्टिन ने अपना दुःख खुलेआम अपने ब्लॉग में व्यक्त किया। वे अपने ब्लॉग में मस्क और तलाक की प्रोसीडिंग के बारे में लिखा करती थी।
 
बिल ली (Bill Lee) जो मस्क के दोस्त और एक इन्वेस्टर थे, मस्क की दिमागी हालत को लेकर फिक्रमंद थे। उन्होंने मस्क को अपने साथ लन्दन में छुट्टीयाँ बिताने के लिए इनवाईट किया।
लन्दन के इस ट्रिप में मस्क की मुलाकत तालुलाह रिले (Talulah Riley) से हुई जो बाद में उनकी दूसरी पत्नी बनी। 22 साल की इंग्लिश एक्ट्रेस से उनकी ये मुलाकात एक सेट अप थी मस्क को डीप्रेशन से बचाने के लिए। लन्दन की इस पूरी ट्रिप में रीले (Riley) उनके साथ रही। वे खूब बाते करते और डिनर पर साथ जाया करते थे।
 
जब मस्क लोस एंजेल्स वापिस आये तो उसके कुछ ही हफ्तों बाद रीले (Riley) भी उनके पास आ गयी। मस्क ने रीले (Riley) को बताया कि उनके पहले से ही पांच बच्चे है। और ये भी कि उनका जल्द ही तलाक होने वाला है। बावजूद इसके मस्क ने रीले (Riley) को जब प्रपोज़ किया तो रिले (Riley) ने हाँ बोला दिया। ये वाकई एक तूफानी रोमांस जैसा था। मस्क को अपनी कंपनीयां चलाने में जितनी भी दिक्कते आ रही थी, रिले उन सब परेशानियों की गवाह थी। वो कहती थी” वो खुद किसी मौत की तरह दिखता है। मै यही सोचती हूँ कि ये इंसान कहीं किसी दिन हार्ट अटैक से ना मर जाए”। स्पेस एक्स ने कई नाकामयाब राकेट लौंच्स पर अब तक मिलियंस गँवाए थे। वहीँ टेस्ला ने भी प्रोटोटाइप पर बहुत खर्चा किया था। दोनों ही कंपनियां कंगाल होने वाली थी।
 
मस्क को अपनी कीमती Mc Laren F1 बेचनी पड़ी जिसपर उन्हें बहुत्र नाज़ था। साल 2008 के आखिर में उन्होंने अपने इन्वेस्टर दोस्तों से स्पेस एक्स और टेस्ला को फण्ड करने की गुजारिश की। उनकी कंपनी के कुछ एम्प्लाइज ने इस मुश्किल वक्त में उनका साथ देने के लिए पैसे की पेशकश भी की। मस्क को हर हफ्ते सैलरी देने  के लिए पाई-पाई जोडनी पड़ रही थी।
 
इस दौरान नासा कोई कांट्रेक्टर ढूंढ रहा था जो उसे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की री-सप्लाई कर सके। मस्क ने इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया ताकि ये स्पेस एक्स को मिल जाए। जहाँ तक टेस्ला की बात थी, उन्होंने और फंडिंग के लिए इन्वेस्टर से बात की। उन्होंने अपना बचा-खुचा पैसा भी इसके लिए लगा दिया और तो और सोलर सिटी के अपने कुछ स्टोक्स भी बेच डाले।
किस्मत से 23 दिसम्बर, 2008 में नासा (NASA) ने खुलासा किया कि उसने अपने आईएसएस प्रोजेक्ट के लिए स्पेस एक्स को चुन लिया है। एजेंसी कुल 12 फ्लाइट्स के लिए उन्हें $1।6 बिलियन दे रही थी। उस वक्त मस्क किम्बल के साथ कोलोराडो में छुट्टीयां बिताने गए हुए थे। जैसे ही ट्रानजेकशन का प्रोसेस शुरू हुआ, मस्क ख़ुशी से रो पड़े।  
 
एलन मस्क खाली हाथ अमेरिका आये थे। उन्होंने अपना एक बच्चा खोया था और उनका तलाक लोगो के लिए मनोरंजन का साधन बना था। वे अपनी सभी कंपनी से हाथ धोने की कगार पर थे और उनकी पूरी जिंदगी की मेहनत पानी में मिलने जा रही थी। लेकिन एलन मस्क बहादुरी के साथ इस दुखभरे दौर से निकल कर बाहर आये। जैसा कि उनके एक दोस्त का कहना था” जो उसके साथ 2008 में हुआ, कोई और होता तो शायद झेल नहीं पाता मगर एलन मस्क ने ना सिर्फ इसे सहा बल्कि वे मेहनत करते रहे और अपने इरादों में डटे रहे”।

अध्याय 9

लिफ्ट ऑफ

अपनी जिंदगी में इतना सब कुछ झेलने के बाद उनकी मिसाईल जिसका नाम फाल्कन नाईन था स्पेस तक पहुँचने में आखिरकार कामयाब रही। ये अलग-अलग- देशो और कंपनियों के लिए सेटेलाईट लेकर स्पेस में जाता था। ये राकेट आईएसएस(International space station) को सप्लाई भी डिलीवर करता था। फाल्कन 1 के बाद से ही मस्क ने परफेक्ट राकेट शिप बनाने में काफी पैसे खर्च किये थे। सालो तक उनके इंजीनियर्स ने कोशिश की मगर हर बार फेल होते रहे।
आज स्पेस एक्स महीने में एक राकेट लांच करता है। अपने लोकल और इंटरनेशनल कॉम्पीटीटर्स को पछाड़कर ये मैदान में डटा हुआ है। बाकी कंपनीज बाहर से मंगाए गए सप्लाईज़ पर निर्भर रहती है लेकिन स्पेस एक्स पूरा रोकेट खुद ही तैयार करता है। इसके अलावा एरोनोटिक्स इंडस्ट्री में उनकी राकेट कीमत भी काफी कम है।
 
मस्क और उनके इंजीनियर्स की टीम हमेशा ही स्पेस एक्स को और बेहतर बनाने के नए तरीको की तलाश में रहते है। उनके बनाए राकेट री-युसेबल है। वे धरती पर लौट सकते है। इंजीनियर्स ने उन्हें ऐसा बनाया है कि वे खुद-ब-खुद वापस लांच पैड पर लौट आते है। स्पेस एक्स इतना सक्सेसफुल इसलिए है क्योंकि मस्क बहुत मेहनत करते है और छोटी से छोटी चीज़ पर भी उनका पूरा ध्यान रहता है।
 
मस्क का सबसे बड़ा ख्वाब है कि वे स्पेस फ्लाइट्स को और भी सस्ता और प्रेक्टिकल बना सके। अगर हमारे पास पर्याप्त राकेट सप्लाई हो तो शायद भविष्य में मार्क्स पर कालोनी बनाई जा सके। बाकी की aeronautics इंडस्ट्री स्पेस को बोरिंग बनाती है लेकिन स्पेस एक्स अपने रॉकेट्स और स्पेसशिप्स को मोर्डेन बनाने के लिए लगातार कोशिश में लगी हुई है। एलन मस्क साइंस फिक्शन को हकीकत में तब्दील करने की नयी-नयी कोशिशो में जुटे हुए है।

अध्याय10

इलेक्ट्रिक कार का बदला

टेस्ला मोटर्स ने 2012 से ही एस सीडेन (sedan) का मॉडल बाज़ार में उतार दिया था। ये लक्ज़री कार पूरी तरह से इलेक्ट्रिसिटी पर चलती है और सिंगल बैटरी रीचार्ज पर 300 मील की दूरी तय कर सकती है। इसकी रफ़्तार है 4.2 सेकंड्स में 60 miles per hour. इसमें दो ट्रंक है इसकी सीट केपेसिटी 7 लोगो की है
 
आयल कारो में इस्तेमाल होने वाले इंजन और मशीनरी के बगैर मॉडल एस (model-S) लगभग बिना किसी शोर के चलती है। इसमें सिर्फ एक ही बैटरी पैक है इसके पीछले हिस्से में एक इलेक्ट्रिक मोटर लगी है। मॉडल एस बाकी लक्ज़री सीडेन गाडियों से हर मामले में आगे है।
इस कार के अन्दर एक 17 इंच की टच स्क्रीन है जहाँ से ड्राइवर कार के सभी कंट्रोल्स जैसे स्टीरियो वॉल्यूम एडजस्टिंग या एयर कंडिशन वगैरह कण्ट्रोल कर सकता है। इसमें नेविगेशन और म्यूजिक स्ट्रीमिंग के लिए एक इन्टरनेट कनेक्शन भी मौजूद है। इसलिए तो मॉडल एस को जगह घेरने वाली भारी-भरकम डेशबोर्ड की ज़रुरत नहीं पड़ती।  
 
इसे चलाने वाले को किसी चाबी या इग्निशन बटन की ज़रुरत नहीं है। इसमें बैठते ही इसका सेंसर ड्राइवर का वजन डिटेक्ट कर लेता है और कार खुद ही स्टार्ट हो जाती है। इसके अलावा मॉडल एस को हाइवे के किनारे बने किसी भी सोलर पॉवर स्टेशन पर फ्री रीचार्ज किया जा सकता है।
 
ड्राइवर सीधा जाकर मॉडल एस के स्टोर्स में जाकर इसे खरीद सकता है या ऑनलाइन भी आर्डर कर सकता है। किसी भी सूरत में इलेक्ट्रिक कार सीधे आपके घर या ऑफिस या जहाँ आप चाहे वहां डिलीवर कर दी जायेगी। क्योंकि इसे ट्यून अप या आयल चेंज की ज़रुरत नहीं पड़ती तो मॉडल एस की मेन्टेनेंस भी बहुत कम है। अगर कभी रिपेयर की ज़रुरत पड़े तो टेस्ला के इंजीनियर आकर इसे खुद लेंकर जायेंगे। टेस्ला ने एक स्मार्ट फोन एप्प भी बनाया है जो मॉडल एस के साथ मिलता है। इससे आप अपनी गाडी की लोकेशन का पता लगा सकते है। इसमें सॉफ्टवेयर अपडेट करके जैसे कि फास्टर रीचार्ज, टेस्ला ने इलेक्ट्रिक कार को लगभग एक गेजेट ही बना दिया है। जैसा कि इसके पहले खरीददारों में से एक का कहना है” इसने ट्रांसपोट्रेशन को पूरी तरह बदल दिया, ये पहियों पर रखा एक कंप्यूटर है”।

अध्याय 11

एलन मस्क की यूनीफाइड थ्योरी

राइव ब्रदर्स अपने कजन एलन मस्क के साथ साउथ अफ्रीका में पले-बड़े थे। डॉट कॉम बबल के आने से पहले उन्होंने एवरड्रीम नाम से एक सॉफ्ट वेयर कंपनी खोली थी। ये भाई अब कोई नया वेंचर ढूंढ रहे थे। मस्क ने सलाह दी कि उन्हें सोलर एनर्जी के फील्ड में कुछ करना चाहिए।
 
उस वक्त तक सोलर पैनेल खरीदकर इंस्टाल करना ग्राहकों के लिए काफी मुश्किल काम था। और इस बात की भी कोई गारेंटी नहीं थी कि घर की छतो पर लगे सोलर पैनेल को पर्याप्त सूरज की रौशनी मिलेगी। राइव भाइयो ने 2006 में सोलर सिटी की शुरुवात की।
 
कंपनी के पास ऐसा सॉफ्ट वेयर था जिससे पता चल सकता था कि सोलर एनर्जी सोर्स किसी भी जगह के लिए कमपेटीएबल है कि नहीं। सोलर पैनेल इंस्टाल करने के लिए सोलर सिटी के पास एम्प्लोयीज़ की एक टीम भी थी। इसके अलावा पैनेल्स को मंथली फिक्स रेट के हिसाब से किराए पर लिया जा सकता था। मस्क इस सोलर सिटी के सबसे बड़े शेयर होल्डर थे जिनके पास कम्पनी का 30% हिस्सा था।
 
6 साल बाद सोलर सिटी यू.एस की सबसे बड़ी सोलर इन्स्टालर बन गयी। घरेलु इंस्टालेशन से शुरुवात करके ये अपनी सर्विसेस अब बड़ी-बड़ी कंपनीयों जैसे वाल-मार्ट और इंटेल आदि को देते थे। साल 2012 में सोलर सिटी एक पब्लिक कंपनी बन गयी और 2014 में इसकी नेट वर्थ $ 7 बिलियन तक पहुँच चुकी थी।
मस्क ने देखा कि सिर्फ घंटे भर की सोलर एनेर्जी से दुनिया की पूरी एनेर्जी डिमांड एक साल तक पूरी की जा सकती है। इसका तरीका ये था कि बैटरी पैक्स को चार्ज रखा जाए जिन्हें रात के समय और बिजली जाने पर इस्तेमाल किया जा सके। इसके साथ ही बेहतर क्वालिटी के सोलर सेल्स का इस्तेमाल करके सूरज की रौशनी को एनेर्जी में बदला जाना चाहिए। साल 2014 में ये सब मुमकिन कर दिखाया।
तीन कंपनियों ने अलग-अलग फील्ड्स में अपना शुरुवात बेहद मामूली तरीके से की। तब इन्हें कोई भी नहीं जानता था मगर ये मस्क की कड़ी मेहनत और लगन का ही फल था कि ये तीनो ही कंपनियां अपने-अपने फील्ड्स में बेहतरीन साबित हुई। साल 2025 में टेस्ला की बनाई 6 गाडिया मार्किट में आ जायेंगी। आने वाले समय में सोलर सिटी एक बहुत बड़ी यूटीलिटी कंपनी बन जाएगी।
 
फ्यूचर में स्पेस एक्स वीकली फ्लाइट्स से हर हफ्ते कार्गो और इंसानों को स्पेस में भेज सकता है। इसके  रीयुज़ेबल रॉकेट्स मून का चक्कर काटकर धरती पर वापस ठीक उसी लोकेशन पर लौट आया करेंगे जहाँ से लांच हुए थे। और मून के बाद स्पेस एक्स की अगली मंजिल होगी मार्स।
 
एलन मस्क की यूनीफाइड फील्ड थ्योरी ये है कि उनकी सभी कंपनियाँ एक दुसरे से रिलेटेड है। उनकी कंपनी सोलर सिटी इलेक्ट्रिक कार को रीचार्ज करने के लिए सोलर पैनेल प्रोवाइड करती है। टेस्ला बैटरी पैक्स प्रोड्यूस करती है जिन्हें सोलर सिटी बेचती है। स्पेस एक्स और टेस्ला अपने प्रोडक्ट्स के डीजाईन और मेन्यूफेक्चर पर नॉलेज शेयर करती है। तीनो ही कंपनियाँ मस्क के भविष्य के सपने को रीप्रेजेंट करती है।  वे इंसानियत के लिए ऐसी एनर्जी चाहते है जो कभी ख़त्म न हो सके जिससे मानवता का विनाश होने से रोका जा सके।
 
एलन मस्क के जीवन में कई मुश्किल घडिया आई। बचपन में उन्हे स्कूल में बहुत परेशान किया गया। उनके पिता के साथ उनका रिश्ता खटास भरा रहा। अपने पहले बच्चे की मौत का सदमा उन्हें झेलना पड़ा और उनकी पहली शादी भी टिक नहीं पाई, इस तरह उन्होंने ज़्यादातर खोया ही था। उनकी कंपनी बर्बाद होते-होते बची थी। प्रेस उनकी निजी जिंदगी और कंपनी की नाकामी को लेकर हमेशा उन्हें बदनाम करता रहा। लेकिन इस सबसे बावजूद एलन मस्क ने हार कभी नहीं मानी। वे अपने रास्ते पर चलते रहे और अपने सपने को पूरा करने की कोशिश में लगे रहे। मस्क वीकेंड्स पर भी काम करते थे और यही वे अपने एम्प्लोयीज़ से भी चाहते थे। एक ऐसा वक्त भी आया जब वे तलाक के बाद जस्टिन के साथ साऊथ अफ्रीका घूमने गए। वहां उन्हें मलेरिया हो गया और उन्हें 10 दिन तक आईसीयू में रहना पड़ा था। इस बारे में मस्क ने कहा” मै मरते-मरते बचा हूँ, छुट्टियों के बारे में मेरा यही विचार है कि छट्टियां जानलेवा हो सकती है।”

This is all summary of book Elon Musk: How the Billionaire CEO of SpaceX and Tesla is Shaping our Future
[Note: This ebook is in English and not in hindi]

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