LOUDER THAN WORDS BY TODD HENRY Hindi Summary

LOUDER THAN WORDS BY TODD HENRY Hindi Summary

LOUDER THAN WORDS BY TODD HENRY SUMMARY IN HINDI

---------- About Book ----------
हर कोई चाहता है की उसकी आवाज़ सुनी जाए पर हर कोई इस में  कामयाब नहीं होता। हो सकता है आपने हर संभव तरीके, strategy और tricks अपनाए होंगे पर ऐसा लगता है जैसे ये दुनिया आपके खिलाफ कोई साज़िश कर रही हो, आपकी आवाज को दूसरों के शोर के तले दबाने की कोशिश कर रही हो। 
पर अब आपकी तलाश ख़त्म हो चुकी है ! आपने एक ऐसी लाजवाब किताब ढूंढ ली है जो न सिर्फ़ आपको सुने जाने का मौका देगी बल्कि एक ऐसी आवाज़ बनने  में  मदद करेगी जिसे सुना ही जाना चाहिए। ये एक ऐसी किताब है जो आपको ऐसा प्रभाव डालने में मदद करेगी जो शब्दों से ज़्यादा असरदार होगा।
 
ये समरी किसे पढ़नी चाहिये ?
•    इंटरप्रेन्योर को  
•    ब्लॉगर्स को 
•    Youtubers को 
•    इंवेस्टर्स को  
•    स्टूडेंट्स को 
ऑथर  के बारे में  
टॉड हेनरी एक जाने माने author और इंटरनेशनल स्पीकर हैं। ये “Accidental Creative” कंपनी के फाउंडर हैं, जो लोगों को अपनी क्रिएटिविटी  और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करती है । टॉड हेनरी ने 4 किताबें पब्लिश की हैं जिनमें उन्होंने काम को बेहतर, ज़्यादा लग्न के साथ और क्रिएटिव बनाने के तरीके बताए हैं।

---------- SUMMARY ----------
LOUDER THAN WORDS BY TODD HENRY

इंट्रोडक्शन 

हम सबके अपने इंटेरेस्ट, पैशन, हॉबीज़ और करियर होते है। आप चाहे किसी भी प्रोफेशन   में  क्यों  न हो पर सक्सेसफुल  होने के लिए एक चीज़ है जो आपके पास ज़रूर होनी चाहिये और वो है आपकी खुद की आवाज़ और उसे  develop  करने के तरीके। 
आपकी आवाज़ एक ऐसी चीज़ है जो सिर्फ आप ही ऑफर कर सकते हैं। ये आपके जीने की वजह और आपका सबसे कीमती खज़ाना है । अगर आपकी आवाज़ सच्ची और अलग हो तो आपके कंटेन्ट को आसानी से दूसरों तक पहुँचाया जा सकता है और लोग उसके साथ relate भी कर पाएँगे। आपकी सच्ची आवाज़ आपके इंटरेस्ट, हॉबीज़, स्किल्स और एक्सपीरियंस की जमा पूंजी है। ये बताती है कि आपके लिए क्या ज़रूरी है और आप किन चीज़ों की परवाह करते हैं। आपकी आवाज़ आपकी ज़िंदगी और करियर की वजह है। आपकी आवाज़ अपने आप  में  एक ऐसी अलग चीज़ है जो सिर्फ आप ही दुनिया तक पहुँचा सकते हैं और यही चीज़ इसे दुनिया की सभी आवाज़ो से अलग बनाती है। 
ये किताब आपको अपनी असल आवाज़ पहचानने  में  मदद करेगी पर उसके लिए आपको 3 इम्पॉर्टन्ट स्टेप्स फ़ॉलो करने होंगे-
पहला स्टेप है, खुद को जानना मतलब की खुद से पूछना की “आप कौन हैं”। दूसरा स्टेप है, अपने विज़न को पहचानना मतलब की खुद से पूछना “आप कहाँ  जा रहे हैं” या “आप कहाँ पहुँचना चाहते हैं”। तीसरा स्टेप है, mastery achieve करना और पूछना “आप वहाँ तक कैसे पहुँचेंगे”। 
आपकी आवाज को ढूँढने और improve करने के पीछे सिर्फ एक ही मकसद है और वो है कि आप लोगों पर अपना ज़बरदस्त  प्रभाव यानी इम्पैक्ट डाल सकें। जैसे-जैसे आप इस किताब को पढ़ेंगे आप सीखेंगे की एक ऐसा कंटेन्ट कैसे बनाया जाए जिससे लोग जुड़ सकें। ये किताब आपको ऐसा इम्पैक्ट डालने में मदद करेगी जो शब्दों से ज़्यादा असरदार होगा । 

Identity

डॉन एक गज़ब के प्रोफेशनल है  जिन्हें अपनी फील्ड  में  काफी एक्सपीरियंस है । उनका विज़न बिल्कुल क्लियर है कि वो कहाँ जाना चाहते हैं पर  उन्हें  ये नहीं पता कि वो वहाँ तक कैसे पहुंचेंगे या इसकी शुरुआत कैसे करनी चाहिये । 
 उन्हें  बताया गया की उनकी कंपनी  में  उनका करंट कॉन्ट्रैक्ट जल्द ही खतम होने वाला है जिसका मतलब है की  उन्हें  अब एक नया जॉब ढूँढ़ना होगा। भले ही वो एक ग्रेट प्रोफेशनल है पर इस सिचुएशन  ने डॉन को अपने फ्यूचर और काबिलियत को लेकर काफी doubtful बना दिया । 
यही समय था जब टॉड हेनरी ने डॉन को एक मैनिफेस्टो लिखने का प्रपोज़ल दिया । Manifesto वो डॉक्यूमेंट  होता है जो आपकी identity, आपका purpose और आपके goals के बारे में बताता है। एक मैनिफेस्टो का पर्पस आपके confidence को इस तरह से बढ़ाना होता है ताकि आप अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकाल कर action ले सकें ।  
डॉन ने टॉड की सलाह मानी और अपने मैनिफेस्टो पर रोज 15 मिनट करीब एक महीने तक काम किया । जब उनका मैनिफेस्टो तैयार हो गया तब  उन्हें  पता चल गया की अब  उन्हें  अगला स्टेप कौन सा  लेना है ताकि वो अपने goal तक जल्द से जल्द पहुँच सकें । 
Manifesto ना सिर्फ हमें challenges देता है बल्कि अपनी लाइफ  में  ऐसे बेसिक उसूल यानी principle बनाने  में  भी मदद करता है जो हमें हमारी जर्नी  में  गाइड कर सकें। 
मैनिफेस्टो एक ऐसा statement है जो हमें ये समझाता है की हम किन चीजों की वैल्यू करते हैं और किन चीजों को लेकर passionate हैं । अपनी पर्सनैलिटी का ये हिस्सा जान लेने से हम आसानी से अपनी identity बना सकते हैं ।

आप कौन हैं ?

ये सवाल पूछे जाने पर ज़्यादातर लोग जवाब  में  अपना नाम, प्रोफेशन, स्टैटस या एजुकेशन के बारे  में  बताएंगे , पर ये सब वो नहीं है जो आप असल में हैं । आपकी identity भी आपके बचपन के एक्सपीरियंस, पैशन , हॉबीज़ और आपके नजरिए से बनती है, जिस पर आप विश्वास करते हैं वो चाहे सच हो या झूठ, ये मायने नहीं रखता ।
 आपकी identity आपके एक्सपेरीएन्स , आप किस चीज़   में  विश्वास करते हैं और कैसे बर्ताव करते हैं, इससे डिफाइन होती है । जब आपके द्वारा लिए गए action आपके शब्दों से ज़्यादा असरदार होंगे तो आपकी identity आपके आस - पास के लोगों से बात करेगी यानी लोग उन्हें समझ पाएँगे। 
अपनी identity को जानना ठीक वैसा ही है जैसे खुद को जानना और ये एक ज़रूरी चीज़ है । जब आप खुद को गहराई से जान लेंगे तब आप किसी और के opinion या किसी भी challenge से आसानी से परेशान नहीं होंगे । 
आपकी identity को ढूँढने के इस सफर  में  आपकी मदद करने के लिए ऐसे  कुछ सवाल हैं जो आपको खुद से पूछने चाहिये ताकि आप खुद को बेहतर तरीके से समझ पाएँ। 
10 ऐसी सिचुएशन की लिस्ट बनाइए जब आप :
1.    आप सबसे ज़्यादा confident महसूस कर रहे हों और आपने अपना बेस्ट दिया हो । 
2.    आप emotional हो गए हों । ऐसी  सिचुएशन  जिसने आपको दुखी या फिर पुरानी यादों  में  पहुँचा दिया हो । 
3.    आपको किसी ऐसी चीज़ से गुस्सा आ गया हो जो आपको अपने या  दूसरों के लिए सही न लग रही हो । 
4.    आपको खुद से बहुत उम्मीद रही हो की अगर हर कोई आपके खिलाफ़ भी हो जाए तब भी आप उस काम को ज़रूर करेंगे ।  
5.    आप प्रॉब्लम को solve  करने  में मगन हो गए हों । किसी ऐसी  सिचुएशन  के बारे  में  सोचिए जब आप बहुत शिद्दत से किसी परेशानी का हल निकलने  में  जुट गए हों । 
ये सवाल पूछकर आप अपनी identity और values को ज़्यादा बेहतर पहचान पाएंगे । इस से आपको idea मिलेगा की आपकी आवाज़ का मकसद क्या है । 
ये  कुछ idea है जिनसे आपको अपने सवालों के जवाब ढूँढने  में  मदद मिलेगी :
आपकी ज़िंदगी के कुछ यादगार पल : ये वो पल हैं जिन्होंने आपकी ज़िंदगी  में ऐसा प्रभाव डाला है की ये आपको आज भी याद हैं । उन सभी यादगार पलों के बारे  में  सोचिए और पता लगाइए की उनमें  ऐसा क्या था जिसने उसे आपके लिए कीमती बना दिया और वो आपको आज भी याद हैं । 
किताबों और article से मिले हुए idea और line : जब भी आप कोई किताब पढ़ते हैं ,हमेशा कोई न कोई ऐसी लाइन या  सिचुएशन  ज़रूर आती है जिससे की आप relate कर पाते हैं. उसे कहीं पर लिख लीजिए और सोचिए की आप उन ideas को अपनी ज़िंदगी से कैसे जोड़ सकते हैं । 
दूसरों के साथ आपकी बातचीत : ग्रेट ideas अपने आप ही आ जाते हैं जैसे की अपने परिवार , दोस्तों , जान – पहचान वालों या किसी अजनबी के साथ बातचीत करने से । दूसरों के साथ बात करना उससे कहीं ज़्यादा फायदेमंद है जितना आप सोचते हैं । किसी दूसरे नजरिए पर खुल कर बात करने से आप एक ऐसा कॉन्सेप्ट  तैयार कर सकते हैं जिसका लोगों के जीवन  में  महत्व हो । 
अंत  में  आता है लोगों पर गौर से ध्यान देना : बातचीत के अलावा ये भी एक बहुत अच्छा तरीका है ideas पाने का। देखिए की लोग क्या करते हैं , कैसे करते हैं. उन चीजों पर ध्यान दीजिए जो ordinary  हों पर आसानी से लोग उसे नोटिस ना  कर पा रहे हों । 
इस किताब  में  दी हुई सारी tips और सलाह मानकर आप दुनिया  में  अपनी एक अलग जगह बना सकते हैं । हमारी असली  आवाज़ सिर्फ हमारे द्वारा ही नहीं बनाई जा सकती. हमारे आस - पास की चीजों पर हमारे response  कैसे होते  हैं, ये चीज भी हमारी आवाज़ को बनाने  में  इम्पॉर्टन्ट रोल निभाती है।

Vision 

मान लीजिए आप एक इंजीनियर हैं जो दो नदियों के किनारों को जोड़ने के लिए एक ब्रिज बनाने जा रहे हैं। जब आप सोचते हैं की आप ब्रिज कैसे बनायेंगे तो आपके मन में सवाल आएगा कि ब्रिज क्यों बनाना है । फिर आप उन चीजों को अपने दिमाग  में  इकट्ठा करेंगे जो ब्रिज बनाने के लिए ज़रूरी हैं । अंत  में  आप समझेंगे की क्या ब्रिज ही सबसे अच्छा तरीका है नदी के किनारों को जोड़ने का। 
अब इसी example को अपनी वर्क लाइफ से relate कीजिए। आपके पास हमेशा एक सही कारण होना चाहिये की आप कौन सी service देंगे और क्यों और इस सर्विस का दूसरों पर क्या असर पड़ेगा। 
आप कभी एक सक्सेसफुल  ज़िंदगी नहीं जी पाएंगे अगर आप अपनी भावनाओं से काम लेंगे। आप एक कामयाब  इंसान तब ही बन सकते हैं जब आपका विज़न साफ होगा कि आपको कहाँ पहुंचना है और आप वहाँ तक कैसे पहुँचेंगे । विज़न लोगों को उनकी असली आवाज़ को बनाने  में  और निखारने  में  मदद करता है। 
ये जानने के अलावा की आपको कहाँ पहुँचना है , विज़न का मतलब है ये जानना की आप किस पर अपना प्रभाव डालना चाहते हैं । इसका मतलब है अपनी audience के बारे  में  जानना और उनको सही तरीके से टारगेट करना। आपका विज़न आपको ये समझने  में  मदद करेगा की आप अपने audience पर कितना प्रभाव डाल पाएंगे । इन चीजों की जानकारी होने  पर आप अपने काम को और बेहतर तरीके से कर पाएँगे । 
जरूरी नहीं है की सब आपसे प्यार करें इसीलिए आपको उन लोगों पर ध्यान देना है यानी अपनी एनर्जी और फोकस को उन लोगों पर लगाना है जो आपके काम को पसंद करें। अपनी खुद की आवाज़ बनाने से सीधा मतलब है की आपके पास कुछ ऐसे लोग होने चाहिये जो आपकी आवाज़ को सुनना पसंद करें । 
आपको हर किसी पर असर नहीं डालना है , इसकी कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि  अगर एक बार आप इस  में  फँस गए की लोग क्या सोचते हैं और वो आपसे क्या चाहते हैं तो आप कभी अपनी अलग आवाज़ तैयार नहीं कर पाएँगे । अपने काम को कुछ लोगों की राय की वजह से दाँव पर न लगाएँ । 
यहाँ एक principle  है जो की आपको अपनी audience का पता लगाने  में  और उन्हें target करने  में  मदद करेगा.  ये आपको समझने  में  मदद करेगा की आप किन लोगों पर अपना प्रभाव डालना चाहते हैं और आपको एक साफ विज़न भी देगा । 
 मैथ्यू  को लोगों को स्कूल  में  परेशान करना बहुत पसंद है, वो स्कूल में दादागिरी करता फिरता है। जब क्लास खतम हो जाती है तो वो सीढ़ियों के नीचे लोगों का इंतज़ार करता है और उनका मज़ाक उड़ता है। वो कभी दूसरे बच्चों को मारता है, कभी उन पर ball फेंकता है, कभी उन्हें अलग-अलग नामों से चिढ़ाता है। 
कुछ बच्चे जिनके साथ ऐसा होता था वो चुपचाप वहाँ से चले जाते थे तो वहीं  कुछ बच्चे हिम्मत करके अपने लिए खड़े होते थे । हर बार जब ऐसा होता था तो  मैथ्यू  उन्हें उकसाने के नए-नए पैंतरे ढूँढता था। 
कभी – कभी वो अपने और दूसरे बच्चे के बीच एक लाइन खींचकर कहता था, “आओ, अगर तुमने ये लाइन क्रॉस की तो हम वो लड़ाई करेंगे जो तुम चाहते हो”। 
ज़्यादातर बच्चे इस बारे  में  दो बार सोचते और फिर वहाँ से चले जाते पर कुछ उससे लड़ने के लिए तैयार हो जाते और अंत  में  स्कूल के मेडिकल क्लिनिक  में  पाए जाते थे । 
उकसाने और जगाने  में  बहुत बड़ा फ़र्क होता है । उकसाना मतलब दूसरे इंसान को चैलेंज करना ताकि वो बिना सोचे समझे action ले। दूसरी तरफ जगाने का मतलब है बिना किसी निजी स्वार्थ के  किसी इंसान के अंदर ऐसी चीज़ लेकर आना जिससे की उसे inspiration मिल सके और वो motivated महसूस करे । 
यूं तो अगर सोचा जाए तो ज़्यादातर लोग दूसरों को उकसाने की जगह जगाना  ही पसंद करेंगे , पर दुनिया  में  ऐसा नहीं हो रहा है । 
कुछ लोग जल्दी रिज़ल्ट पाना चाहते हैं और इस वजह से वो अपना काम इस तरीके से करते हैं की वो लोगों को action लेने के लिए उकसा सकें । 
वो लोगों को बहुत ही होशियारी से ऐसी चीजें सोचने पर मजबूर करते है जिनसे की लोगों को तुरंत खुशी या छोटी – छोटी खुशियाँ मिलें और उनका काम निकल जाए। 
अपनी असली  आवाज़ को develop  करने के लिए आपको पहले ये पता करना ज़रूरी है की आप अपनी audience को उकसाना चाहते हैं या जगाना चाहते हैं। सोचिए की आपने अब तक कैसे काम किया है , क्या आप सच  में  लोगों के लिए कुछ करना चाहते हैं या सिर्फ खुद के लिए ? 
अंत  में  आपको  ये देखना ज़रूरी है की क्या आप अपनी audience को सही ढंग से समझ पा रहे हैं या नहीं । अगर आप उन पर अपना प्रभाव डालना चाहते हैं तो जरूरी है की आप  उन्हें  ऐसी information दें जिनसे  उन्हें  मदद मिल सके बजाए इसके की आप उनको फोर्स करे की वो आपको सुने और action लें । 
अपने काम  में  सक्सेसफुल होने के लिए  आपको बहुत सारे लोगों की ज़रूरत नहीं है जो आपको फॉलो करें । कामयाब  होने का मतलब है कुछ चुनिंदा लोगों का आपके साथ लंबे समय तक होना जो आपको हमेशा सुनना पसंद करें । 
जब आप अपने  audience की भावनाओं और ज़रूरतों या डिमांड को सबसे ऊपर रखेंगे तब आपको एक साफ विज़न मिलेगा जिससे की आप लोगों के साथ बेहतर तरीके से जुड़ पाएंगे ।

Mastery 

अपनी identity और vision जान लेने के बाद आप खुद को कहाँ देखना चाहते हैं और किन लोगों पर अपना प्रभाव डालना चाहते हैं, अब समय है की आप खुद से पूछें की आप वहाँ तक कैसे पहुँचेंगे ? 
कछुए और खरगोश की कहानी  में  एक लाइन थी – slow and steady wins the race मतलब जो धीमी रफ्तार से संभलकर चलता है वही जीतता है । शुरुआत  में  सभी को लगता है की खरगोश ही जीतेगा क्योंकि  हम कछुए की धीमी   रफ्तार की तुलना खरगोश की बिजली जैसी तेज़ रफ्तार से नहीं कर सकते हैं। 
खैर, कहानी ये नहीं थी की कौन तेज़ और कौन धीमा है । कहानी थी जानवर की सोच पर ।  खरगोश ने सोचा की वो ही दौड़ जीतेगा चाहे कुछ भी हो जाए जिसकी वजह से उसने बीच रास्ते  में  आराम करने का फैसला लिया. ये सोचकर की वो आराम के समय को अपनी तेज़ रफ्तार से कवर कर लेगा । 
वहीं दूसरी तरफ कछुए को विश्वास था की अगर वो बिना रुके लगातार चलता रहा तो वो ज़रूर जीतेगा इसलिए उसने हार मानने के  बजाए लगातार एक ही रफ्तार  में  चलना ठीक समझा और इसी फैसले ने उसे जिता  दिया । 
जैसा की आप सोच रहे हैं , slow and steady एक बहुत ही अच्छा उपाय है किसी भी रेस को जीतने का ,पर सिर्फ यही काफी नहीं है । सिर्फ लगातार action लेते रहना ही काफी नहीं , आपको ये भी ध्यान रखना होगा की जो actions आप ले रहे हैं वो आपको आपके goal के करीब ले जा रहे हैं या नहीं। 
Action लेने के साथ ही आपको अपने काम  में  आगे भी बढ़ना होगा । आपको अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकालना होगा, इस दुनिया को जानना होगा और अपने skills और काबिलियत पर काम करना होगा । आपको समझना होगा की सिर्फ पूरा दिन काम करने  में  और पूरा दिन अच्छा काम करने  में  फ़र्क  होता है। आपको उन चीजों पर ज़्यादा फोकस करना चाहिये जो आपको आपके goals तक पहुँचने  में  मदद करें । 
अपनी असली  आवाज़ को develop  करने के लिए आपको लगातार अपनी skills  को develop  करना होगा । इसके अलावा आपको सीखना होगा की मौके कैसे ढूँढे जाएँ  और  उन्हें  कैसे use किया जाए ताकि आप आगे बढ़ सकें । 
सिर्फ लगातार काम करते रहना ही काफी नहीं है । आप क्या जानते हैं उससे ज़्यादा ज़रूरी है की आप क्या करते हैं । आपका बहुत कुछ जानना ही काफी नहीं होगा , आपको कुछ करना भी होगा यानी एक्शन लेना होगा । इसलिए आपको एक रूटीन बनाना  होगा और उसे फॉलो करना होगा । 

अगर आप दूसरों पर प्रभाव डालना चाहते हैं , तो आपका सीखते रहना ज़रूरी है। आपको एक ऐसा इंसान बनना होगा जिसने आपनी ज़िंदगी को सक्सेसफुल बनाने के लिए खुद action लिए । अपनी skills को master कीजिए  और एक ऐसे इंसान बनिए जो पूरी दुनिया पर अपना इम्पैक्ट  डाल सके।

Everyday Practices for Developing Your Voice

यहाँ तक आपने अपनी identity , vision और skills को develop  करने का क्या इम्पोर्टेंस  होता है ये सीखा । अब आप ये सब जानकर या तो थोड़ा डरा हुआ या ज़्यादा ही खुश महसूस कर रहे होंगे क्योंकि आपको इतनी सारी information एक ही जगह मिल गईं, पर अच्छी बात ये है की आपको डरने की कोई ज़रूरत नहीं है । ये chapter पढ़कर आपको समझ आ जाएगा की आपको अपने  डेली लाइफ  में  कौन से action लेने हैं और कैसा mindset यानी नज़रिया रखना है ताकि आप अपनी असली  आवाज़ को develop  कर सकें । 
मान लीजिए की आप एक मूर्ति बनाने वाले आर्टिस्ट हैं जो एक ऐसी मूर्ति बनाने जा रहा है जो अब तक की सबसे शानदार मूर्ति होने वाली है । मूर्ति बनाने के दौरान आप उन सारे पत्थरों को हटा देते हैं  जिसकी मूर्ति  में  जरूरत नहीं है। आप उस मूर्ति को वैसा बनाते हैं  जैसा आप चाहते हैं और उस पर तक तक काम करते रहते हैं  जब तक वो एक masterpiece न बन जाए । 
अपनी ज़िंदगी  में  भी आपको बिल्कुल ऐसी  ही सोच develop  करने की जरूरत है। आप अपनी ज़िंदगी के आर्टिस्ट  हैं , इसका मतलब ये है की ये आपके हाथों  में  है की आप अपना दिन कैसा बनाना चाहते हैं । ये आपको तय करना होगा की वो कौन सी आदतें हैं जो आपको छोड़नी  होंगी और कौन से नए action लेने होंगे । 
इसकी शुरुआत करने के लिए , हम सबसे पहले बात करेंगे 3 बेसिक ज़िम्मेदारियों की जो आपको समझनी हैं -  
पहली : आपके क्लाइंट, बॉस, कंपनी और परिवार आपकी ज़िम्मेदारी हैं।  अगर आप एक बार ये ज़िम्मेदारी निभाने  में  फेल हुए तो ये लोग बुरी तरीके से आपके काम से अफेक्ट हो सकते हैं । 
दूसरा : आप खुद भी अपनी ज़िम्मेदारी हैं । अपने अंदर की आवाज़ सुनने के लिए , अपने अंदर के इंटेरेस्ट और पैशन को जानने के लिए , ये आपकी ज़िम्मेदारी है की आप इस दुनिया को अपनी काबिलियत दिखा पाएँ । बाहरी चीजों को अपने ऊपर हावी मत होने दीजिए और उसे आपके इनर पावर को मत छीनने दीजिए । 
तीसरी और आखरी चीज : आपका काम आपकी ज़िम्मेदारी है । आपको ये समझना होगा की आप जिस idea पर अभी काम कर रहे हैं वो किसी बड़े और इम्पॉर्टन्ट  काम से कम नहीं है । हर वो प्रोजेक्ट या idea जिस पर आप काम करते हैं उसकी एक खुद की ज़िंदगी होती है । वो idea भी खुद  में  बड़ा  बनना चाहता है । ये आपकी ज़िम्मेदारी है की आप उस idea को इसी तरह से पेश करें जैसा वो चाहता है मतलब की growth और दुनिया पर प्रभाव डालने लायक । 
बहुत सारे लोगों को  अपनी आवाज़  को develop  करने  में  मुश्किल होती है जब वो इन तीनो ज़िम्मेदारियों में  से किसी एक को अच्छे से नहीं निभा पाते हैं । इसीलिए ये जरूरी है की आप इन तीनों ज़िम्मेदारियों को एक साथ अच्छे ढंग से निभाएँ। 
पहली चीज जो आपको करनी होगी वो है पता लगाना की कौन सी ज़िम्मेदारी निभाने  में  आपको मुश्किल हो रही है । ये जानने के बाद आपको हर वो चीज़ करनी है जिससे की आप उसे बेहतर तरीके से निभा सकें । 
अगर आप खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं तो आप अपने दिन को plan करें और कुछ समय ऐसी चीजों के लिए निकालें जिससे की आपकी personal growth हो सके । अगर आप अपने बॉस या क्लाइंट के साथ connect नहीं कर पा रहे तो आप बीच-बीच  में उन्हें  समझने के लिए उनसे बातें करें । अगर आप अपने काम को नहीं सुधार पा रहे तो टाइम निकालिए और उसके बारे  में  पढ़कर अपनी skills पर काम कीजिए । 
इसे  करने का राज़ है की आप हर दिन एक एक कदम आगे बढ़ें । आप बड़े goals तक तभी पहुँच पाएंगे जब आप छोटे goals पर काम करेंगे। 
इस चैप्टर  में  आप कुछ प्रैक्टिकल तरीके सीखेंगे जिससे की आप अपनी असली  आवाज़ को बेहतर बना पाएँगे। 
पहला है की आप किसी भी idea को अच्छे से सुने । Idea को इस तरह से सुने जैसे की वो नया नहीं बल्कि पहले से ही इस दुनिया  में  मौजूद है। ये करने के लिए आपको उस idea को अपना समय और एनर्जी दोनो देने होंगे । 
हर हफ्ते समय निकालकर अपने पुराने और नए काम को पढ़ें । हर काम को पढ़ें और देखें अगर उससे आपको अपने काम के लिए कोई नया idea या मौका मिलता है । 
दूसरा है अपने विचारों के साथ अकेले समय बिताना । इसका मतलब ये नहीं है की आप अकेले है और शांति से बैठकर ट्विटर , फेसबुक  या इंस्टाग्राम चला रहे हो । अपने विचारों यानी थॉट्स के साथ अकेले रहने का मतलब है - सोचना , और बहुत सारे लोगों को सोचना कुछ खास पसंद नहीं होता । 
एक बार अगर आप सोचते हैं और खुद को उस सोच के साथ रहने के लिए राज़ी कर लेते हैं तो वो आपके अंदर उसे  सच्चाई  में  बदलने के लिए action लेने की इच्छा को पैदा करने लगता है । 
हालाँकि , बहुत से लोगों को action लेना पसंद नहीं होता क्योंकि  वो बस अपने कम्फर्ट ज़ोन  में  ही रहना  चाहते हैं । 
खुद को एक बिजनसमैन की तरह देखिए जो पैटर्न  को समझकर प्रॉब्लम का हल निकालता है। 
आप एक writer  भी हो सकते हैं जिसका दुनिया को देखने  का नजरिया बिल्कुल ही अलग है  और आप इस दुनिया को कई ग्रेट और meaningful शब्द यानी words दे  सकते हैं । इनमें  से कोई भी चीज़ बिना गहराई से सोचे बिना संभव नहीं  है । 
तीसरी exercise दूसरी वाली से जुड़ी हुई है । आपको फ्री writing की प्रैक्टिस करनी चाहिये । आप ऐसा बहुत  ही आसानी से कर सकते है बस आपको जरूरत है एक पेन और पेपर की जिसपर आप वो सारी चीजें लिख सके जो आपके दिमाग  में  उस वक़्त आ रही हो। आपको उसे improve नहीं करना है । आपको सिर्फ अपने विचारों को आने देना है । 
हमारा मकसद ये पता लगाना है कि कौन से शब्द और पैटर्न  किसी idea को तैयार करने के लिए सही होंगे।  ये करने से आपको पता चलेगा की आपके दिमाग  में  क्या चल रहा हैऔर ये आपको खुद को समझने  में  भी मददगार साबित होगा । 
आप ये किसी और के लिए नहीं बल्कि खुद के लिए कर रहे हैं । इसलिए अपने आप से ज़्यादा उम्मीद  न रखते हुए सिर्फ वो लिखें जो आपके दिमाग  में  आ रहा हो । 
अंत  में  आता है हमदर्दी को develop  करना ।  याद रखिए की एक ज़बरदस्त इम्पैक्ट  डालने के लिए आपका अपने साथ – साथ दूसरों के बारे  में  सोचना भी जरूरी है । इसलिए ये important  है की आप दूसरों के साथ हमदर्दी बनाए रखें । आप ऐसा 4 स्टेप्स  में  कर सकते हैं :
पहला : decide- अपने आप को याद दिलाइए की आप दूसरों पर अपना प्रभाव क्यों डालना चाहते हैं । 
दूसरा : identify - पता लगाइए की आपकी audience कौन सी प्रॉब्लम से गुज़र रही है और खुद को उस जगह रख कर देखिए । 
तीसरा : recall - उस समय को याद कीजिए जब ऐसी ही प्रॉब्लम आपने अपनी ज़िंदगी  में  फेस की थी। 
चौथा : act - पता लगाइए की आप इस प्रॉब्लम का कौन सा solution  उस इंसान को ऑफर कर सकते हैं जो इस प्रॉब्लम से अभी गुज़र रहा है ।

Conclusion 

आपकी असली  आवाज़ आपकी identity , आपके vision और आपकी mastery का  मेल है । ये रातों – रात नहीं हो सकता है और इसे लंबे समय की ज़रूरत होती है जिसमें आप बार - बार गलतियाँ करेंगे और उनसे सीखेंगे । आप अपने एक्सपीरियंस  और चुनौतियों से सीखेंगे । 
इस समरी  ने आपको एक ऐसा रास्ता दिखाया है जिससे की आप सीख सके की आप ऐसा इम्पैक्ट  कैसे डाल सकते हैं जो शब्दों से ज़्यादा असरदार हो । 
पहले आपने सीखा की आपकी identity, आपके character , experience और interest  में  ही छुपी होती है । आपका आपकी identity को जानना ज़रूरी है तब ही आप इस दुनिया  में  अपना इम्पैक्ट  डाल सकेंगे । 
दूसरा आपने ये सीखा की vision का मतलब है ये जानना की आप कहाँ पहुंचना  चाहते हैं. उससे भी ज़रूरी ये है कि  आप अपने सफर  में  किन लोगों पर अपना इम्पैक्ट  डालना चाहते हैं । आपने ये भी सीखा की उकसाने और जगाने  में  क्या फ़र्क  होता है और इन दोनों  में  से किसे चुनना ज़्यादा सही है। 
तीसरा आपने सीखा की mastery मतलब लगातार आगे बढ़ते रहना । आप तब बेहतर प्रभाव डाल पाते हैं जब आप उन चीजों पर काम करते हैं जो आप जानते हैं । 
अंत  में  आपने कुछ डेली लाइफ  के तरीके और एक्सरसाइज  सीखीं जिससे की आप एक practical mindset develop  कर सकें । 
इससे पहले की आप ये समरी ख़त्म हो, हम चाहते हैं की आप ये याद रखें की आपको सुने जाने के लिए आपका ज़ोर - ज़ोर से बोलना ज़रूरी नहीं है । आपको खुद को उन जगहों पर धक्का देनी की ज़रूरत नहीं है जिनके लिए आप ना बने हों । आपको लोगों को फोर्स करने की ज़रूरत भी नहीं है की वो आपको पसंद करें । 
आपकी आवाज़ अलग है , चाहे वो कुछ भी कहें । कोई भी बिल्कुल वैसा ही idea लेकर नहीं आ सकता जैसा आपके पास है । कोई भी बिल्कुल आप ही जैसा इम्पैक्ट  नहीं डाल सकता । बस आपको खुद पर विश्वास बनाए रखना है , ठीक वैसे ही जैसे ये यूनिवर्स आप पर विश्वास करता है । 
आप यहाँ है क्योंकि आपको कुछ बड़ा करने के लिए ही चुना गया है । इस भविष्यवाणी को सच कीजिए और एक ऐसी आवाज बनिए जिसे हर किसी को जरूर सुनना चाहता हो।
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[Note : The ebook is in english]

LOUDER THAN WORDS BY TODD HENRY 

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