Made In America - Sam Walton Hindi Summary

 Made In America - Sam Walton Hindi Summary

---------- About Book ----------

एक्स्ट्राआर्डिनरीसक्सेस पाना हर इंसान की दिली तमन्ना होती है. यह बुक आपको Walmat के फाउंडर सैम वॉल्टन की दुनिया में ले जाएगी जहाँ आप जानेंगे कि वो कैसे ज़मीन से उठकर आसमान के शिखर पर पहुँचे.इस कहानी से आप उन प्रिंसिपल्स के बारे में जानेंगे जो एक बिज़नेस को सक्सेसफुल बनाती है. आप उन गलतियों के बारे में भी

जानेंगे जो हम अक्सर बिज़नेस में करते हैं औरये भी जानेंगे किउनसे कैसे बचना चाहिए.

यह समरी किसे पढ़नी चाहिए?

जो लोग एक नया बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं या शुरू कर रहे हैं, हरमैनेजर जो रिस्क लेने के लिए बिलकुल तैयार है औरवो सब जिसके पास भी एक कमाल का आईडिया है और जो एक्स्ट्राआर्डिनरी रिजल्ट्स हासिल करना चाहते हैं.

ऑथर के बारे में

सैम वॉल्टन Walmart स्टोर के फाउंडर और चेयरमैन हैं. कुछ समय रिटेल बिज़नेस में किस्मत आजमाने के बाद उन्होंने Walmart के नाम से फेमस डिस्काउंट स्टोर्स की chain सेदुनिया को मुट्ठी में कर लिया था.वो अपनी आउट ऑफ़ द बॉक्स थिंकिंग के लिए जाने जाते थे क्योंकि जब दूसरे स्टोर ओनर्स बड़े शहरों की ओर फोकस कर रहे थे तब उन्होंने छोटे शहरों में अपनी हटके सोच से कदम जमाए. 1992 में उनकी मृत्यु हुई और वो पीछे एक ऐसा एम्पायर छोड़ गए जिसका कोई मुकाबला नहीं कर सकता. 

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Made In America - Sam Walton

इंट्रोडक्शन(Introduction)

क्या आप एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी बनना चाहते हैं? क्या सच में आपमें अपने सपनों को हकीकत बनाने की लगन है? अगर हां, तो आप सोच रहे होंगे कि कैसे और कहाँ से शुरुआत करें, तो ये बुक आपके सवालों का जवाब है.

ये बुक आपको Walmart की सक्सेस स्टोरी के बारे में बताएगी. इस बुक में आप बिज़नेस चलाने के सभी सीक्रेट्स के बारे में जानेंगे. आप ये भी सीखेंगे कि अपने बिज़नेस को कैसे expand करें औरउसे कैसे मेन्टेन करें.

इस बुक में अमेरिका के सक्सेसफुल कम्पनीज के इम्पोर्टेन्ट प्रिंसिपल्स हैं. इसमें कई प्रिंसिपल्स शामिल हैं जैसे कड़ी मेहनत और पैसे की वैल्यू समझना, अगर आप फेल हो जाएँ तो हार ना मानना और कुछ नया और ज़रा हट के सोचना यानी आउट ऑफ़ द बॉक्स थिंकिंग.

ये बुक सबसे अलग और बेहतरीन इसलिए है क्योंकि इसमें उन सच्ची घटनाओं के बारे में बताया गया है जिसने Walmart के ओनर सैम वॉल्टन को आर्डिनरी से एक्स्ट्राऑर्डिनरी बना दिया, ज़मीन से उठाकर आसमान के शिखर पर पहुँचा दिया. आज उनकी गिनती दुनिया के सबसे अमिर लोगों में की जाती है. ये कहानी काफ़ी दिलचस्प है और आप इससे बहुत कुछ सीखेंगे.

अगर आप एक नया बिज़नेस शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं, दुनिया में अपना नाम बनाने की सोच रहे हैं तो ये बुक आपको वो सारी नॉलेज देगी. तो इस एडवेंचर को एन्जॉय करें और हाँ ज़रूरी बातों के नोट्स बनाना ना भूलें.

लर्निंग टू वैल्यू अ डॉलर (Learning to Value a Dollar)

क्या आपको लगता है कि आपकी सक्सेस को बनाने या बिगाड़ने में एक डॉलर की भी बहुत अहमियत होतीहै? आपका जवाब दिखाएगा कि आपकी परवरिश किस तरह हुई. अगर आप एक ऐसे परिवार में पले बढ़े हैं जहाँ हमेशा पैसों की तंगी रही हो और पैसा कमाने के लिए संघर्ष करना पड़ा हो तो आपको एक एक पाई की कीमत का पता होगा.

छोटी से छोटी रकम कमाने के लिए कड़ी मेहनत करना कोई बुरी बात नहीं है. बल्कि ये तो एक इंसान को ज़िम्मेदारी और चीज़ों की कदर करना सिखाता है. अगर आप पूरा दिन किसी चीज़ को हासिल करने में लगाते हैं तो उसे पाने के बाद उसकी कीमत और आपकी ख़ुशी दोनों दुगनी हो जाती है.

सैम बहुत कम उम्र से ही एक एक डॉलर की कीमत समझते थे. सैम का परिवार खेती (फार्मिंग) करता था और उनका बचपन काफ़ी कठिन परिस्थितियों से गुज़रा. उनका परिवार पुराने ख़यालात का था और एक एक डॉलर बहुत सोच समझ कर ख़र्च करता था. उनके पिता ने हर तरह के छोटे मोटे काम किए. उन्हें बिज़नेस करना बहुत पसंद था और वो मोल भाव करने में माहिर थे.

उनकी माँ भी बहुत मेहनती थी. एक बार उन्होंने दूध का बिज़नेस शुरू करने का फ़ैसला किया. तो सैम दूध निकालने का उनकी माँ के साथ उसे बोतल में पैक करने के काम में लग गए. सब तैयार होने के बाद सैम उसे अपने कस्टमर्स को डिलीवर करने जाते.

माना कि ये बिज़नेस काफ़ी छोटा था क्योंकि उनके कुछ गिने चुने कस्टमर ही थे लेकिन इसने सैम को एक ऐसी बात सिखाई जिसे वो कभी भुला नहीं पाए. उन्होंने पहली बार जाना कि एक डॉलर कमाना भी कितना मुश्किल होता है, एक डॉलर कमाने के लिए भी कितनी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.

हालांकि,आगे चलकर एक सवेरा ऐसा भी आया जो उनके लिए एक सुनेहरा सवेरा बन गया था जब उन्हें पहली बार एहसास हुआ कि वो दुनिया के सबसे अमीर आदमी बन गए थे, लेकिन दिल से से वो तब भी पहले वाले सैम ही थे. वो अपनी वही पुरानी ट्रक ड्राइव करते और किसी हाय फाय सैलून में नहीं बल्कि पास वाले नाइ की दुकान पर जाते थे. लोगों ने उम्मीद की थी कि अब वो एक आलिशान घर में और रईसों की तरह जीएँगे लेकिन उनका मानना था कि वैसा जीवन सिर्फ़ पैसों और एनर्जी की बर्बादी होती है.

सैम पैसों की कदर करते थे.वो पैसों से प्यार नहीं करते थे ,जैसा कि उनके ज़्यादातर दोस्त कहते थे.लेकिन ये सच नहीं था उन्हें सिर्फ़ टॉप पर बने रहने में दिलचस्पी थी. पैसों की तरफ़ उनके नज़रिए और ज़िम्मेदारी ने उन्हें हमशा सबसे ऊपर बनाए रखा.

सक्सेस का मतलब हमेशा एक सेलेब्रिटी होना या बड़े बड़े इवेंट्स में इनवाईट किया जाना नहीं होता.अगर आप नंबर वन बनना चाहते हैं और लंबे समय तक नंबर वन बने रहना चाहते हैं तो आपको पाई पाई की अहमियत समझनी होगी.

स्टार्टिंग ओन अ डाइम  (Starting on a Dime)

जो लोग ज़िम्मेदार होते हैं और लाइफ के प्रति एक पॉजिटिव सोच रखते हैं वो कुछ भी हासिल कर सकते हैं ख़ासकर अगर वो ambitious हों तो. जिस इंसान पर कुछ हासिल करने की धुन सवार हो जाए तो उसे कोई नहीं रोक सकता.

सक्सेस की चाहत और भूख ही वो जूनून है जो सक्सेसफुल लोगों को दुनिया की भीड़ से अलग करती है.ये इच्छा आपको अपना बेस्ट परफॉर्म करने के लिए पुश करती है. हो सकता है कि आपको बिलकुल नीचे से शुरुआत करनी पड़े, हो सकता है कि आपको कई काम ऐसे भी करने पड़े जो आपको पसंद नहीं हैं.

लेकिन पेशेंस के साथ लगे रहे, हर चैलेंज को एक मौके के रूप में देखें. हिम्मत करके एक्सपेरिमेंट करें. कभी भी पहला कदम आगे बढ़ाने से ना डरें. आपको एक बिज़नेस शुरू करने के लिए अमीर होने की ज़रुरत नहीं है बस आपको स्मार्ट होने और अपने options को ध्यान से स्टडी करने की ज़रुरत है. यहाँ तक कि अगर आप किसी मोड़ पर फेल भी हो जाते हैं तो ख़ुद पर इस हार को हावी ना होने दें. अपने अंदर जोश भर कर दोबारा शुरुआत करें.

आपको क्या लगता है कि सैम ने इतनी बड़ी सफ़लता कैसे हासिल की? उनका जन्म किसी अमीर घराने में नहीं हुआ था और ना ही उन्हें विरासत में कोई जायदाद मिली थी. वो बहुत गरीबी से उठे थे. जो ख़ास बात उन्हें सबसे अलग बनाती है वो है उनकी सबसे बेस्ट बनने की ख्वाइश.

सैम के भाइयों का कहना था कि ये एम्बिशन उन्हें अपनी माँ से मिला था. उनकी माँ ने बहुत छोटी उम्र में ही उन्हें कड़ी मेहनत और इमानदारी जैसे वैल्यूज को सिखाया था. उन्होंने सैम को सिखाया कि कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आप कौन हैं या क्या करते हैं,बस हर काम में अपना बेस्ट दो.

सैम को नई चीज़ों के साथ एक्सपेरिमेंट करना बहुत पसंद था. अपने स्कूल के दिनों में उन्होंने स्कूल के हर क्लब को ज्वाइन किया, हर स्पोर्ट में participate किया. वो जो भी करते उसमें अपना बेस्ट परफॉर्म करते.यहाँ तक कि वो अपने स्कूल काउंसिल के प्रेसिडेंट भी बने थे.

भले ही उनकी डेली लाइफ काफ़ी बिजी थी लेकिन कुछ पैसे कमाने के लिए वो काम करने का वक़्त निकाल ही लेते थे. वो कभी भी अपने परिवार के मदद के सहारे नहीं रहे. उन्होंने ख़ुद अपने कॉलेज की फ़ीस का खर्चा उठाया था.

सैम ने JC Penny में काम करके रिटेल बिज़नेस को ज्वाइन करने का फ़ैसला किया. उन्हें अपना जॉब बहुत पसंद था. वहाँ वो एक मैनेजर से मिले जिन्होंने उन्हें इस रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए मोटीवेट किया.यही वो जगह थी जहां से सैम ने रिटेल बिज़नेस के साथ अपने सफ़र की शुरुआत की.

फ़िर एक दिन, उन्हें एक ख़ास मौका मिला जब एक दुकान के मालिक का दिवाला निकल गया था. वह अपने दुकान की हर चीज़ को बेचने की कोशिश कर रहा था. सैम ने उस स्टोर को चलाने का चैलेंज एक्सेप्ट किया. स्टोर पिछले मालिक के अंडर अच्छा परफॉर्म नहीं कर रहा था लेकिन सैम ने उसे एरिया का बेस्ट स्टोर बनाने की ठान ली थी.

पहले सैम ने बिज़नेस चलाने के आर्डिनरी रूल्स को फॉलो किया लेकिन जब ज़्यादा बात नहीं बनी तो उन्होंने एक्सपेरिमेंट करना शुरू किया. सैम ने उन स्टोर्स पर गौर करना शुरू किया जिनसे उनका कम्पटीशन था. इससे उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला और आलम ये था कि दो साल बाद सैम उनसे काफ़ी आगे निकल गए थे.

सैम बहुत होशियार और सतर्क थे. एक बार की बात है जब उन्हें पता चला कि दूसरे स्टोर का मालिक अपना बिज़नेस बढाने के लिए एक और स्टोर खरीदने वाला है तो उन्होंने उस स्टोर के मालिक को ढूँढा और ख़ुद उसके स्टोर को खरीद लिया. अब वो दो स्टोर के मालिक बन गए थे. उन्हें बहुत प्रॉफिट होने लगा और ये बात कुछ लोगों को खटकने लगी थी.

फ़िर सैम के सामने को एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम का सामना करना पड़ा. सैम को स्टोर्स का रेंट देना पड़ता था और 5 साल बाद उनके स्टोर्स के रेंट का वक़्त पूरा हो चुका था. लैंडलॉर्ड के उसे दोबारा शुरू करने से साफ़ इनकार कर दिया. सैम ने बहुत मेहनत कर के इन स्टोर्स को जमाया था और अबएक झटके में ये सब उनके हाथों से जाने वाला था.

लेकिन उनके पास कोई चारा नहीं था. ना जाने कितने लोग थे जिन्हें सैम जितनी सफ़लता पाने की इच्छा थी. सैम ने हर संभव कोशिश की लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला. इसलिए उन दोनों स्टोर्स को छोड़कर सैम शहर से दूर चले गए.

हाँ, यहाँ वो हारे ज़रूर लेकिन वो मन से नहीं हारे बल्कि उनका इरादा और भी पक्का हो गया था. उन्हें समझ में आ गया था कि इस दुनिया में सर्वाइव करना इतना भी आसान नहीं है. उन्होंने अपनी गलतियों से सीख कर आगे बढ़ने का फ़ैसला किया लेकिन वो जान गए थे कि उन्हें और ज़्यादा स्मार्टतरीके से चीज़ों को हैंडल करना होगा. 

बाउंसिंग बैक (Bouncing Back)

अगर आप एक ऐसे इंसान हैं जो रिस्क लेने से नहीं डरता  और अगर आप नई चीज़ों और नए आईडिया के साथ एक्सपेरिमेंट करना पसंद करते हैं तो आपने ज़रूर उन पलों को एक्सपीरियंस किया होगा जब आप फेल हुए होंगे. शायद कभी कभार ऐसा मौका भी आया होगा जब वो फेलियर इतना बड़ा था कि आपकी हर उम्मीद ख़त्म हो गई होगी.

ऐसे में लोगों के पास अक्सर दो चॉइस होते हैं. या तो वो हार मान कर अपने सपनों को ही मार देते हैं या गिर कर उठने के बाद अपने कपड़ों से धूल झाड़ कर एक नए नज़रिए से शुरुआत करने की हिम्मत करते हैं.

सैम ने दूसरे आप्शन को चुना. वो नए मौक़ों के साथ एक नई लाइफ शुरू करने के लिए बहुत excited थे. वो कभी कुछ नया ट्राय करने से नहीं डरे क्योंकि उन्हें अपनी एबिलिटी पर पूरा विश्वास था. अभी हमने देखा कि कैसे सैम और उनके परिवार को वो शहर छोड़ना पड़ा.अब सेटल होने के लिए उन्हें एक नए जगह की तलाश करनी पड़ी.ये एक मुश्किल फ़ैसला था और आख़िर में उन्होंने एक बहुत छोटे से टाउन Bentonville को चुना.

ये जगह बहुत छोटी थी और यहाँ पहले से ही तीन स्टोर्स मौजूद थे. यहाँ एक नया स्टोर खोल कर उसे सक्सेसफुल बनाना बिलकुल एक पहाड़ चढ़ने जितना मुश्किल काम था. सैम ने इस बारे में बहुत ध्यान से सोचा, बहुत दिमाग लगाया और वो इस कम्पटीशन के लिए तैयार थे. उन्होंने ठान ली थी कि वो एक ऐसा यूनिक स्टोर बनाएंगे जिसके आगे वो तीनों स्टोर बिलकुल फीके नज़र आने लगेंगे.

सैम जानते थे कि अगर वो एक आर्डिनरी स्टोर बनाएँगे तो वो कभी सक्सेसफुल नहीं हो सकते इसलिए सबसे अलग और ख़ास बनने के लिए सैम अपने स्टोर के लिए एक हट के कांसेप्ट सोचने लगे.तभी उन्हें ख़याल आया कि उन्होंने सेल्फ़ सर्विस देने वाले कुछ स्टोर्स के बारे में पढ़ा था, उन्होंने इसे ट्राय करने का फ़ैसला किया.

क्योंकि ये कांसेप्ट उस छोटी सी जगह के लोगों के लिए एकदम नया था, सैम का स्टोर बहुत हिट साबित हुआ. वो स्टोर सबका ध्यान अपनी ओर खींचने लगा.अब सैम उस कम्पटीशन में काफ़ी आगे निकल गए थे.

लेकिन सैम इतने से संतुष्ट नहीं हुए. वो और एक्सपेरिमेंट करना चाहते थे. वो कभी रिस्क लेने से या फेल होने से नहीं डरे. इसलिए उन्होंने पूरे स्टेट में अलग अलग तरह के स्टोर्स में expand करना शुरू कर दिया. लेकिन एक बार फ़िर लाइफ ने उन्हें मात दी और उन्होंने बहुत पैसा खोया.

एक दिन, सैम को एक कॉल आया जब उन्हें इस बुरी ख़बर का पता चला. भयंकर आंधी तूफ़ान के कारण उनका सबसे सक्सेसफुल स्टोर पूरी तरह बर्बाद हो गया था. उन्हें बहुत नुक्सान हुआ लेकिन वो निराश नहीं हुए. घबराने के बजाय उन्होंने उसे रिपेयर करवाकर एक बार फ़िर से बनाया.

एक जगह से दूसरी जगह जाने में उनका काफ़ी टाइम waste होता था. वो ज़्यादा से ज़्यादा टाइम अपने स्टोर को देना चाहते थे. इसलिए उन्होंने कुछ अलग करने का सोचा, ये आईडिया उस समय उनकी सनक और पागलपन लग रहा था लेकिन उन्होंने बस इसे कर डाला. तो क्या किया उन्होंने ? उन्होंने एक प्लेन ही ख़रीद लिया था. ये सुन कर आप चौंक गए ना?

आप सोच रहे होंगे कि सैम तो बहुत ठाठ बाट से रह रहे थे, उन्हें तो पैसों की कोई कमी नहीं थी.नहीं,लेकिन ऐसा नहीं था. ये कमाल इसलिए हुआ था क्योंकि वो जितना भी कमा रहे थे वो हमेशा उसे सेव करते रहे. वो एक एक डॉलर बचाते और उससे एक यूनिक कांसेप्ट वाला स्टोर खोलते.

कम्पटीशन बहुत तगड़ा था. अब हर कोई रिटेल बिज़नेस के सीक्रेट्स को धीरे धीरे जानने लगा था. एक दिन, उन्हें महसूस हुआ कि रिटेल बिज़नेस का फ्यूचर था डिस्काउंट और सस्ते दामों पर चीज़ों को बेचना. तो बस ये आईडिया आते ही उन्होंने सबसे पहला Walmart खोला.

उनके सभी पार्टनर्स को ये आईडिया बहुत रिस्की लग रहा था और वो इसमें सैम का साथ नहीं देना चाहते थे. इसलिए सैम ने अपनी जमा पूँजी में से 95% पैसा ख़ुद लगाया. उन्होंने इस आईडिया के लिए अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया था क्योंकि उन्हें विश्वास था कि ये उनका मास्टर स्ट्रोक होगा. ये वही था जिसका उन्होंने हमेशा सपना देखा था.

पहला Walmart ज़्यादा सक्सेसफुल नहीं हुआ. इसलिए सैम ने बड़े शहरों में बड़े स्टोर और छोटी जगहों में छोटे स्टोर खोलने की स्ट्रेटेजी को अपनाया. सामान पर डिस्काउंट की स्कीम लोगों को पसंद आने लगी थी.

अब धीरे-धीरे Walmart popular होने लगा, उसका बिज़नेस बढ़ने लगा. इसके बजाय अगर सैम रिस्क लेने की हिम्मत नहीं करते तो आज हम और आप उनके बारे में बात नहीं कर रहे होते. शायद उनका भी नाम बस भीड़ का हिस्सा होता. लेकिन जो क्वालिटी उन्हें भीड़ से अलग कर ख़ास बनाती है वो ये थी कि वो ना जाने कितनी बार फेल हुए, लाइफ ने उन्हें कई बार पीछे धकेला लेकिन वो हर बार खड़े होकर और भी ज़्यादा मज़बूत होकर आगे बढे.

स्विमिंग अपस्ट्रीम (Swimming Upstream)

अगर आप बिज़नेस की दुनिया में क़दम रखना चाहते हैं तो आपको अपने competitor के बारे में सब पता होना चाहिए. ख़ासकर आज जिस ज़माने में हम रह रहे हैं, आप जिस फील्ड में भी जाएँगे वहाँ आपको ज़बरदस्त टक्कर मिलेगी.तो अब सवाल ये उठता है कि हम अपने competitor से आगे कैसे निकल सकते हैं?

तो इसका जवाब सिंपल है. हमें हमेशा कुछ ना कुछ नया ट्राय करते रहना होगा, इमानदारी के साथ डट कर खड़े रहना होगा और कुछ आउट ऑफ़ द बॉक्स सोचना. दूसरों के नक़्शे क़दम पर चलना एक सेफ रास्ता तो हो सकता है लेकिन वो ज़्यादा सक्सेसफुल नहीं हो सकता. अगर आपका मंज़िल एक्स्ट्राआर्डिनरी सक्सेस पाना है तो आपको अपनी सोच अलग और एक्स्ट्राआर्डिनरी बनानी ही होगी.जो यूनिक होता है वही बिकता है.

सैम ने एजुकेशन और सीखने की इच्छा को हमेशा इम्पोर्टेंस दिया है लेकिन वो किताबी बातों में नहीं बल्कि लाइफ हमें जो सिखाती है उसे ज़्यादा वैल्युएबल मानते थे. उनमें हमेशा नए आइडियाज को ट्राय करने का, अपना रास्ता ख़ुद बनाने का जोश और जूनून था. वो कभी भी भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे.उन्हें ख़ुद पर यकीन था कि जब वो कुछ करेंगे तो वो यूनिक और स्पेशल होगा.

उन्हें कॉन्फिडेंस था कि डिस्काउंट का आईडिया ज़रूर काम करेगा और अपने पार्टनर्स के सहमत ना होने के बावजूद वो इसमें आगे बढे और इसी ने उन्हें एक्स्ट्राआर्डिनरी सक्सेस दी.

क्योंकि ये आईडिया एकदम नया था, सैम और उनकी टीम नहीं जानते थे कि इसे कैसे चलाना है. ना उनके पास कोई सिस्टम था ना मैनेजमेंट . यहाँ तक कि एकाउंट्स भी पुराने मेथड को यूज़ कर के किया जा रहा था.

सैम जानते थे कि हर चीज़ में एक्सपर्ट होना पॉसिबल नहीं है लेकिन वो बीच में कभी रुके नहीं. इसके बजाय उन्होंने अपनी कमियों को अपनी क्वालिटीज़ के द्वारा पूरी करने की कोशिश की. उन्होंने कस्टमर सैटिस्फैक्शन पर फोकस करना शुरू किया, हमेशा नई चीज़ें ट्राय करते रहे और अपने competitor को गौर से देख कर उनसे सीखते रहे.

जो भी Walmart में काम करना चाहता था वो जानता था कि वो जगह इनोवेशन की थी. एक्सपेरिमेंट करना या नई चीज़ों को ट्राय करने की आज़ादी हमेशा उनका मास्टर कार्ड रहा है और इसी ने उन्हें आसमान की ऊँचाइयों पर पहुंचाया है.

रेसिंग अ फैमिली(Raising a Family)

कभी-कभी सक्सेस अकेले नहीं आती, हमें उसकी कीमत चुकानी पड़ती है. एक सक्सेसफुल आदमी का बैलेंस्ड लाइफ जीना तो जैसे नामुमकिन सा हो गया है. एक बार जब वो बिज़नेस पर फोकस करने लगते हैं तो सब कुछ भूल जाते हैं ,यहाँ तक कि उन्हें अपने परिवार की भी सुध नहीं रहती.

लेकिन सही मायनों में सक्सेस का स्वाद दुगना तब होता है जब इसे और लोगों के साथ शेयर किया जाए. इंसान अकेला नहीं रह सकता, परिवार होना, उनका साथ होना हमारी बुनियादी ज़रूरतों में से एक है. अच्छे बुरे वक़्त में जब एक परिवार आपके साथ खड़ा हो जाता है तो वो किसी blessing से कम नहीं होता क्योंकि अक्सर सक्सेस के रास्ते में बहुत अकेलापन होता है.

सैम ने रिटेल बिज़नेस में शरुआत करने के बाद हेलेन से शादी की. उनके चार बच्चे हैं. सैम और हेलेन दोनों का बचपन एक छोटे शहर में गुज़रा था औरउनकी इच्छा थी कि वो अब भी एक छोटे शहर में ही रहे. वो अपने बच्चों की परवरिश उन वैल्यूज के साथ करना चाहते थे जैसे उनकी हुई थी.

वो ये भी चाहते थे कि उनका परिवार एक साथ प्यार से रहे. सैम का बचपन काफ़ी मुश्किलों भरा था. पैसों की तंगी थी और उनके पेरेंट्स हमेशा लड़ते रहते थे. इसलिए उन्होंने ठान ली थी कि वो अपने बच्चों को एक ख़ुशहाल बचपन देंगे. उनके घर का माहौल प्यार और अंडरस्टैंडिंग से भरा था.

सैम ने अपने बच्चों को अपने बिज़नेस में शामिल करने की भी कोशिश की. इसके दो कारण थे. पहला, वो चाहते थे कि उनके बच्चे मेहनत और पैसों की वैल्यू को समझे. दूसरा, क्योंकि वो हमेशा अपने स्टोर में ही बिजी रहते थे, वो चाहते थे कि उनके बच्चे उनके पास हों. वो ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त उनके साथ गुज़ारना चाहते थे. वो नहीं चाहते थे कि उन्हें कभी एक पिता की कमी महसूस हो इसलिए वो अक्सर उन्हें साथ स्टोर ले जाते.

तो रॉब कंपनी का लॉयर बन गया, जिम अपने पिता की कंपनियों को चलाने लगा और साथ ही एक लोकल न्यूज़पेपर का मालिक भी है. ऐलिस ने ख़ुद की इन्वेस्टमेंट कंपनी खोल ली और जॉन अपने पिता का पायलट बन गया.

सैम ने उन पर कभी किसी बात का दबाव नहीं डाला. उन सब ने अपना रास्ता ख़ुद चुना. उन्होंने सब अपने पिता से सीखा. उन्हें सैम से बहुत इंस्पिरेशन मिली. उन्होंने उन सारे वैल्यूज को अपनाया भी. सैम ने जिस तरह उनकी परवरिश की थी उस वजह से वो सब ज़िम्मेदार भी थे.

सक्सेस का मतलब ये तो नहीं है कि इंसान अपने परिवार की सुध ही ना ले, उनकी तरफ़ लापरवाह हो जाए. सैम में अपने काम को लेकर बहुत जुनून था लेकिन वो अपने परिवार के लिए हमेशा मौजूद थे.

रेक्रुटिंग द टीम(Recruiting the Team)

कोई भी सक्सेसफुल बिज़नेस एक अच्छी टीम के बिना नहीं चल सकता. अगर आप चाहते हैं कि आपका बिज़नेस यूनिक हो तो आपको यूनिक लोगों को ढूँढने की ज़रुरत है.

कुछ लोगों का मानना है कि वो सब कुछ अकेले अपने दम पर कर सकते हैं लेकिन सक्सेस हासिल करना इतना भी आसान नहीं है. हमेशा कोई ना कोई ऐसा होगा जिसका आईडिया आपसे ज़्यादा अच्छा होगा, जो आपसे दो कदम आगे सोचता होगा. एक अच्छी टीम से आप बहुत कुछ सीख सकते हैं और वो आपके बिज़नेस चलाने के भार को बाँट सकते हैं.

जैसे जैसे सैम का बिज़नेस बढ़ता जा रहा था, कई स्टोर्स बंद होने लगे थे. सैम ने उन्हें बड़े ध्यान से देखा और उनकी गलतियों से सीखने की कोशिश की. उन्होंने नोटिस किया कि इन स्टोर्स का aim तुरंत सक्सेस पाना था. इस चक्कर में उन्होंने अपने स्टाफ और कस्टमर्स दोनों पर ही ध्यान नहीं दिया.

सैम का मानना था कि अगर आप अपने स्टाफ का ध्यान नहीं रखेंगे तो वो कस्टमर को ख़ुश रखने के लिए ठीक से अपना काम नहीं करेंगे और अगर आपके कस्टमर ख़ुश नहीं होंगे तो आपका बिज़नेस नीचे गिर जाएगा.

सैम को लगने लगा था कि उनकी टीम काफ़ी नहीं थी. वो जानते थे कि वो और उनकी टीम अपना बेस्ट परफॉर्म कर रहे थे. लेकिन अब उन्हें ऐसे managers की ज़रुरत थी जिनमें रिटेल बिज़नेस को मैनेज करने का पैशन हो और जो सब स्मार्टली ऑपरेट कर सकें.

सैम हमेशा दूर की सोचते थे. वो अब अपना बिज़नेस एम्पायर बनाना चाहते थे. प्रॉब्लम सिर्फ़ ये थी कि वो एक आर्गेनाइजेशन या उसे बनाने के सिस्टम के बारे में बिलकुल नहीं जानते थे. उन्हें अब एक ऐसे आदमी की ज़रुरत थी जो उनके लिए टेक्निकल चीज़ों को हैंडल कर सके. इसलिए वो स्कूल चले गए, अरे पढ़ने के लिए नहीं बल्कि एक स्मार्ट और इंटेलीजेंट इंसान की तलाश में जो बिज़नेस में उनकी मदद कर सके.

आख़िर उन्हें एक काबिल इंसान मिला जिसने आर्गेनाइजेशन और डिस्ट्रीब्यूशन की बागड़ोर को सँभाला. अब कंप्यूटर को यूज़ करने की शुरुआत हो चुकी थी जिसने सब कुछ बहुत आसान बना दिया था. हालांकि, सैम पहले टेक्नोलॉजी के खिलाफ़ थे लेकिन एक बार जब उन्होंने ख़ुद ट्राय किया तब उन्हें अपनी सक्सेस साफ़ दिखाई देने लगी. Walmart अब तेज़ी से आगे बढ़ता ही जा रहा था.

टेकिंग द कंपनी पब्लिक  (Taking the Company Public)

Walmart जैसे बड़े एम्पायर को बनाने के लिए क़र्ज़ लेना ज़रूरी हो जाता है. जब आप अपने बिज़नेस को बढाने लगते हैं तो कभी आप इससे लोन लेते हैं तो कभी उससे. कई बार तो बैंक से एक बड़ी रकम भी लोन के तौर पर ले लेते हैं.

जब आपका लोन अमाउंट बढ़ने लगे तो आपके पास एक ही चॉइस होता है जो है पब्लिक ऑफर. पब्लिक ऑफर का मतलब है कि आप अपने कुछ शेयर पब्लिक के खरीदने के लिए मार्केट में रख देते हैं. ये शेयर्स स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किये जाते हैं जहां से इन्हें खरीदा और बेचा जा सकता है.

सैम भी इसी प्रॉब्लम का सामना कर रहे थे. वो हर साल नई जगहों पर अपना बिज़नेस बढाते जा रहे थे जिस वजह से उनका लोन अमाउंट तेज़ी से बढ़ रहा था. वो जितना प्रॉफिट कमा रहे थे वो लोन को कवर करने के लिए काफ़ी नहीं था और अब लोन देने वालों ने उनके दरवाज़े पर दस्तक देना शुरू कर दिया था.

सैम भी पब्लिक ऑफर के बारे में सोच रहे थे लेकिन साथ ही साथ वो हिचकिचा भी रहे थे क्योंकि वो कंपनी हमेशा से उनकी और उनके परिवार की ही रही थी. इसे पब्लिक के साथ शेयर करना एक बहुत बड़ा रिस्क लग रहा था. लेकिन उनके पास और कोई रास्ता नहीं था.उन्होंने और लोन लेने की कोशिश भी की थी लेकिन अबकोई मदद करने के लिए तैयार नहीं था.इसलिए सैम ने अपनी कंपनी के 20% शेयर पब्लिक के साथ शेयर करने का फ़ैसला किया. आगे चलकर इन लोगों ने Walmart के शेयर्स द्वारा लाखों डॉलर कमाए.

पब्लिक ऑफर के कई फ़ायदे हैं. पहला, इससे कंपनी की अच्छी प्रमोशन होती है. दूसरा, आप अपना लोन चुका सकते हैं. सैम अब ख़ुश थे और रात को चैन की नींद सोने लगे थे क्योंकि उनकी कंपनी अब सेफ थी. लेकिन उनकी वाइफ बिलकुल खुश नहीं थीं. इस पब्लिक ऑफर ने सबका ध्यान उनकी ओर खींच दिया था जिसने उनकी पीसफुल जिंदगी को डिस्टर्ब कर दिया था.

आमतौर पर, जब कोई कंपनी अपने कुछ शेयर पब्लिक को ऑफर करती है तो महीने में एक बार या साल में एक बार मीटिंग की जाती है. स्टॉकहोल्डर्स को ये बताना ज़रूरी होता है  कि कंपनी कैसा परफॉर्म कर रही है.

क्योंकि सैम और उनकी टीम हमेशा कुछ अलग और यूनिक सोचते थे इसलिए उन्होंने इसके लिए एक बड़ा इवेंट organise करने का फ़ैसला किया.

उन्होंने सोचा किये प्रोग्राम एक बॉलरूम में organize किया जाएगा. ये एक ऑफिसियल gathering होगी जो बड़े शहरों में रखी जाएगी. ये अनोखी सोच ये बताती है कि सैम और उनकी टीम अपने बिज़नेस को लेकर कितने सीरियस थे. 

वो लोगों को बेवक़ूफ़ नहीं बना रहे थे. Walmart अपने कस्टमर्स, स्टाफ, इन्वेस्टर्स और शेयर होल्डर्स का ध्यान रखना अच्छे से जानता था. वो लोगों को एक अच्छा और अलग एक्सपीरियंस देना चाहते थे. उनकी reputation धीरे-धीरे बढ़ने लगी और वो एक ऐसा पावरफुल ब्रांड बन गया जिसे कोई भी अनदेखा नहीं कर सकता था. 

रोलिंग आउट द फ़ॉर्मूला(Rolling Out the Formula)

हर बिज़नेस को चलाने के लिए एक स्ट्रेटेजी की ज़रुरत होती है. अगर आप अपने बिज़नेस को लंबे समय तक सक्सेसफुल बनाए रखना चाहते हैं तो आपको एक बहुत स्ट्रोंग सिस्टम बनाने की ज़रुरत है जो आपको अच्छे रिजल्ट्स अचीव करने में मदद करेंगे. आप आर्डिनरी सिस्टम पर भरोसा नहीं कर सकते. आपको क्रिएटिव हो कर कुछ अलग और नया ढूंढना होगा सिर्फ़ तब आप दूसरों से चार कदम आगे रह पाएँगे.

आपको एक ऐसा फार्मूला बनाना होगा जो आपके और आपकी कंपनी के लिए बेस्ट काम करता हो. हो सकता है कि किसी दूसरे आर्गेनाईजेशन की सक्सेस को देख कर आपका मन ललचा जाए और आप उसके रूल्स को कॉपी करने की कोशिश करें लेकिन हर बिज़नेस अलग होता है. आपको एक ऐसा तरीका ढूंढना होगा जो आपको सूट करता हो.

अब तो हम जानते ही हैं कि सैम भेड़ चाल में चलने वालों में से नहीं थे. वो हमेशा आगे की सोचते और कभी रुकते नहीं थे. वो अपने इन्टुईशन और एक्सपीरियंस के बेसिस पर एक्शन लेते थे. आप सोच रहे होंगे कि इतने सक्सेसफुल और बिजी आदमी को एक सेट रूटीन फॉलो करना पड़ता होगा. लेकिन सैम कभी भी ornagised नहीं थे वो बस अचानक डिसिशन ले लेते थे इस चीज़ ने उनके लिए काम भी किया.

पब्लिक ऑफर  के बाद Walmart ने सारा लोन चुका दिया. अब सैम कुछ ऐसा ट्राय करना चाहते थे जो उनकी लाइफ को पूरी तरह बदल कर रख दे. वो उन छोटे छोटे शहरों में स्टोर बनाना चाहते थे जिस पर कभी किसी का ध्यान नहीं गया हो. उनका मानना था कि वहाँ स्टोर बनाना और डेवलपमेंट के लिए वेट करना एक शानदार स्ट्रेटेजी है.

और उनका अनुमान बिलकुल सही साबित हुआ. बड़े शहरों के मुकाबले छोटे शहरों में उनके स्टोर की चर्चा घर घर में होने लगी. और देखते ही देखते Walmart स्टोर्स एक बहुत ही पावरफुल कम्पटीशन के रूप में उभर कर आए.

अगर सैम कुछ अलग नहीं सोचते तो उनकी ये अपार सफ़लता शायद एक सपना बन कर ही रह जाता.

कन्क्लूज़न (Conclusion)

सक्सेस एक बहुत ही शानदार और जादुई शब्द है. हम सब इसे पाने के लिए ललचाते हैं लेकिन सिर्फ़ वो जो अपने गोल को अचीव करने के लिए हर रिस्क लेने को तैयार रहते हैं, हर मुसीबत का पेशेंस के साथ सामना करते हैं, वही सक्सेस की शिखर पर पहुँचते हैं.

ये बुक हिम्मत और dedication की कहानी है. कम ही लोग होते हैं जिन्हें अपने आईडिया पर इतना विश्वास होता है जितना सैम को डिस्काउंट और रिटेल बिज़नेस पर था. बचपन से यही उनका पैशन था और उन्होंने कभी विश्वास करना बंद नहीं किया कि वो इसमें कुछ ना कुछ कर सकते हैं. उन्होंने हमेशा अपने competitors को गौर से देख कर उनसे बहुत कुछ सीखा. वो हमेशा कम्पटीशन को healthy मानते थे क्योंकि यही आपकी क्रिएटिविटी को आगे पुश करता है. अपने कस्टमर्स और स्टाफ दोनों को ख़ुश रखना भी बहुत ज़रूरी है.

तो इस बुक में आपने सीखा कि एक बार जब आप कुछ अचीव करने का मन बना लेते हैं तो उसे पाने के लिए डट कर खड़े रहे, बीच में निराश होकर उसे छोडें नहीं. सैम ना जाने कितनी बार गिरे लेकिन वो बार बार उठे. 

आपने परिवार का साथ और उन्हें वक़्त देने के इम्पोर्टेंस को भी समझा. आपने ये भी जाना कि कुछ हट कर सोचना और फेलियर के बाद भी निराश ना होकर अपने काम में लगे रहना आपको ऐसी सक्सेस देगा जो आपकी इमेजिनेशन से बहुत बड़ा होगा.

सैम ने सक्सेस और फेलियर दोनों का बराबर स्वाद चखा था. लाइफ ने कई बार उन्हें पीछे पुश किया लेकिन वो कभी रुके नहीं. उन्हें कई बार हार का सामना करना पड़ा और सच पूछो तो यही जिंदगी है. निदा फाज़ली जी ने बहुत ख़ूबसूरत लिखा है कि “सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो, सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो, यही है ज़िंदगी कुछ ख्व़ाब चंद उम्मीदें इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो”.  

तो आप भी सैम की तरह कड़ी मेहनत करना सीखें क्योंकि कड़ी मेहनत हमेशा रंग लाती है, उन्हीं की तरह हमेशा दो कदम आगे की सोचें तो शायद एक दिन आपका भी एक यूनिक ब्रांड होगा और हमेशा याद रखें कि आप तब तक नहीं हारते जब तक आप मन से नहीं हारते !

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