Measure What Matters: OKRs: The Simple Idea that Drives 10x Growth Hindi Summary

 Measure What Matters: OKRs: The Simple Idea that Drives 10x Growth John Doerr Hindi Summary

Measure What Matters: OKRs

---------- About Book ----------

क्या आपने कभी चाहा है कि काश गोल्स अचीव करना आसान होता? क्या आपको लगता है कि अपने गोल्स तक पहुँचने का पोटेंशियल तो है आपमें लेकिन आप नहीं जानते कि कैसे? अगर आपका जवाब हाँ है तो ये बुक आपके लिए परफेक्ट है. ये बुक आपको सिंपल और इजी स्टेप्स का इस्तेमाल कर अपने गोल्स को हासिल करने में मदद करेगी. अगर आप इसे नहीं मानते तो ये जान लें कि इसमें बताए गए स्टेप्स का इस्तेमाल जाने माने आर्गेनाइजेशन जैसे गूगल ने भी किया है. तो क्या आप गोल-गेटर बनने के लिए तैयार हैं? 

यह समरी किसे पढ़नी चाहिए?

•    स्टार्ट अप फाउंडर 

•    टीम लीडर

•    मैनेजर, एम्प्लोई

•    बिजनेसमैन 

ऑथर के बारे में 

जॉन डोर एक इन्वेस्टर हैं. वो Kleiner Perkins में एक वेंचर कैपिटलिस्ट भी हैं. वो टेक कंपनी जैसे Amazon, Intuit और Google के कैपिटल फंडिंग को डायरेक्ट करते हैं. 2017 में, जॉन को फोर्ब्स द्वारा टेक में 40 वें सबसे अमीर और दुनिया में 303 वें सबसे अमीर इंसान के रूप में मान्यता दी गई थी. जॉन ने सालों से सक्सेसफुल बिजनेसमैन जैसे कि लैरी पेज और गूगल के सर्गेई ब्रिन के साथ-साथ अमेज़ॅन के जेफ बेजोस को सपोर्ट किया है.  

---------- SUMMARY ----------

Measure What Matters: OKRs: The Simple Idea that Drives 10x Growth

इंट्रोडक्शन 

क्या आपको कभी कभी ज़बरदस्त आईडिया आता है जिसे आप हकीकत में बदलने की कोशिश करते हैं लेकिन बुरी तरह से फेल हो जाते हैं? क्या फेलियर के बाद आप दोबारा  कोशिश करने में हिचकिचाते हैं? क्या दूरों को देखकर आपको ताज्जुब होता है कि ना जाने वो अपना गोल कैसे अचीव कर लेते हैं? 

इस बुक में आपको पता चलेगा कि सिर्फ़ आईडिया आने से आप कुछ हासिल नहीं कर सकते. आप अपने आईडिया को कैसे आगे बढ़ाते हैं वो आपको जीत दिलाता है. आप जानेंगे कि गूगल, गेट्स फाउंडेशन और बोनों ऐसी कौन सी चीज़ है जो कॉमन है. आप ये भी समझेंगे कि आप उनके जैसे कैसे बन सकते हैं. 

आप OKR यानी Objectives and Key Results के बारे में भी जानेंगे. ये वो स्ट्रेटेजी है जिसका इस्तेमाल जानी मानी कंपनियां अपने गोल को हासिल करने के लिए करती हैं. आप उन फैक्टर्स के बारे में जानेंगे जो इसे इफेक्टिव और सक्सेसफुल बनाते हैं. OKR में लाइफ साईकल और तीन फैक्टर होते हैं जो है set-up, OKR shepherd और midlife tracking. एक साईकल के ख़त्म होने के बाद, आपको स्कोर देने की, ख़ुद को जज या measure करने की यानी सेल्फ़-असेसमेंट और अंत में विचार करना होगा यानी रिफ्लेक्ट. 

गोल्स के साथ एक आम समस्या ये है कि आप ये जान नहीं पाते कि आप प्रोग्रेस कर रहे हैं या नहीं और सबसे ज़रूरी बात आपको कैसे पता चलेगा कि आपने उसे अचीव कर लिया है? 

ये बुक आपको सिखाएगी कि गोल सेट करना सिंपल और इजी कैसे बनाया जाए. ऐसा कोई गोल नहीं है जिसे हासिल करना नामुमकिन हो. आपको बस ये जानना होगा कि Objectives and Key Results को कैसे अप्लाई करें. तो आइए ये दिलचस्प सफ़र शुरू करते हैं.   

Google, Meet OKRs

इस बुक के ऑथर जॉन ने पहले ही भांप लिया था कि गूगल कितना बड़ा बनने वाला है. 1999 में किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि किसी के गैरज में बनाई गई एक स्टार्ट अप कंपनी टॉप पर पहुँच जाएगी. फ़िर भी जॉन को कंपनी और उसकी शुरुआत करने वाले लोगों पर पूरा यकीन था. यहाँ तक कि जॉन ने उस वक़्त अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट गूगल में ही किया था. ये कोई जुआ या दांव खेलने से कम नहीं था लेकिन जिस चीज़ ने जॉन को यकीन दिलाया था वो ये था कि उन्होंने गूगल के पोटेंशियल को देखा. उन्होंने ये भी देखा कि उसके फाउंडर लैरी पेज और सर्जरी ब्रिन में कुछ कर दिखाने का जुनून था. गूगल के ज़रिए को दुनिया के किसी भी कोने में जानकारी की पहुँच को आसान बनाना चाहते थे.

उन्होंने बड़े सपने देखे. जब जॉन ने पूछा कि उन्हें क्या लगता है वो कितना पैसा कमा पाएँगे तो लैरी ने कहा 10 बिलियन डॉलर. जॉन को ये सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ क्योंकि इतना पैसा माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम जैसी कंपनियां ही कमा सकती थीं. आसान शब्दों में, इन कंपनियों ने कई साल में पहले ख़ुद का नाम बनाया, सक्सेसफुल हुए और इस मुक़ाम पर थे कि इतना कमा सकते थे. लेकिन जॉन उनकी बातों पर हंसें नहीं कि उन्होंने कुछ ज़्यादा ही उम्मीद लगा रखी है. जॉन का मानना था कि वो इसे अचीव कर लेंगे और इसमें उन्होंने उनकी मदद भी की. 

उस समय के दौरान गूगल में लगभग 30 एक्स्ट्राऑर्डिनरी टैलेंटेड लोग काम कर रहे थे. गूगल ने तब मार्केट में बस क़दम ही रखा था और गिने चुने लोग ही उनके बारे में जानते थे. एक इंजिनियर के तौर पर जॉन को इंटेल में एक बहुत ही टैलेंटेड मैनेजर एंडी ग्रोव से मिलने का मौक़ा मिला.  एंडी की वजह से जॉन गूगल को वो टूल दे पाए जिससे उन्हें अपनी प्रोग्रेस को measure करने में मदद मिली. ये टूल था OKR जिसका मतलब है Objectives and Key Results.

यहाँ objective शब्द का मतलब है वो गोल जो आप अचीव करना चाहते हैं. वो इम्पोर्टेन्ट और सही मायनों में inspirational होना चाहिए. तो वहीँ, key Results का मतलब है वो तरीका जिसके ज़रिए आप अपना objective हासिल कर सकते हैं.

Key Result यानी KR टाइम लिमिट में बंधा होना चाहिए और रीयलिस्टिक होना चाहिए और सबसे ज़रूरी बात कि वो measure करने के क़ाबिल होना चाहिए. जहां objective कई सालों तक बने रह सकते हैं वहीँ KR को जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए. जैसे-जैसे आप अपने objective के क़रीब पहुँचते जाएंगे उन्हें भी डेवलप करना चाहिए.

बाकि चीज़ों की तरह गोल्स भी गलत हो सकते हैं. ये लोगों के फोकस को कम कर सकते हैं. गोल्स लोगों को इसे पूरा करने के लिए गलत तरीके अपनाने के लिए उकसा सकता है. साइकोलॉजी के प्रोफेसर, एडविन लोके ने गोल्स के बारे में एक प्रिंसिप्ल कहा था जो आज भी सच साबित होता है. पहला, आसान गोल्स की तुलना में मुश्किल गोल्स परफॉरमेंस को बढ़ा सकते हैं. दूसरा, जो गोल्स क्लियर नहीं है उनकी तुलना में फिक्स्ड और क्लियर गोल्स हाई प्रोडक्टिविटी लेवल को दिखाते हैं. 

मैनेजमेंट के फील्ड में, 90% एक्सपर्ट मानते हैं कि जब गोल्स क्लियर और challenging होते हैं तो प्रोडक्टिविटी ज़्यादा होती है. क्योंकि आमतौर पर गोल्स लॉन्ग टर्म के लिए होते हैं, इसलिए ख़ुद को ट्रैक पर रखने के लिए आपको गोल मैनेजमेंट सिस्टम की ज़रुरत होगी. OKR आपको बड़े गोल्स को छोटे-कचोटे टुकड़ों में बांटने में मदद करता है. ये आपको अपने छोटे-छोटे जीत और नुक्सान को भी देखने में मदद करता है. 

जब जॉन ने गूगल को OKR सिस्टम दिया तो उन्होंने कहा कि वो इसे आज़माएंगे. लैरी और सर्जी ने ये भी सोचा कि अपने गोल्स तक पहुँचने के लिए उन्हें किसी गाइड की भी ज़रुरत पड़ेगी. आज OKR गूगल के रोज़मर्रा के काम का हिस्सा बन गया है. इतना ही नहीं वो  अपने दूसरे प्रोडक्ट जैसे Chrome, YouTube और Google Play के लिए भी इस गोल मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं.

गूगल के लोग अब अपनी टीम और ख़ुद की प्रोग्रेस को देखने के लिए इसके लिए मीटिंग करते हैं जहां वो इस पर चर्चा करते हैं, इसे तैयार करते हैं और इसमें बदलाव भी करते हैं. वो इस बात का ध्यान रखते हैं कि वो भी करें वो गूगल के विज़न और policy को ध्यान में रखकर करें. 2017 में, गूगल Fortune magazine के “Best Companies to work for” पर नंबर 1 पोजीशन पर था. गूगल लगातार 6 बार नंबर 1 की पोजीशन पर रहा है. ये हमें दिखाता है कि अपने गोल के लिए ठीक से प्लान कर उसे organize करना और उसके लिए एक स्ट्रक्चर बनाना किता ज़रूरी होता है. 

Focus and Commit to Priorities

एक सक्सेसफुल आर्गेनाइजेशन के सक्सेस के पीछे का कारण ये है कि वो अपने गोल्स को अचीव करने की ठान लेते हैं. एक बार जब वो अपना OKR तय कर लेते हैं तो बस उसे पाने की ठान लेते हैं. एक लीडर को पता होना चाहिए कि पूरे टीम की एनर्जी और टाइम को कहाँ इन्वेस्ट करना है. 

गूगल का मकसद है कि किसी को बबी बड़ी आसानी से कोई भी इनफार्मेशन मिल सके. इस मकसद से गूगल Android और Google Earth लेकर आया. इसका आईडिया लैरी, सर्जी और उनकी एग्जीक्यूटिव टीम को आया था लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि सिर्फ़ टॉप पर रहने वाले लोग ही कमाल का आईडिया क्रिएट कर सकते हैं. टॉप लेवल के लोग पावरफुल और इफेक्टिव OKR बनाने के लिए फ्रंट लाइन एम्प्लाइज के साथ मिलकर काम करते हैं. 

रिक क्लाउ की एक बड़ी समस्या थी. वो Youtube का प्रोडक्ट मैनेजर था और उसके होमपेज की ज़िम्मेदारी उसकी थी. उसकी प्रॉब्लम ये थी कि Youtube देखने वाले बहुत कम लोग ही साईट पर log in करते थे. ये एक प्रॉब्लम इसलिए थी क्योंकि जो यूजर log-in नहीं करते हैं वो कई feature यूज़ नहीं कर पाएँगे जैसे किसी विडियो को सेव करना या किसी चैनल को सब्सक्राइब करना. अगर लोग ये देखने में चूक गए कि Youtube कितना वैल्यू दे रहा है तो वो दूसरे प्लेटफार्म पर जाने लगेंगे. 

इस प्रॉब्लम को सोल्व करने के लिए रिक और उनकी टीम ने 6 महीने का OKR बनाया. इसमें उन्होंने Youtube के सीईओ सलार कामांगर से भी मशवरा लिया. उसके बाद सलार ने गूगल के सीईओ लैरी पेज से सलाह ली. लैरी ने लॉग इन प्रॉब्लम में उनकी मदद की लेकिन लैरी ने OKR को बदलकर तीन महीने का कर दिया था. सभी की नज़रें रिक और उसकी टीम पर टिकी थीं. एक प्रोडक्ट मैनेजर के प्रोजेक्ट में मदद कर लैरी ने ये दिखाया कि हमें दूसरों को भी सक्सेसफुल होने में उनकी मदद करनी चाहिए. गूगल की कई दूसरी टीम भी रिक की मदद करने के लिए आगे आए. 

लैरी ने publicly एक प्रोडक्ट मैनेजर के OKR के लिए ख़ुद को समर्पित कर दिया था. यही बात Intuit के सीईओ ग्रेट बिल कैम्पबेल ने कही थी. अगर आप कंपनी के सीईओ हैं तो सिर्फ़ खोखली बातें नहीं करनी चाहिए बल्कि अपनी कही बात पर ख़ुद भी अमल करना चाहिए. अगर आप जो कह रहे हैं वो ख़ुद नहीं करेंगे तो दूसरे कभी आपकी बातों को फॉलो नहीं करेंगे. 

टॉप लेवल के बनाए हुए गोल्स को पूरे आर्गेनाइजेशन को समझने की ज़रुरत है. ये सुनने में आसान लग रहा होगा लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि कैसे कई कंपनियां इस स्टेज पर फेल हो जाती हैं. managers और executives के बीच एक survey किया गया था. उनसे पूछा गया कि उनकी कंपनी के लिए सबसे ज़रूरी क्या था. उनमें से बहुत से लोगों को इस सवाल का जवाब देने में बहुत मुश्किल हुई. इसलिए एक लीडर को खुलकर साफ़-साफ़ ये कम्यूनिकेट करना चाहिए कि कंपनी के गोल्स क्या हैं और उन्हें क्यों चुना गया है. जब लोगों को पता होता है कि उनके काम का एक मकसद है तो वो काम करने के लिए ज़्यादा मोटीवेट होते हैं. 

एक बार OKR सेट कर देने का मतलब ये नहीं है कि वो पत्थर की लकीर हो गई. इसे तब भी बदला जा सकता है जब आप इसे पूरा करने के प्रोसेस में हों. वो परफेक्ट नहीं हो सकते, उनमें हमेशा इम्प्रूवमेंट की गुंजाइश होगी. आपको OKR को कम से कम रखना चाहिए यानी 3-5 की लिमिट में होना चाहिए. OKR बहुत ज़्यादा होने से ये पूरे आर्गेनाइजेशन को डिस्टर्ब कर सकता है. बहुत सारी चीज़ों पर फोकस करने से आपका ध्यान उन चीज़ों को measure करने से हटने लगता है जो असल में मायने रखते हैं. बस इतना याद रखें कि KR measure करने के लायक होना चाहिए. जब एक KR पूरा हो जाता है तो इसका मतलब है कि एक objective पूरा होने के करीब पहुँच गया है. अगर ऐसा नहीं होता तो इसका मतलब वो KR नहीं है. इस बात को ध्यान में रखें कि objective बड़े लॉन्ग टर्म गोल्स हैं. KR शोर्ट टर्म गोल्स हैं जो हमें objective को हासिल करने में मदद करते हैं.    

Track: The Gates Foundation Story

अगर आप अपने काम को ट्रैक नहीं करेंगे तो आप कभी नहीं जान पाएँगे कि आप प्रोग्रेस कर रहे हैं या एक ही जगह अटके हुए हैं. OKR ट्रैक करने की डिमांड करता है. उन्हें एडिट भी किया जा सकता है. ये वो दो चीज़ें हैं जिनमें दूसरे गोल सेट करने के सिस्टम फेल हो जाते हैं. वो गोल्स को ऐसे देखते हैं जिन्हें बदला नहीं जा सकता. 

इस बुक के ऑथर का कहना है कि OKR का भी एक लाइफ साईकल होता है. ये डेवलप होता जाता है इसलिए इसका एक लाइफ साईकल होता है. OKR के हर साईकल में तीन इम्पोर्टेन्ट फैक्टर होते हैं जो हैं set-up, OKR shepherd और midlife tracking.

Set-up – OKR इसके सेट अप करने के तरीके से ऑफिस को ज़्यादा कनेक्टेड बनाते हैं. बिल पेंस 2014 में AOL में ग्लोबल चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर थे. टॉप executives ने गोल्स बनाए लेकिन बिल ने गौर किया कि जैसे-जैसे समय बीतता गया एम्प्लाइज गोल्स के बारे में भूलने लगे. गोल्स बिलकुल आगे नहीं बढ़ रहे थे और एम्प्लाइज की नज़रों में ये इम्पोर्टेन्ट नहीं था. साल के अंत तक गोल्स कागज़ पर लिखे शब्दों से ज़्यादा कुछ नहीं रह गए थे.

एम्प्लाइज एक गोल को हासिल करने में पूरा ध्यान तब लगाते हैं जब उन्हें पता होता है कि उन्होंने भी इसमें योगदान दिया है. तो बिल ने एक OKR मैनेजमेंट सॉफ्टवेर introduce किया. ये AOL में सभी के लिए एक डिजिटल डैशबोर्ड की तरह काम करने लगा जहां हर कोई अपने OKR को बना सकता था, ट्रैक और एडिट कर सकता था और स्कोर दे सकता था. उस सॉफ्टवेर में OKR से संबंधित सभी चीज़ें थीं. ये बहुत ही सुविधाजनक था क्योंकि इसे access करना बहुत आसान था. 

आप post-it नोट्स या whiteboard markers का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. भले ही आपके पास OKR सॉफ्टवेर ना हो, फिर भी इन दो चीज़ों की मदद से आप अपने OKR को ट्रैक और एडिट कर पाएँगे. ये डॉक्यूमेंट और spreadsheet से बेहतर होते हैं क्योंकि अक्सर लोग उन्हें पढ़ना एक झंझट का काम समझते हैं. 

OKR Shepherds – एक OKR तब इफेक्टिव होता है जब किसी आर्गेनाइजेशन का हर इंसान उसे स्वीकार करता है. क्योंकि नए गोल्स को कुछ लोग स्वीकार नहीं करेंगे, उसका विरोध करेंगे तो OKR Shepherd का होना सबसे बेस्ट होता है. इनकी ज़िम्मेदारी होती है कि जो लोग विरोध कर रहे हैं कैसे उन्हें धीरे-धीरे स्वीकार करने के लिए मनाया जाए. 

जोनाथन रोसेनबर्ग Google के सीनियर वाईस प्रेसिडेंट और OKR shepherd थे. उन्होंने देखा कि कई एम्प्लाइज अपना OKR नहीं कर रहे थे. इसलिए उन्होंने कंपनी में सभी को एक ईमेल भेजा. उन्होंने उन्हें अपना OKR करने के लिए कहा ताकि उन्हें पता चले कि उनका एफर्ट किस दिशा में बढ़ रहा था. यहाँ तक कि उन्होंने उन लोगों के नाम भी बताए जो अपना OKR नहीं कर रहे थे. अगर उन्हें OKR के साथ कोई प्रॉब्लम थी तो उन्होंने वापस ईमेल करने के लिए भी कहा.

तो अगर आप एक मैनेजर या टीम लीडर हैं तो आप अपनी टीम के OKR Shepherd के रूप में काम कर सकते हैं. जोनाथन की तरह आप भी एक पर्सनल और इंस्पायर करने वाला ईमेल भेज सकते हैं. आपके रोल का एक हिस्सा अपने टीम के मेंबर्स को एक्टिव होकर OKR की दिशा में काम करने के लिए encourage करना भी है. 

Midlife Tracking – midlife ट्रैकिंग का aim प्रोग्रेस को visualize करना है. कई स्टडी से पता चला है कि प्रोग्रेस को देखने से लोगों को बहुत मोटिवेशन मिलती है. ये अपने बॉस के मुहं से तारीफ़ सुनना या बोनस मिलने से भी ज़्यादा फ़ायदेमंद है. OKR इस बात को ध्यान में रखता है. OKR प्रोग्रेस को ट्रैक करता है और ये हर हफ़्ते किया जाता है. 

OKR में प्रोग्रेस को रेट करने के चार ऑप्शन हैं - continue, update, start और stop. 

Continue ग्रीन ज़ोन है जिसका मतलब है कि आप ट्रैक पर हैं और आपको कुछ ठीक करने की या बदलने की ज़रुरत नहीं है. 

Update येलो ज़ोन है जिसका मतलब है आपको कुछ बदलाव कर अपडेट करने की ज़रुरत है. 

Start का मतलब है कि अगर आप किसी OKR साईकल के बीच में हैं तब भी आपको एक नए साईकल के साथ शुरू करने की ज़रुरत है. 

Stop रेड ज़ोन है जिसका मतलब है आपको वो गोल छोड़ देना चाहिए. 

तो अब इमेजिन करें कि आपके पास एक whiteboard और अलग-अलग रंग के post-it नोट्स हैं जिसे हर कोई देख सकता है. फ़िर पूरी टीम हर हफ़्ते देख सकती है कि आपका प्रोजेक्ट किस तरह प्रोग्रेस कर रहा है. 

Midlife tracking आपको ये बताती है कि आप अभी कहाँ हैं और आपका गोल कहाँ है. ये फ़ीडबैक हासिल करने का भी एक बेहतरीन तरीका है. अगर लोग राईट ट्रैक पर हैं तो अच्छा है. अगर वो नहीं हैं तो वो इससे सीख सकते हैं. यही फेलियर उन्हें सक्सेस पाने में मदद करेगी. 

जैसे ही OKR साईकल ख़त्म होता है तो आपको उससे सीखने के लिए अपने एक्सपीरियंस के बारे में सोचने की ज़रुरत है. यहाँ कुछ सवाल हैं जो आपको ख़ुद से पूछने चाहिए – क्या हमने अपने objective को अचीव किया? उस तक पहुँचने में हमारी किस चीज़ ने मदद की? हमें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा? हम अगले साईकल में ऐसा क्या कर सकते हैं जो हमें बेहतर बनने में मदद करेगा? 

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन कोई साधारण स्टार्ट अप नहीं था, उसके नाम पहले से ही 20 बिलियन डॉलर था. आपको लग रहा होगा कि ये कितने आश्चर्य की बात है तो रुक जाइए पहले फाउंडेशन के मिशन के बारे में तो सुन लीजिए. इस फाउंडेशन ने 2040 तक दुनिया से मलेरिया का नामो निशान ख़त्म करने का मिशन बनाया था. ये एक नामुमकिन काम की तरह लगता है ना लेकिन इस फाउंडेशन के executives ने उस वक़्त और आज भी इसे पूरा करने का पक्का इरादा बना रखा है. क्योंकि इस फाउंडेशन का गोल इतना बड़ा और महान था तो उन्हें इस बात का पूरा ध्यान रखना था कि वो अपनी प्रोग्रेस को सही तरीके से ट्रैक कर रहे थे. ये समझने के लिए कि कौन से KR को अचीव किया जाना चाहिए ताकि वो अपने फाइनल गोल तक पहुँच सकें, उन्हें एक स्ट्रक्चर की ज़रुरत थी.

इस फाउंडेशन की सीईओ पैटी स्टोन्सिफ़र (Patty Stonesifer) ने इसका जवाब ढूंढा. Amazon मीटिंग के दौरान उन्होंने इस बुक के ऑथर जॉन को OKR सिस्टम के बारे में बताते हुए सुना. पैटी ने तब जॉन से इसे फाउंडेशन के executives के सामने प्रेजेंट करने के लिए कहा. बाकि जो हुआ वो इतिहास का हिस्सा बन गया.

बिल, मेलिंडा और पैटी जानते थे कि जितना बड़ा उनका गोल था उतनी ही बारीकी से उसे मॉनिटर करना ज़रूरी था. OKR की वजह से उन्हें क्या क्या करना ये साफ़ होता चला गया. शुरुआत में इस फाउंडेशन का गोल था इस मिशन को 2015 तक अचीव करना लेकिन OKR की मदद से उन्हें एहसास हुआ कि ऐसा रियल दुनिया में मुमकिन नहीं है. इसलिए उन्होंने 2040 का टारगेट सेट किया.  

बिल गेट्स ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि एक गोल होना कितना ज़रूरी है और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है उसे सही तरीके से संभालना. उन्होंने कहा कि लोग अक्सर एक आर्गेनाइजेशन के मिशन और objective को एक साथ मिला देते हैं लेकिन ये दोनों चीज़ें समान नहीं बल्कि अलग-अलग है. मिशन आपको एक दिशा दिखाती है और objective आपको अपने मिशन को हासिल करने के लिए ठोस स्टेप्स देता है. इन स्टेप्स को आपके OKR द्वारा measure किया जाता है. बिल, मेलिंडा और पैटी OKR के शुक्रगुज़ार हैं क्योंकि ये आपको रीयलिस्टिक और visionary दोनों बनने देता है. 

Culture Change

हर आर्गेनाइजेशन में कल्चर बहुत इम्पोर्टेन्ट होता है. आजकल के लीडर और मैनेजर अक्सर ये सवाल पूछते हैं कि “एक पॉजिटिव कल्चर को कैसे बनाया जा सकता है” या “मैं कंपनी के कल्चर को कैसे बदल सकता हूँ?” इसमें OKR और CFR मदद कर सकते हैं. CFR का मतलब है Conversation, Feedback और Recognition. ये टीम वर्क और एम्प्लाइज के सेल्फ़- इम्प्रूवमेंट को मज़बूत करता है. 

OKR उस बर्तन की तरह है जिसमें कंपनी के गोल्स रखे हुए हैं CFR इस बात का ध्यान रखता है कि ये बर्तन सही लोगों तक पहुंचें. इन दोनों को जोड़ने से क्लियर कम्युनिकेशन और हाई परफॉरमेंस का स्ट्रक्चर बनता है. जब आप जानते हैं कि आप किस चीज़ के लिए काम कर रहे हैं यानी OKR, और जब आपको उसके लिए फ़ीडबैक मिलता है यानी CFR, तो आप काम करने के लिए ज़्यादा मोटीवेट होंगे. 

हाई परफॉरमेंस दूसरे लोगों के साथ सहयोग करने से और अपने एक्शन की ज़िम्मेदारी लेने का प्रोडक्ट होता है. जब आप अपने कल्चर को OKR और CFR को ध्यान में रखकर बनाते हैं तो ये एक तीर से दो शिकार करने वाली बात हो जाती है. CFR कम्युनिकेशन को सपोर्ट करता है, उसे बढ़ावा देता है. जो लोग इफेक्टिव तरीके से कम्यूनिकेट करना जानते हैं वो एक साथ ठीक से काम कर सकते हैं. वो हर सक्सेस और फेलियर के लिए एक टीम के रूप में उसकी ज़िम्मेदारी लेते हैं. वहीँ दूसरी और, OKR हर इंसान को उसके KR के लिए ज़िम्मेदार बनाता है.

जब कल्चर को बदलने की बात आती है तब भी OKR और CFR साथ-साथ काम करते हैं. जब कोई बदलाव लाया जाता है तो तो OKR उस लाइफ जैकेट की तरह होता है जो आर्गेनाइजेशन को डूबने से बचाए रखता है. ये एम्प्लाइज को आने वाली नई चीज़ों से होने वाली घबराहट से बचने में मदद करता है. हो सकता है कि कई चीज़ें बदल रही हों लेकिन आप जिसके लिए काम कर रहे हैं यानी आपका OKR वो सेम रहता है. 

CFR बदलाव के साथ डील करने के लिए आपके लिए एक सोर्स जैसा है. जैसे ही आप अपनी जिम्मेदारियों में नई चीज़ें जोड़ते हैं पॉजिटिव और प्रोडक्टिव फ़ीडबैक आपको एक बेहतर एम्प्लोई बनने में मदद करता है. अपने एफर्ट के लिए पहचान मिलना आपके मनोबल यानी moral को बढ़ाती है. एक आर्गेनाइजेशन जो खुलकर लेकिन ज़िम्मेदारी से कम्यूनिकेट करती है, उसमें कल्चर का बदलाव बड़ी आसानी से और कम दिक्कत से हो सकता है. 

बोनो जाने माने रॉक बैंड U2 के फ्रंटमैन हैं. वो एक समाज सेवक भी हैं. 2002 में बोनो ने एक नॉन प्रॉफिट आर्गेनाइजेशन की नींव रखी जिसका नाम DATA यानी Debt, AIDS, Trade, Africa है. इसका मकसद है अफ्रीका में डेवलपमेंट के लिए ग़रीबी और बीमारी से लड़ना. DATA को असल में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन सपोर्ट और स्पोंसर करता है. 2005 में, बोनो, बिल और मेलिंडा गेट्स को टाइम मैगज़ीन के पर्सन ऑफ द ईयर की मान्यता भी मिली थी. 

बोनो ने 2004 में One Campaign नाम की एक और पहल शुरू की. ये DATA का ज़मीनी साइड था. इसमें चुनौती ये थी One Campaign के गठबंधन कि 11 अलग-अलग ग्रुप्स को एकजुट होने की ज़रुरत थी. बोनो का कहना था कि हर ग्रुप का एक अलग गोल था जैसे अफ्रीका में ग्रीन रेवोल्यूशन, लड़कियों के लिए एजुकेशन वगैरह. इसके अलावा इन ग्रुप्स को अफ्रीका का अलग-अलग हिस्सा दिया जाएगा जहां इन्हें फोकस करना होगा. तो, समस्या यह थी कि कैसे इन सभी कल्चर और आर्गेनाइजेशन को एक साथ DATA और One Campaign के तहत साथ लाया जाए. बोनो का कहना है कि इसमें OKR ने उनकी मदद की. 

बोर्ड मीटिंग में, बोनो और दूसरे मेंबर्स ने अपने गोल्स को ट्रैक करने के लिए ग्रीन, येलो और रेड कलर-कोडिंग का इस्तेमाल किया. इसमें जॉन ने यह भी सुझाव दिया कि अफ्रीका को सही मायने में मदद करने के लिए बोर्ड में अफ्रीकी मेंबर भी होने चाहिए. 

बोनो उस समय को याद करते हैं जब जॉन ने कहा था कि जब उनके सभी KR ग्रीन कलर  मार्क किए जाते हैं, तो इसका मतलब है कि वे फेल हो गए हैं. लेकिन क्यों? ऐसा इसलिए है क्योंकि वहाँ ज़्यादा रेड होना चाहिए था. जॉन का मतलब है कि ONE CAMPAIGN को और भी बड़े गोल्स सेट करते रहना चाहिए और नए तरीकों के बारे में सोचना चाहिए कि उस objective को कैसे हासिल किया जाए, जो है अफ्रीका में गरीबी और बीमारी से लड़ना.

बोनो बताते हैं कि पिछले दशक में एड्स से होने वाली मौत में 45% की कमी आई है. 2021 तक माँ-से-बच्चे को कोई इन्फेक्शन नहीं होना चाहिए. small pox, पोलियो, और measels vaccnation के कारण पब्लिक हेल्थ के लिए अब खतरा नहीं रह गया था. One Campaign का मानना है कि दुनिया को पूरी तरह से एड्स से आज़ाद कर देना बिलकुल संभव है.

कन्क्लूज़न

तो आपने जाना कि गूगल, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और बोनो के बीच क्या चीज़ कॉमन है. वो आज जिस मुक़ाम पर हैं, उसे पाने के लिए उन्होंने OKR का इस्तेमाल किया. 

OKR का मतलब है objectives and key results. ये अपने गोल्स को अचीव करने का बहुत ही इफेक्टिव टूल है. Objective वो हैं जो आप अचीव करना चाहते हैं. अपने objective को हासिल करने के लिए आपको जिन चीज़ों को करने की ज़रुरत है वो हैं Key Results यानी KR. हमें अक्सर Objective बड़े और अचीव करने में नामुमकिन से लगते हैं. Key Results बड़े गोल्स को मैनेज करना और अचीव करने के लायक बनाते हैं. 

OKR में लाइफ साईकल होते हैं. हर लाइफ साईकल में तीन फैक्टर होते हैं यानी set-up, OKR shepherd और midlife tracking. 

सेट अप का मतलब है कि आपको कंपनी के OKR को मीनिंगफुल बनाना है. लोग तब तक इस पर काम नहीं करेंगे जब तक वे इसे इम्पोर्टेन्ट नहीं मानेंगे. एम्प्लाइज को अगर पता होगा कि उनका काम इसमें योगदान देगा तो वो गोल्स को अचीव करने के लिए मोटीवेट होंगे. 

OKR shepherd उन लोगों से डील करता है जो OKR को आसानी से स्वीकार नहीं करते बल्कि उसका विरोध करते हैं. एक shepherd की भी ज़रुरत इसलिए है क्योंकि OKR के लिए 100% से कम कमिटमेंट इसे इनइफेक्टिव बना सकती है. एक OKR Shepherd ये भी जान पाता है कि लोग आख़िर OKR के खिलाफ़ क्यों थे.

Midlife tracking लोगों को encourage करने में मदद करता है. जब आप देखते हैं कि आप प्रोग्रेस कर रहे हैं तो आप और ज़्यादा काम करने के लिए मोटीवेट होते हैं. OKR को ट्रैक करने के लिए, ग्रीन कलर का मतलब है कि कंटिन्यू करें, बदलाव के लिए येलो और stop के लिए रेड कलर. सेल्फ़ असेसमेंट और reflection OKR का वो हिस्सा हैं जो अपनी-अपनी राय बस बेस्ड होते हैं. यह आपको अपने Key Results को पूरा करने के लिए आपके द्वारा किए गए सफ़र को वापस देखने और उसके बारे में सोचने के लिए के लिए encourage करता है. यह आपको यह जानने में भी मदद कर सकता है कि अगले OKR  साईकल में आप क्या बेहतर कर सकते हैं. 

OKR सिर्फ़ किसी कंपनी या आर्गेनाइजेशन के लिए नहीं बल्कि आपके डेली लाइफ के लिए भी अप्लाई किया जा सकता है. अनगिनत लोग ऐसा करने में क़ामयाब हुए हैं. आप OKR का इस्तेमाल किसी स्किल या टैलेंट को इम्प्रूव करने के लिए कर सकते हैं. आप इसे सेल्फ़-डेवलपमेंट के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे कि साफ़ और बेहतर तरीके से कम्यूनिकेट करना. 

अब जब आप जानते हैं कि सक्सेसफुल लोग शिखर तक पहुँचने के लिए क्या करते हैं तो उसे समझ के साथ अपनी जिंदगी में भी अप्लाई करना शुरू करें. अपने OKR पर काम करें. इमेजिन करें कि जिंदगी भर का देखा हुआ आपका सपना जब हकीकत में बदलेगा तो वो आपको कितनी ख़ुशी और संतुष्टि देगा और ऐसा करना बिलकुल आपकी पहुँच के अंदर है. जैसे कि एक बड़ी अच्छी कहावत है कि “ये सिर्फ़ तब तक ही नामुमकिन लगता है जब तक कोई आगे बढ़कर इसे कर ना दे”, तो वो ख़ास शख्स वो “कोई” आप बन सकते हैं.       

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