The One-Page Financial Plan by Carl Richards hindi Summary

 The One-Page Financial Plan by Carl Richards hindi Summary

The One-Page Financial Plan by Carl Richards hindi Summary

---------- About Book ----------

 फाइनेंशियल  प्लैन ज्यादातर लोगों को डरावने और बोरिंग लगते है. लोग इसलिए डरते है क्योंकि ये सब्जेक्ट उन्हें बहुत पेचीदा  लगता है और बोरिंग इसलिए क्योंकि इसमें लॉन्ग डिस्कसन होती है. लेकिन ये समरी   फाइनेंशियल  प्लानिंग को एक नए तरीके से आपके सामने पेश करती है. वन पेज फाईनेंशियल  प्लैन एक ऐसा वर्ज़न है जो समझने में बेहद ईज़ी और सिंपल है ताकि एक एवरेज रीडर की समझ में आ सके और उन्हें अपने गोल्स अचीव करने में हेल्प कर सके. इस समरी  में आपको कोई कन्फ्यूजन, कोई भी मुश्किल शब्द या टर्म   नहीं  मिलेंगे जिनका  मतलब समझने में आपको परेशानी हो और ना ही ये आपका टाइम वेस्ट करेगी! तो क्या आप तैयार हैं फाइनेंशियल  प्लानिंग की ख़ूबसूरती को जानने के लिए?

ये समरी किस-किसको पढ़नी चाहिए ? 

●    इन्वेस्टर्स 

●    वर्किंग एडल्ट्स 

●    एंटप्रेन्योर

●    कॉलेज के स्टूडेंट्स 

ऑथर के बारे में 

कार्ल रिचर्ड्स एक ऑथर,  फाइनेंशियल  planner  और BAM एलायंस के लिए इन्वेस्टर एजुकेशन के डायरेक्टर हैं. इसके साथ ही वो “स्केच गाय कॉलम” के क्रिएटर भी हैं जो न्यू यॉर्क टाइम्स में वीकली पब्लिश होता है. कार्ल रिचर्ड्स को ओपरा.कॉम, मार्केटप्लेस मनी और फोर्ब्स.कॉम जैसी कई पोपुलर प्लेटफॉर्म पर भी फीचर किया गया है. वो एक जाने-माने स्पीकर भी हैं जो अपनी  फाइनेंशियल conference के लिए दुनिया भर में घुमते रहते हैं. 

---------- Summary ----------

The One-Page Financial Plan by Carl Richards

इंट्रोडक्शन 

ज्यादा ऑप्शन  का मतलब है ज्यादा चिडचिडाहट  क्योंकि हमे ऐसा लगता है कि हमारे पास choose  करने की फ्रीडम है पर असल में ये हमे और भी ज्यादा कंफ्यूज़न में डाल देती है. 
कार्ल रिचर्ड्स के डॉग ज़ीक को पेट में कुछ  प्रॉब्लम  हो गई थी तो उसे डॉक्टर  के पास ले जाना पड़ा. डॉग की कंडिशन चेक करने के बाद डॉक्टर ने उन्हें तीन ऑप्शन दिए- 
बाकि  लोगों  की तरह कार्ल  भी एक बिज़ी आदमी है जिनके पास बहुत काम होता है. उनका अपना काम, बच्चे, खाना, घर के बिल्स वगैरह-वगैरह, यानि उन्हें हर चीज़ का ख्याल रखना पड़ता है. इसके साथ ही उन्हें अपने डॉग की भी फ़िक्र है इसलिए उनके पास ऑप्शन चूज़ करने का टाइम  नहीं  था.  
कार्ल ने बेचैन  होते हुए कहा” देखिये, मेरे पास ऑप्शन चूज़ करने का टाइम  नहीं  है, आप ही बता दीजिए  क्या बेस्ट है, हम वही करेंगे”. 
हालाँकि डॉक्टर  बार-बार उन्हें ऑप्शन दे रहा था कि उनके पास क्या-क्या चॉइस है, लेकिन कार्ल और ज्यादा कन्फ्यूज़ हो रहे थे. आखिर में वो अपना गुस्सा कण्ट्रोल नहीं कर पाए और उन्हें चिल्लाकर अपनी बात कहनी पड़ी, “मैं अभी इस position में नहीं हूँ कि कुछ भी डिसाइड कर सकूं. इसलिए आपसे रिक्वेस्ट करता हूँ कि आप ही कोई राईट ऑप्शन सजेस्ट कीजिये ”. 
इस तरह की बेचैनी और फ्रस्ट्रेशन वाली फीलिंग सिर्फ हमारे घरेलू मामलों तक सीमित नहीं है, बात जब फाईनेंस की हो तो भी हमे कई बार इसी तरह की फीलिंग होती  है. 
बात अगर  फाइनेंशियल प्लैन  की हो तो आपको कई लोग मिलेंगे जो अपनी एडवाईज़ देंगे. इस टॉपिक पर आपको कई किताबें  और मैंगजीन भी पढ़ने को मिलेंगी. लोग आपको अलग-अलग  ऑप्शन देंगे, यही एक मेन रीजन है कि बहुत से लोग और ज्यादा कन्फ्यूज़ हो जाते है क्योंकि उन्हें ये तक पता नहीं होता कि शुरुवात कहाँ से करे. लेकिन हम आपके लिए लेकर आये है” वन  पेज   फाइनेंशियल  प्लैन ” जो एक ऐसी बुक है जिसमे आपको ऑप्शन देकर कन्फ्यूज़  नहीं  किया जाएगा. ये आपको ऐसे स्टेप्स की तरफ लेकर जायेगी कि आप खुद ही अपना  फाइनेंशियल   प्लैन क्रिएट कर सकोगे.  

DISCOVERY

पहला  कदम जो आपको एक ग्रेट  फाइनेंशियल   प्लैन बनाने की राह में उठाना है, वो है ये पता करना कि आप अपनी  फाइनेंशियल  जर्नी में आखिर हो कहाँ पर. 
कहीं आप बहुत पीछे तो  नहीं  हो, या अपने गोल के पास हो या फिर काफी आगे निकल चुके हो? इस स्टेप को तीन पार्ट में डिवाइड कर सकते है. कुछ  लोगों  को ये पता करने में थोडा ज्यादा टाइम लग सकता है कि उनकी करंट  फाइनेंशियल  सिचुएशन क्या है जबकि कुछ  लोगों  को फौरन पता चल जाता है. 
ये स्टेप कंप्यूटेशन,  फाइनेंशियल  लिट्रेसी या किसी कॉम्प्लेक्स  चीज़ के बारे में  नहीं  है. ये पैसे को लेकर आपके डर को फेस करने के लिए एक सिंपल सा प्रोसेस है और ये पता लगाना है कि क्या आपके एक्शन आपको अपने गोल्स के करीब ले जाते है या  नहीं . 
    
लेकिन आपको भी ध्यान रखना है कि सिंपल का मतलब हर बार ईज़ी  नहीं  होता. आज हम आपको तीन स्टेप्स के बारे में बताने जा रहे है जिससे आपको अपनी करंट  फाइनेंशियल  सिचुएशन के बारे में पता चल जायेगा. सबसे पहले तो खुद से एक सवाल करो: पैसा मेरे लिए क्यों इम्पोर्टेंट है? 
आपको इस सवाल के जवाब में ये पता चलेगा कि आप पैसा  कमाने  के लिए हार्ड वर्क नहीं कर रहे हो. पैसा आपको इनसिक्योर  नहीं  बनाता बल्कि जिस वजह से आप मेहनत करते हो और इनसिक्योर फील करते हो, उसके पीछे वजह है, वो सारी चीज़े जो हम पैसों से खरीदते है, नाकि खुद पैसा.  
जैसे एक्जाम्पल के लिए, कार्ल एक बार अपने दो सक्सेसफुल फ्रेंड्स से बात कर रहे थे जो मैरिड कपल थे. कार्ल ने उनसे एक सवाल पूछा” तुम्हारे लिए पैसा इम्पोर्टेंट क्यों है?” 
पहले तो उन्होंने जवाब दिया कि पैसा उन्हें फ्रीडम और फ्लेक्सीबिलिटी देता है. हालांकि जब उन्होंने इस बारे में और डिस्कस किया तो वाइफ ने फाईनली रिएलाईज़ किया कि वाकई में पैसा उसके लिए बेहद इम्पोर्टेंट चीज़ है. 
"मैं  अपनी फेमिली बढ़ाना चाहती हूँ पर ऐसा लगता है जैसे मुझे इसके लिए कभी टाइम ही  नहीं  मिलेगा क्योंकि मैं  पैसा कमाने के लिए इतना हार्ड वर्क जो कर रही हूँ”.  
अपने जवाब पर ना सिर्फ उसका हज़बैंड बल्कि वो खुद हैरान थी. उसने कभी भी  नहीं  सोचा था कि पैसा उसके लिए इतना इम्पोर्टेंट हो सकता है. 
इस तरह के सवाल का जवाब देना अनकम्फर्टेबल और मुशकिल हो सकता है. वो इसलिए क्योंकि इससे आपके दिल में छुपे कुछ राज़  बाहर आने का डर है जो आप याद  नहीं  करना चाहते. लेकिन ये स्टेप इम्पोर्टेंट भी है ताकि आप समझ सके कि आपके  फाइनेंशियल  डिसीजन  का आपके वैल्यूज़ के साथ भी एक गहरा रिश्ता  है. 
नेक्स्ट स्टेप है: अपने  फाइनेंशियल  गोल्स गेस करना यानि आपको अंदाजा हो जाये कि आखिर आपके मनी मैटर से रिलेटेड गोल्स क्या है. जी हाँ, गेस टर्म ही यहाँ यूज़ होगी, क्योंकि सब कुछ इसी पर डिपेंड करता है. होता क्या है कि ज्यादातर  फाइनेंशियल  प्लानिंग कुछ ज्यादा ही स्ट्रिक्ट होती है और ये  सबसे बड़ी  प्रॉब्लम  है. 
वैसे तो फाईनेंस अपने आप में एक लॉजिकल  चीज़ है, लेकिन ये भी सही  नहीं  होगा कि आप अपने  फाइनेंशियल  गोल्स के लिए कोई बाउंड्रीज़ सेट कर ले. इस तरह के सवाल  पूछना गलत होगा कि: आप फ्यूचर में कितने का घर खरीदने की सोच रहे हो"?" या फिर” आज से दस साल बाद आपके खर्चे कितने बढ़ चुके होंगे?” 
सच तो ये है कि हम अपनी पूरी लाइफ पहले से  प्लैन  नहीं  कर सकते, ये पॉसिबल ही  नहीं  है क्योंकि लाइफ हमेशा बदलती रहती है. लाइफ में जो आज है वो कल  नहीं  होगा. सुनने बड़ा अजीब लगता है क्योंकि हम इसी अनसर्टेनिटी से बचने के लिए ही  फाइनेंशियल  प्लानिंग करते है. लेकिन वही इसके अपोजिट हम फ्यूचर के लिए कुछ भी  प्लैन करके  नहीं  रख सकते. 
अनसर्टेनीटी और इनसिक्योरीटी को अवॉयड करने की कोशिश फ़िज़ूल है, इससे अच्छा होगा कि हम इसे अपना ले.  फाइनेंशियल  प्लानिंग का गोल आपको एक झूठी तसल्ली देना  नहीं  है. बल्कि ये आपको फ्यूचर की किसी भी अनचाही  सिचुएशन के वक्त में हेल्प करती है. 
फाइनेंस के बारे में  गेस करना ऐसा ही है जैसे आप यूरोप  के ट्रिप पर जा रहे हो. अपनी जर्नी के लिस्ट  के हिसाब से हर चीज़  प्लैन करने के बजाए बैटर ये होगा कि कुछ चीज़ें अनप्लांड रहने दी जाए. यानि जो होगा देखा जायेगा. इससे आपको फ्रीडम मिल जायेगी कि आप अपनी चॉइस से आउट ऑफ़  प्लैन चीज़े कर सकते हो जैसे किसी गर्म दिन में स्विमिंग करना या फिर ऐसे रेस्टोरेंट में खाना जो आपके ट्रेवल बुक में कहीं मेंशन  नहीं किया गया  है. थर्ड स्टेप में हम उस प्रोसेस की बात करेंगे जिससे आप खुद की पर्सनल बेलेंस शीट बना सके. नहीं, नाम सुनकर ही डरिये मत, ये उतना कॉम्प्लेक्स नहीं है जितना कि आमतौर पर  फाइनेंशियल  प्लानर बनांते  है. 
ये पर्सनल बेलेंस शीट जितना जल्दी पॉसिबल हो उतना जल्दी रिजल्ट  देती है और सिर्फ वही इन्फोर्मेशन यूज़ करती है जो अवलेबल हो. पर ये किया कैसे जाता है? तो आपको क्या करना है, एक खाली पेपर लेना है और बीच में एक लाइन खींचनी है. लाइन के लेफ्ट साइड में लिखो” एसेट्स” और राईट में “लाएबिलिटीज़.”
बेसिकली आपको पर्सनल बेलेंस शीट में दो ही तरह  की चीज़े होंगी: वो चीज़े जो आपकी है यानि एसेट्स और वो चीज़े जो आप पर उधार है यानि लाएबिलीटी. जब आपको ये चीज़े क्लियरली समझ में आ जाएँगी तो आपको खुद ही अपनी करंट  फाइनेंशियल  सिचुएशन का पता चल जायेगा. एसेट साइड पर आपको हर वो चीज़ लिखनी है जो आपकी है, उसका एक्जेक्ट अमाउंट भी आपको लिखना है. एसेट में आपका बैंक अकाउंट और इन्वेस्टमेंट भी शामिल है. 
ठीक ऐसे ही लाएबीलीटी साइड में हर छोटे से छोटा खर्चा जो आपने किया है वो लिखो और साथ में एक्जेक्ट अमाउंट भी लिखो. इसमें आपकी  mortgage , क्रेडिट कार्ड के डेट और लोन आते है. 
हाँ, तो देखा आपने! ये कितना सिंपल है, पर चाहे कितना भी सिंपल हो ज्यादातर लोग तो इतना भी एफर्ट  नहीं  करना चाहते. 

SPENDING AND SAVING

अपनी  फाइनेंशियल  सिचुएशन डिस्कवर कर लेने के बाद अब बारी आती है एक्शन लेने की और अपने गोल्स की तरफ कदम बढाने की. कुछ लोग इस स्टेप को इग्नोर करके ज्यादा पैसा  कमाने के लिए इन्वेस्टिंग जैसे सोल्यूशन  पर फोकस करते है. लेकिन असल में ये कोई सोल्यूशन  नहीं  है. आप चाहे फाईनेंशीयली स्टेबल हो या आपके ऊपर काफी कर्ज़ हो, तो भी ये कहकर सेविंग ना करने के बहाने  नहीं  ढूंढ सकते कि आप इन्वेस्टिंग करते हो. क्योंकि इन्वेस्टिंग के लिए भी आपके पास या तो कैपिटल होना चाहिए या एक बैकअप  प्लैन ताकि अगर आपको भारी नुक्सान उठाना पड़े तो आप फाईनेंशीयली सर्वाइव कर सके.
पहली चीज़ है अपना फाईनेंस का बजट बनाना जोकि एकदम ईज़ी और जरूरी टास्क है फिर भी ज्यादातर लोग इससे बचने की कोशिश करते है. बजटिंग कोई सज़ा नहीं  है, ना ही इसमें आपको नम्बर्स में उलझना है. 
बजटिंग इसलिए की जाती है कि आप फाईनेंशीयली अपनी सिचुएशन को लेकर अवेयर रहे. आपको पता हो कि आप जो पैसा मेहनत से कमाते है, वो कहाँ और किस तरह खर्च हो रहा है और कितना आपको सेव करना  चाहिए जोकि बजटिंग का सबसे इम्पोर्टेंट पार्ट है. बजटिंग बस  एक टूल है जो आपको हेल्प करेगी कि आपके एक्शन आपको अपने गोल्स की तरफ ले जाएँ.  
बजटिंग का मतलब है उन सारे खर्चों का लेखा-जोखा जो आप करते हो. यानि छोटी से छोटी चीज़ पर जिसमें आपका पैसा खर्च हुआ है, यहाँ तक कि आपका मन्थली खर्च भी बजटिंग में आता है. जरूरी  नहीं है  कि स्ट्रिक्ट बजटिंग की जाए. आप इसे ऑर्गेनाईज़ करने के लिए जितनी मर्ज़ी उतने टूल्स यूज़ कर सकते हो और उसे मज़ेदार भी बना सकते हो. 
बजटिंग का मतलब सिर्फ लिस्ट बनाना  नहीं  है बल्कि एक्शन लेना भी है. एक बार आपने अच्छे से अपने insurance, ग्रोसरी, एंटरटेनमेंट, ट्रांसपोर्ट वगैरह का बज़ट बना लिया फिर  आपको स्ट्रिक्टली उसी पर चलना होगा. 
इसके लिए आप ऑटोमेटिक पेमेंट चूज़ कर सकते हो. ध्यान रहे कि इसके लिए आपके पास राईट टूल्स. 
जैसे मान लो, आपने हर महीने $500 सेव करने का डिसीजन लिया. इसलिए अब आपको अपने बैंक में एक अलग  अकाउंट बनाना होगा जहाँ आपके $500 automatically सेव हो जाएँ. इसी तरह से आप अपने फिक्स्ड मन्थली बिल जैसे रेंट या  mortgage , इंटरनेट के खर्चे  भी ऑटोमैटिक कर सकते हो. इस तरह से आपको ये तस्सली हो जायेगी कि आप अपने गोल्स के हिसाब से चल रहे हो और आपकी  फाइनेंशियल  टेंशन काफी हद तक कम हो जाएगी. 
मान लो हम अपने फाईनेंस का पूरा कण्ट्रोल अपने हाथ में रखना चाहते है. इस केस में हमे अपने हर फालतू खर्च का भी हिसाब-किताब रखना होगा. जब तक हम अपना रवैया  चेंज  नहीं  करेंगे, कुछ चेंज  नहीं  हो सकता. हर कोई जानता है कि हर कंपनी रिटायरमेंट प्लैन  ऑफर करती है. लेकिन अगर आप एम्प्लोई  नहीं  हो तो आपको अपना रिटायरमेंट  प्लैन खुद हैंडल करना होगा. लोग कहते है कि अपने रिटायरमेंट  प्लैन के लिए सेव करने का गोल्डन रुल है कि अपनी सैलरी का 15% सेव करो. पर सच तो ये है कि ये हर किसी के बस की बात  नहीं  है. 
इसलिए अगर वाकई में पैसा बचाना है तो आपको खुद से ये सवाल पूछना होगा: कितना अमाउंट सेव करना सही होगा? 
सेविंग से पहले एक specific  अमाउंट सेट करने से आपके सारे बाकि के खर्चे अच्छे से निकल आयेंगे. सेविंग बीच में रुकनी  नहीं  चाहिए. ऐसा  नहीं है  कि जब मन में आए तो  पैसा सेव करो वर्ना  नहीं . पैसा सेव करो चाहे आपको कई दफा अपना मन मारना पड़े. इसलिए हो सके तो इसे हैबिट ही बना लो. 
हालाँकि हर कोई फ्यूचर सेविंग के लिए आज का एंटरटेनमेंट छोड़ना  नहीं  चाहता. 
जैसे कि हर Monday  $100 सेव करना ईजी और फुलफिलिंग लगता है. पर फ्राइडे आते-आते आप पार्टी के मूड में आ जाते है. वीकेंड पर आप खूब खाना-पीना, शॉपिंग करना  और एन्जॉय करना चाहते है. तो ऐसे में हर Monday  आप सिर्फ $25 ही बचा पाओगे.  असल में सेविंग करने के लिए डिसप्लीन में रहना जरूरी है. लोग इसलिए भी सेव  नहीं  कर पाते हैं क्योंकि वो खुद को फ्यूचर से जोड़कर  नहीं  देखते. उन्हें लगता है कि लाइफ आज तक ही सीमित है इसलिए इसे आज ही एन्जॉय करो. 
लेकिन ऐसे  लोगों  को पता  नहीं  होता कि उनके एक्श्न का रिजल्ट क्या होगा. तभी तो लोग फ्यूचर के लिए सेव करने के बजाये आज में सब उड़ा देते है. जब तक  लोगों  को एहसास   नहीं  होगा कि उनकी सेविंग उन्हें फ्यूचर में कितना हेल्प करेगी, वो तब तक प्रेजेंट में सेव  नहीं  कर पायेंगे. 
इसलिए हमे कमाई से ज्यादा खर्च करने की आदत छोडनी होगी और आज से ही सेविंग स्टार्ट करनी होगी. तुरंत मज़ा या ख़ुशी  देने वाली चीजों और हैबिट पर कण्ट्रोल करने से हम अपने फालतू के खर्चे को अवॉयड कर सकते है. 
कॉफ़ी, सिगरेट और बिना सोचे समझे शॉपिंग करने  जैसी हैबिट से छुटकारा पाकर भी हम अपना काफी पैसा सेव कर सकते है. कई बार हमारे बड़े-बड़े खर्चो की वजह होती है, हमारी बेवजह की शॉपिंग  यानि जो अच्छा लगा तुरंत खरीद लिया. जैसे किसी शॉप में जाते ही अचानक से आपको चॉकलेट खाने  की क्रेविंग हो गई, या आपने सिर्फ सुंदर कवर देखकर ही कोई बुक खरीद ली, या फिर रास्ते में किसी दुकान  से यूंही परफ्यूम खरीद लिया जिसकी आपको कोई जरूरत  नहीं  थी. तो ये सारी वो चीज़े है जो आपने प्लैन किए  बगैर ही खरीद ली थी और इनकी वाकई में आपको कोई जरूरत भी  नहीं  थी. फ़िज़ूलखर्ची बाद में हमेशा हमे फ्रस्ट्रेटेड फील कराती है और हम हाथ मलते रह जाते है. 
अपना पास्ट हमेशा याद रखो, लेकिन उसके जियो मत. अब आपके पास फ्रीडम की चॉइस है कि आप बैटर और बैटर बन सकते हो. अफ़सोस  करना छोड़ो और सोल्यूशन ढूढना स्टार्ट कर दो. तो आज से ही बजटिंग शुरू कर दो और अपनी कड़ी मेहनत की कमाई हमेशा सोच-समझ कर खर्च करो. 

INVESTING

हर कोई स्टॉक मार्केट के नाम से ही एक्साईटेड हो जाता है, और यही एक टॉपिक है जिस पर लोग ज्यादातर डिस्कस करते है. किसी भी फाईनेंशियल मीटिंग में ज्यादातर कुछ इस तरह के सवाल उठते है, “क्या मुझे इन्वेस्ट करना चाहिए या  नहीं ? क्या ये बहुत रिस्की होगा? क्या इतना इन्वेस्ट करना ठीक होगा?” 
असल में हर कोई अमीर होने का कोई आसान सा  रास्ता ढूंढना चाहता है. हर कोई चाहता है कि उसे कोई ऐसा स्टॉक मिल जाए जो उसे  रातो-रात अमीर बना दे. लेकिन इन्वेस्टिंग कोई जादू की छड़ी  नहीं  है जो आपको मालामाल कर देगी. 
बहुत से लोग इन्वेस्टिंग को एक रिटायरमेंट  प्लैन की तरह देखते है, जो उनका फ्यूचर फाईनेंशीयली स्टेबल और सिक्योर बना दे. लेकिन इन्वेस्टिंग इससे कहीं बढ़कर है. ये आपको सिर्फ फ्यूचर ही  नहीं  बल्कि प्रेजेंट में भी सेफ्टी इंश्योर कर सकती है ताकि आप रात को चैन की नींद सो सके. 
इस चैप्टर में आप अपने पैसे इन्वेस्ट करने से रिलेटेड तीन इम्पोर्टेंट चीज़े सीखेंगे.
पहला है, अपना पैसा इंश्योरेंस में इन्वेस्ट करना और ये पता करना कि आपके लिए कितना पैसा जरूरी है. इंश्योरेंस इमोशनल loss  का रीप्लेसमेंट  नहीं  है. ये एक सिंपल तरीका है जो आपको ना सिर्फ फ्यूचर में बल्कि प्रेजेंट में भी मन की शांति देगा. 

पहला सवाल जिसका जवाब आपको देना है, वो ये है कि क्या आपको इंश्योरेंस लेने की जरूरत है? अगर आपकी फेमिली में से पहले से ही किसी ने इंश्योरेंस लिया हुआ है तो आपको उनसे पता करना होगा और ये देखना होगा कि आपके और उनके सेम बेनेफिट रीपीट ना हो. वही दूसरी तरफ अगर आप अपनी फेमिली में अकेले कमाने वाले हो या फेमिली मेंबर्स आप के ऊपर डिपेंडेंट हो तो फिर हाँ आपको इंश्योरेंस जरूर लेना चाहिए. 
मान लो आप मैरिड हो, और आपके अभी बच्चे  नहीं  हुए. मान लो आपने स्कूल की  पढाई पूरी  नहीं  की और ना ही अपना कोई करियर बनाया. तो अगर फ्यूचर में आपके पार्टनर की अचानक डेथ हो जाती है तो आप क्या करोगे? ना तो आप पढ़े-लिखे हो  कि कहीं जॉब कर सको और ना ही आपका कोई स्टेबल  फाइनेंशियल  बैकग्राउंड है, तो ऐसे में आपके लिए इंश्योरेंस लेना ही एक सोल्यूशन है जो आपको  फाइनेंशियल प्रॉब्लम  से बचा सकता है. दूसरी चीज़ है: अपना पैसा डेट में इन्वेस्ट करना. जैसा कि लोग समझते है, उसके एकदम उल्टा  डेट हमेशा बुरा  नहीं  होता. डेट में अपना पैसा इन्वेस्ट करने के दो तरीके है: क्रेडिट कार्ड या मोर्टेज. मॉर्गेज का मतलब होता है घर या कोई बड़ी चीज़ ख़रीदने के लिए उधार लिया हुआ पैसा. 
इमेजिन करो आप एक ऐसे इन्वेस्टर हो जिसे 15% मिनीमम return  के साथ इन्वेस्ट करने की अपोर्च्यूनिटी मिली है. ऐसे में आपकी कोशिश यही होगी कि आप पैसे सेव करो और कहीं से भी पैसा इकट्ठा  करके इन्वेस्टमेंट के लिए जोड़ो. हालाँकि अगर कोई आपको कहे  कि अपने क्रेडिट कार्ड डेट पे करने से आपको सेम अमाउंट का return  मिलेगा तो शायद आप इस बारे में सोचेंगे भी नहीं. अपना क्रेडिट कार्ड डेट पे करके और एक अच्छा रिकॉर्ड रखकर आप बाद में मॉर्गेज  पर लो-इंटरेस्ट रेट पा सकते हो, और जो भी प्रोडक्ट आप लोगे उन पर आपको हाई डिसकाउंट भी मिल सकता है. घर खरीदते वक्त  mortgage  one टाइम पेमेंट से बैटर होता है, जो डिपेंड करता है कि आपकी इनकम और गोल क्या है.
 mortgage होने से आप अपना पैसा दूसरी ज़रुरत की  चीजों जैसे बच्चो की एजुकेशन और इन्वेस्टमेंट के लिए यूज़ कर सकते हो. थर्ड और लास्ट चीज़ जो आपको याद रखनी चाहिए, वो है स्टॉक  मार्केट में इन्वेस्ट करना. अगर आपने स्टॉक्स में इन्वेस्ट करने का मन बना ही लिया है तो अब आपको इसके बारे में जरूरी नॉलेज भी होनी चाहिए. जरूरी नॉलेज से हमारा मतलब है कि आप सिर्फ पिछली परफॉरमेंस  और बाकि इन्फोर्मेशन ही मत देखो बल्कि स्टॉक की एनुअल रिपोर्ट पढो. इन्वेस्टिंग में सिर्फ intuition और गेस से काम  नहीं  चलता. आपको लॉजिकल  और प्रैक्टिकल  नज़रिए  से भी सोचना पड़ता है. 
स्टॉक मार्केट में एह ही सबके लिए अच्छी होगी, जैसी कोई बात नहीं होती है. चाहे आप अपने  फाइनेंशियल  एडवाईजर पर कितना ही प्रेशर डाले कि वो आपको सही-सही बता दे कि कब और कितना इन्वेस्ट करना है, तो भी कोई आपको बेस्ट जवाब  नहीं  दे सकता, कोई भी  नहीं  और ये बात गाँठ बाँध लीजिये. 
अगर आप अपने पैसे को एकदम सही जगह इन्वेस्ट करना चाहते हो तो खुद रिसर्च  करो. हालाँकि ये बुक आपको निराश  नहीं  करेगी, वो भी तब जब आप अपनी फाईनेंशियल जर्नी की शुरूवात कर रहे है. 
हम आपको टॉप तीन प्रिंसिपल बता रहे है जो आपको इन्वेस्टिंग करने से पहले ध्यान में रखने होंगे- 
फर्स्ट है डाइवरसिटी 
अपना सारा पैसा एक ही स्टॉक में लगाना समझदारी  नहीं  है. Diversify  करना सीखो और अपने इन्वेस्टमेंट को बेलेंस करो. इन्वेस्टिंग में हम 60/40 का थम्ब रूल यूज़ करते है क्योंकि यही सबसे सटीक तरीका है. सिक्सटी परसेंट हाई रिस्क या एग्रेसिव इन्वेस्टमेंट में लगाओ. जबकि आपके पोर्टफोलियो का 40 परसेंट किसी सेफ और कंजर्वेटिव स्टॉक्स में होना चाहिए जैसे bonds या म्यूचल फंड. 
अब ये जो 60 परसेंट हाई रिस्क इन्वेस्टमेंट है, इसे भी हम दो पार्ट में डिवाइड करेंगे. 18 परसेंट इंटरनेशनल स्टॉक्स में और 42 लोकल स्टॉक्स के लिए. ऐसा करना  आपको अपना पैसा बैलेंस  रखने में हेल्प करेगा  और आपके पोर्टफोलियो को भी इम्प्रूव करेगा. 
सेकंड चीज़ है, लो कॉस्ट  मेंटेन करो. 
अब क्योंकि इन्वेस्टिंग कई सालो से चल रही है तो कई लोग ये प्रेडिक्ट करने की कोशिश करते है कि कोई स्टॉक अच्छा  इन्वेस्टमेंट है या  नहीं . इस बारे में कई रिसर्च  और सर्वे हो चुके है पर कोई सटीक जवाब किसी को नहीं मिला. सिर्फ एक चीज़ जो पता चली है ताकि आपको बेस्ट पॉसिबल हाएस्ट रीटर्न मिले वो है आपका कॉस्ट. 
जितना ज्यादा पैसा आप स्टॉक्स खरीदने के लिए खर्च करोगे उतना ही कम पैसा आपको लॉन्ग रन में मिलेगा. इसलिए अपनी स्पेंडिंग कम करो और इन्वेस्टिंग में लो कॉस्ट मेंटेन करो. 
तीसरी चीज़, रिस्क और रिवॉर्ड  के बीच का रिलेशनशिप. 
लो रिस्क का मतलब है लो रिवॉर्ड, लेकिन हायर रिक्स का मतलब है हायर रिवॉर्ड. आपकी लड़ाई आपके हाथ में है कि आप अपने रिसोर्सेज और वैल्यूज़ के हिसाब से क्या चूज़ करते हो. अगर आप हाई रिस्क  नहीं  लेना चाहते तो फिर एक ही स्टॉक में इन्वेस्ट करो. आज अगर आपने सोच-समझ कर डिसीजन लिया तो कल आपको कोई बड़ा नुक्सान  नहीं  होगा. स्टॉक मार्केट दुनिया की सबसे volatile जगह है यानी  जहाँ रोज़ नए बदलाव होते है. इसलिए जीतना है तो आपको भी चेंज होना पड़ेगा. टाइम टू टाइम अपना पोर्टफोलियो चेक करते रहो, और उसी हिसाब से डिसीजन लो. साल में एक बार आपको अपने पोर्टफ़ोलियों को rebalance  करना होगा और टाइम-टाइम पर खुद भी थोड़ी-बहुत रिसर्च  करनी होगी. 

CONCLUSION

तो इस समरी  ने आपको ऐसे सिंपल और ईज़ी स्टेप्स बताए है जो आपको अपना  फाइनेंशियल   प्लैन बनाने में हेल्प करेंगे. फाईनेंशीयली इंडीपेंडेट होने के लिए आपको जो प्रोसेस बताया गया है, उससे आप अपनी फाईनेंशियल प्लानिंग की जर्नी आसानी से स्टार्ट कर पाएंगे. 

वन  पेज   फाइनेंशियल   प्लैन बनाने से पहले आपको सबसे पहले इस सवाल का जवाब देना होगा कि  आपकी करंट  फाइनेंशियल  सिचुएशन क्या है. ख़ुद से सवाल करें कि “पैसा आपके लिए क्यों इम्पोर्टेंट है?” 
अब इस सवाल का जवाब आपको खुद ढूंढना है. 

इस समरी  से आपने ये भी सीखा कि अपने  फाइनेंशियल  गोल्स के बारे में कैसे गेस करे और कैसे अपने पर्सनल बैलेंस शीट बनाये जिसमे आपके एसेट्स और लाएबिलिटीज़ लिस्ट की गई हो. 

इसके बाद जो चीज़ आपने समझी , वो है बजटिंग यानी बज़ट बनाना क्यों जरूरी होता है और कैसे हम अपनी पेमेंट को ऑटोमैटिक बना सकते है. आपने ये भी सीखा कि हम अपने बेकार के  खर्चे कम करके पैसे सेव कर सकते है-खासकर वो चीज़े जो हम बिना सोचे समझे खरीद लेते है और जिनकी हमे असल में कोई जरूरत  नहीं  होती है. लास्ट में आपने इन्वेस्टिंग के अलग-अलग मेथड के बारे में जाना, जिनमे पहला है इंश्योरेंस, दूसरा है डेट, और तीसरा है स्टॉक मार्केट. आपने उन तीन टिप्स के बारे में भी जाना जिससे आप स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट कर सकते है, ये है डाइवरसिटी, लो कॉस्ट मेंटेन करना और रिस्क और रिवॉर्ड स्टडी करना. 

इस समरी में जो स्टेप्स दिए है, उनकी हेल्प से आप अपनी  फाइनेंशियल  प्लानिंग स्टार्ट कर सकते हो, लेकिन आपको सक्सेस तभी मिलेगी जब आप इन स्टेप्स को लगातार फॉलो  करते रहोगे. आपने शायद नोटिस किया होगा कि इनमे से ज्यादातर स्टेप्स सिर्फ आपकी लॉजिकल  थिंकिंग को ही नहीं बल्कि आपके इमोशंस को भी यूज़ करते है. वो इसलिए क्योंकि चाहे आप जी तोड़ मेहनत  कर लो या लॉजिकल  थिंकिंग यूज़ कर लो, लेकिन आखिर है तो आप एक इन्सान ही. 

एक इन्सान जो थकता है, गलतियाँ करता है, लालच में भी आता है पर इसके बावजूद इन्सान के अंदर कुछ खूबियाँ भी होती है जैसे कि वो बहादुर है, हिम्मती है, लगातार डटकर अपने रास्ते पर चलता रहता  है और कमिटेड भी है. मुझे उम्मीद है कि जब आप इस समरी  को सुन  चुके होंगे तो आप एक ऐसे इन्सान बनना चाहेंगे जो अपनी लाख कमियों के बावजूद भी हमेशा खुद में इम्प्रूवमेंट  लाने की और पहले से बेहतर  बनने की कोशिश करता है. 
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[Note : The Ebook is in English]

The One-Page Financial Plan by Carl Richards

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