The First 20 Hours: How to Learn Anything Fast Hindi Summary

 The First 20 Hours: How to Learn Anything ... Fast Hindi Summary and Ebook Download

By: Josh Kaufman

---------- About Book ----------

क्या आप एक नई स्किल सीखना चाहते हैं? क्या आप वायलिन बजाना, फ्रेंच बोलना या गार्डनिंग करना सीखना चाहते हैं? आप जो भी चाहे वह सीख सकते हैं. ये बुक आपको सिखाएगी कि ये कैसे करना है. जब आप अपने लिए क्लियर गोल्स बना लेंगे, सारे distractions को हटा लेंगे और डिसिप्लिन के साथ प्रैक्टिस करेंगे तो 20 घंटे लगाना भी काफ़ी है.

इस समरी से कौन सीख सकता है ? 

• नौजवान और बड़े 

• जो भी नई हॉबी या स्किल सीखना चाहते हैं.

ऑथर के बारे में 

जॉश कॉफ़मैन तीन बेस्ट-सेलिंग किताबों के ऑथर हैं. उनकी तीन किताबें हैं - Personal M.B.A , The First 20 Hours और How to Fight a Hydra . The First 20 Hours किताब के ऊपर उनका टेड टॉक यूट्यूब पर 22 मिलियन बार देखा गया है. कॉफ़मैन लोगों को अपनी शर्तों पर कोई भी स्किल सीखने के लिए मोटीवेट करते हैं.

 ---------- Summary ----------

इंट्रोडक्शन (Introduction) 

क्या आप हमेशा कुछ नया सीखना चाहते थे पर कभी नहीं सीख पाए? क्या आप ख़ुद से वादा करते रहते है कि आप एक नयी हॉबी या एक नयी स्किल सीखने के लिए टाइम निकालेंगे? पर आपके पास बिल्कुल टाइम नहीं है इन सबके लिए?

इस बुक में आप सीखेंगे कि आप एक नयी स्किल को कैसे जल्दी सीख सकते है. आप सिर्फ़ 20 घंटो में कोई भी स्पोर्ट्स खेलना या फिर कैलीग्राफी (calligraphy) लिखना जान सकते है. बहुत सारे ऐसे स्किल्स है जो आप सीख सकते है. सबसे अच्छी बात यह है कि आपको ये सब सीखने के लिए अपने घर के बाहर निकलने कि ज़रूरत ही नहीं है.

आपको कोई भी नयी स्किल को जल्दी से सीखने के लिए सिर्फ़ 10 प्रिंसिपल्स को जानना है .ये 10 प्रिंसिपल्स आपको गाइड करेंगे कि आप अपने शुरू के पहले 20 घंटों को कैसे काम में ला सकते है .यह बहुत ही फायदे का सौदा है क्योकि आपको इसके लिए सिर्फ़ 10 स्टेप्स को फॉलो करने होंगे .यही नहीं, ये सारे स्टेप्स बहुत ही सिंपल और इजी भी हैं.

अ पोट्रैट ऑफ़ दी ऑथर एज़ अ लर्निंग जनकी (A Portrait of the Author as a Learning Junkie) 

हम सभी की तरह ही इस बुक के ऑथर , जॉश कॉफ़मैन भी बहुत कुछ सीखना चाहते है पर इनके पास भी टाइम की कमी है. इनके bookshelf में बहुत सी किताबों के ढेर लगे हुए है. इन्होने एक लम्बी-सी लिस्ट बनाई है जिसमे इन्होने अपने जीवन में क्या-क्या करना है और क्या स्किल्स सीखने है, वह सब लिखा है. जॉश के पास बहुत सारे ब्रिलियंट आइडियाज है पर इन्हे समझ नहीं आता कि इन आइडियाज को कैसे हकीकत बनाए. ये ख़ुद से वादा करते है कि ये गोल्फ खेलेंगे और रॉक क्लाइम्बिंग भी करेंगे पर कभी कर नहीं पाते. अब आप सोच रहे होंगे कि-"अरे ये ऑथर तो मेरे ही जैसे है" .

नयी स्किल्स को डेवलप करना काफ़ी frustrating है. आपको इसके लिए काफ़ी प्रैक्टिस करनी पड़ती है और ऐसा लगता है मानो इसके लिए सदियाँ लग जाएँगी. डॉ. एंडर्स एरिक्सन द्वारा किये गए एक रिसर्च के अनुसार अगर आप किसी चीज़ में बहुत ही अच्छा होना चाहते है तो उसके लिए आपको लगभग 10,000 घंटों की प्रैक्टिस करनी पड़ेगी. अगर आपको ये समझना है कि ये कितना टाइम होता है, तो ये समझिये कि ये लगभग एक ऑफिस में पाँच सालों तक फुलटाइम काम करने जैसा है. तो हाँ, इसमें वाकई सदियाँ लग जाती है, पर एक गुड न्यूज़ है.

पीछे हटने से पहले एक बात जानिये. डॉ. एरिक्सन की स्टडी एक्सपर्ट लेवल परफॉरमेंस से जुडी थी. उन्होंने जिन लोगों को स्टडी किया था, वे ऐसे लोग थे जो अपने बचपन से ही किसी चीज़ की प्रैक्टिस कर रहे थे. इसको Deliberate practice कहते है. यानी कि ये 10,000 घंटों वाली रूल सिर्फ़ उन्ही लोगों पर लागू होता था जो कि अपने-अपने फील्ड में एक्सपर्ट थे.

पर अगर आपको किसी स्किल को ठीकठाक लेवल तक सीखना है तब क्या? अगर आपको गोल्फ का गेम उतना ही सीखना है जितने में आप अपने दोस्तों के साथ-साथ इसको खेल सके और आनंद उठा सके, तब क्या? आपको ये जानकार ख़ुशी होगी कि तब आपको 10,000 घंटे बिल्कुल नहीं लगानी पड़ेगी .

अगर आपको एक नयी स्किल सीखनी है तो आपको इसके लिए 20 घंटों की प्रैक्टिस करनी पड़ेगी. 10,000 घंटों के मुकाबले ये 20 घंटे काफ़ी कम है, है ना ? इस बुक के अनुसार, स्किल पाने का मतलब ये नहीं है कि आपको एक प्रो ही बनना है बल्कि एक स्किल को इतना सीखिए जितने में आप उस स्किल को ठीकठाक सीख जाएं.

क्या एक स्किल को पाने में और एक स्किल को सीखने के बीच में कोई फ़र्क है ? जॉश कॉफ़मैन ने अपने हाई स्कूल में स्पेनिश लैंग्वेज सीखी. उन दिनों उन्हें स्पेनिश के verbs , conjugation और common phrases आते थे. पर अब ये 5 सेकण्ड्स के लिए भी स्पेनिश में बातचीत नहीं कर पाते.

जॉश के एक दोस्त जिनका नाम कार्लोस है, वे स्पेनिश बोलते है और इंग्लिश बोलना सीखना चाहते थे पर उन्होंने एक भी इंग्लिश की क्लास नहीं ली. बल्कि, उन्होंने इंग्लिश बोलने वाले लोगों से बातचीत करने की कोशिश शुरू कर दी. उन्हें पता नहीं कैसे पर अब वे इंग्लिश बोल सकते है. कार्लोस ने लोगों से इंग्लिश में बातचीत करना हमेशा जारी रखा.

इसलिए सिर्फ़ सीख लेने से ही से ही आप एक स्किल को पूरी तरह से नहीं पा सकते बल्कि इसके लिए तो आपको कार्लोस की तरह काफ़ी प्रैक्टिस करनी पड़ेगी और इस्तेमाल करना पड़ेगा.

टेन प्रिंसिपल्स ऑफ़ रैपिड स्किल एक्वीजीशन (Ten Principles of Rapid skill acquisition) 

जॉश कॉफ़मैन सुझाव देते हैं कि जब आप इन स्टेप्स को करें , तब इस बात का पता करें कि आप पर उस दौरान क्या सीखने का जुनून सवार है. अगर आपको किसी चीज़ को लेकर कुछ वक़्त का जुनून है तो उस चीज़ के बारे में सीखने के लिए आप जी जान लगा देते है. अब आप ऐसा सोचेंगे कि इन स्टेप्स का होना तो ज़ाहिर सी बात है. जो की वाकई में है. पर, सिर्फ़ इन स्टेप्स को जानना काफ़ी नहीं है. आपको प्रैक्टिस करने कि भी ज़रूरत पड़ेगी. आइये अब देखे ये 10 स्टेप्स जिससे हम स्किल्स को जल्दी से पा सकते है.

1) आप अपना बहुत मनपसंद प्रोजेक्ट चुनिए. इसके लिए आपको ऐसा प्रोजेक्ट लेना है जिसको करने लिए आप बहुत ही एक्ससाइटेड हैं. स्किल सीखने के लिए आपमें जितनी ज़्यादा इच्छा होगी, उतनी ही जल्दी आप उसे पा लेंगे. जॉश कहते है कि वे चाइनीज़ मैंडरिन लिखना सीखना चाहते थे. पर उन्हें उस वक़्त इसे सीखने की कोई ज़रूरत नहीं थी इसलिए उन्होंने अपनी एनर्जी और प्यार को कहीं और लगाने के बारे में सोचा. फिर, जॉश को “GO” सीखने की दिल से बहुत इच्छा हुई. GO एक स्ट्रेटेजिक बोर्ड गेम है जिसकी शुरुवात चाइना में हुई थी. क्योकि अब जॉश को Go सीखने की इच्छा ज़्यादा थी इसलिए उन्होंने पहले इसे सीखने का फ़ैसला किया. उन्होंने मैंडरिन को बाद के लिए छोड़ दिया. वह जानते थे कि उस वक़्त अगर वो अपना मनपसंद प्रोजेक्ट- Go game को सीखने में फोकस करेंगे तो इसकी मदद से वे बाद में मैंडरिन जल्दी से सीख सकते है.

2) अपनी सारी एनर्जी का फोकस एक बार में सिर्फ़ एक ही स्किल को पाने में लगाइये.जॉश ने अपने लाइफ में यही गलती काफ़ी बार की है. उन पर एक साथ कई स्किल्स को सीखने की धुन सवार हो गई. उन्होंने इन स्किल्स के बीच में अदला बदली करने में ही इतना ज़्यादा टाइम बर्बाद कर दिया कि आख़िर में वे कुछ भी नहीं सीख पाए. आपको अपना टाइम एक बार में एक ही स्किल में कॉन्सेंट्रेट और फोकस करने के लिए डेडिकेट करना चाहिए. अगर आप अपने टाइम और एनर्जी को स्विमिंग, सिलाई और दस और स्किल्स को एक ही साथ सीखने में लगाएंगे, तो ये सब बेकार हो जाएगा. एक स्किल को इम्प्रूव करने के लिए आप जितना कॉन्सेंट्रेशन और अटेंशन दे पाएंगे वो काफ़ी नहीं होगा. इसलिए सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही स्किल को चुने.

Getting things done बुक के ऑथर डेविड एलन के पास इस स्टेप के लिए एक टिप है. अगर आपको एक स्किल में फोकस करने के लिए मदद चाहिए तो आप "किसी दिन/शायद" की एक लिस्ट बना लो. इस लिस्ट में आप उन सारी चीज़ों के बारे में लिख लो जिन्हे आप करना तो चाहते हो मगर अभी नहीं, बाद में . इससे आपका ब्रेन समझ जाएगा कि ये सारे चीज़े "ऑन होल्ड स्टेटस" ("on hold" status) वाले है. ऐसा करने से आप अब इनके बारे में फिलहाल नहीं सोचेंगे और फिर जब आप कोई नई स्किल सीखना चाहोगे, तभी आपका ब्रेन इनको "ऑन होल्ड" ("on hold") से "एक्टिव स्टेटस" ( "active" status) में बदलेगा.

3) आपका टारगेट परफॉरमेंस लेवल क्या होगा इसको बताइए. ऐसा करने के लिए, आपको ख़ुद से पूछना होगा कि "मैं इस स्किल में कितना अच्छा होना चाहता हूँ ?" ऐसा करने पर आप हिसाब लगा सकते है कि इसके लिए आपको कितना टाइम और एफर्ट लगाना होगा. फिर आप उस स्किल को आसानी से पा लेंगे. एग्ज़ाम्पल के लिए, मान लीजिये आपको गिटार बजाना सीखना है. तो आप गिटार में एक गाना बजाना प्रैक्टिस कर सकते है. आपको भले ही एक ही गाना बजाना आए मगर आप सबको ये कह सकते है कि आपको गिटार बजाना आता है. आपका टारगेट परफॉरमेंस लेवल जितना ही "रिलैक्स्ड" रहेगा, आप उतनी ही जल्दी किसी भी स्किल को पा लेंगे.

4) स्किल्स को sub-skills में बाँटिये. आप जो स्किल सीखना चाहते है, अगर वह आपके लिए बहुत ही ज़्यादा है तो उसे मैनेज करने लायक बनाइये. इसके लिए हम स्किल्स को छोटे-छोटे हिस्सोंमें बाँट सकते है. एग्ज़ाम्पल के लिए गोल्फ लेते है. गोल्फ के गेम के काफ़ी सबस्किल्स होते है : यह जानना कि आपको कौन से क्लब से खेलना अच्छा लगता है, बॉल के ट्रैक , बॉडी का सही पोजीशन वगैरह. जब आप इस स्किल को अलग-अलग बांटेंगे, तो आपको समझ आ जायेगा कि आपके लिए कौन-सा फैक्टर सीखना ज़्यादा ज़रूरी है. बाक़ी के पेचीदा और टेक्निकल चीज़ों के बारे में आप बाद में भी सीख सकते है.

5) जो भी बहुत ज़रूरी टूल्स है, उसे लाइए. हमेशा याद रखिये कि सिर्फ़ सीखने भर से ही हम किसी स्किल को नहीं पा सकते . आपको इसकी प्रैक्टिस करनी होगी . टेनिस की प्रैक्टिस आप कर नहीं सकते अगर आपके पास टेनिस की रैकेट ना हो. बास्केट बॉल खेलने के लिए आपको सबसे पहले एक बॉल की ज़रूरत पड़ेगी. इसलिए आप उन ज़रूरी टूल्स को पहचानिये जो प्रैक्टिस करने के लिए चाहिए. ऐसा करने से आपका टाइम बचेगा.

6) प्रैक्टिस के लिए हर रुकावट को हटाइये. जॉश कॉफ़मैन ने उन तीन रुकावटों की पहचान की है जो आपको किसी स्किल की प्रैक्टिस करने से रोकता है. पहली रुकावट है रिसोर्स अवेलेबिलिटी (resource availability) . इसका मतलब है कि प्रैक्टिस के लिए आपको जिन टूल्स की ज़रूरत है, वह मौजूद नहीं है. एग्ज़ाम्पल के लिए, बारिश के कारण बाहर मैदान गिला हो गया हो या आपके पास जो इक्विपमेंट है, वह किसी से उधार में लिया गया हो. दूसरी रुकावट है एनवायरनमेंट में distraction . ये भी आपको प्रैक्टिस करने से रोकते है. आप अपने फ़ोन को देख रहे हो, टीवी देख रहे हो या आप अपना ईमेल चेक कर रहे हो- ये सब एनवायरनमेंट distraction कहलाते है .आख़िर में, तीसरी रुकावट है आपके इमोशनल ब्लॉक्स . मन में कोई डर होना या फिर कोई शक होना आपको स्किल के लिए काम करने से रोकते है. जब तक आप इन साड़ी रुकावटों को हटा नहीं लेते, आप किसी भी स्किल को उतनी जल्दी नहीं पा सकते जितनी जल्दी आप चाहते है. 

7) प्रैक्टिस करने के लिए आपको एक डेडिकेटेड (dedicated) टाइम रखनी चाहिए. हम जब भी कुछ नया सीखना चाहते है, उसमे सबसे बड़ी प्रॉब्लम होती है हमारे टालमटोल करने की आदत. कोई काम करने की हम ख़ुद से वादा तो कर लेते है पर फिर भी हम वह काम नहीं कर पाते है . हम अपने फ़ोन पर लग जाते है या फिर कोई भी बहाना बना लेते है. अगर आपको वाकई में कोई स्किल पाना है तो आपको उसके लिए टाइम तो निकालना ही पड़ेगा. हाँ आपके पास और भी जिम्मेदारियाँ है पर फिर भी अपने सारे दिन में से कुछ मिनट तो आप स्किल की प्रैक्टिस के लिए निकाल ही सकते है. यह जानने के लिए कि आप अपना टाइम कैसे बिताते है, आपको बैठकर यह लिखना चाहिए कि आपने अगले दो दिनों तक क्या किया. जॉश ने ऐसा ही किया और उन्हें जानकार हैरानी हुई कि वे काफ़ी टाइम किसी स्किल के लिए निकाल ही सकते थे.

प्रैक्टिस के लिए पहले से ही "प्री-कमिट" ("Pre-commit") करना भी आपको प्रैक्टिस के लिए एनकरेज कर सकता है. खुद को 20 घंटों के प्रैक्टिस के लिए पुश करना ही चाहिए. आप ख़ुद से अगर ऐसा वादा करते है तो आप आसानी से पीछे नहीं हटेंगे . इसलिए ख़ुद से कहते रहिये कि "सिर्फ 20 घंटों की प्रैक्टिस ही तो करनी है. फिर ख़त्म हो जाएगा" .

8) आपको एक लूप तैयार करना होगा जिससे आपको जल्दी-जल्दी फीडबैक मिलता रहे. जल्दी फीडबैक मिलने से आप जल्द से जल्द स्किल पा सकते है. अगर आपको यही नहीं पता होगा कि जो आप सीख रहे है वह सही है या नहीं, तो आपके सीखने में देरी हो सकती है. एग्ज़ाम्पल के लिए, किसी भी कंप्यूटर के प्रोग्रामिंग में फ़ास्ट फीडबैक होता है. कंप्यूटर झट से दिखा देता है कि कोड काम करता है कि नहीं. फिर उसके हिसाब से आप अपना एडजस्टमेंट करते है और आगे इम्प्रूव करने के लिए एनकरेज होते है.

इसके अलावा, एक कोच भी फ़ास्ट फीडबैक देने में मदद करते है. वे आपको फ़ौरन बता देंगे अगर आप कभी कोई गलती करते हो और अगर आपके पास कोई कोच न हो तो, आप प्रैक्टिस करते हुए अपनी वीडियो रिकॉर्ड कर सकते है. इससे आप ख़ुद को वीडियो में देखकर बता सकेंगे की आप जो भी कर रहे हो, वह सही कर रहे हो या गलत.

9) घड़ी देखकर थोड़ी-थोड़ी देर के लिए प्रैक्टिस करें. स्किल प्रैक्टिस के शुरू के दिनों में आपको लगेगा जैसे टाइम बहुत धीरे चल रहा है. आपको ऐसा लगेगा जैसे आप काफ़ी देर से प्रैक्टिस कर रहे है जबकि आपने सिर्फ़ 5 मिनट बिताये होंगे. इसे solve करने के लिए आप टाइमर को यूज़ कर सकते है. इस टाइमर की मदद से आप सिर्फ़ 20 मिनट के प्रैक्टिस सेशन बनाइये. पर इसके लिए आपको वादा करना पड़ेगा. जैसे ही टाइमर शुरू हो तो आप प्रैक्टिस शुरू करेंगे और तब तक नहीं रुकेंगे जब तक 20 मिनट नहीं बीत जाते. उसके बाद आप 10 मिनट का ब्रेक ले सकते है और फिर से टाइमर को प्रैक्टिस के लिए शुरू कर सकते है.

10) Quantity और स्पीड पर ज़्यादा ज़ोर दे. आपको परफेक्शन के बजाय स्पीड को अपना aim बनाना चाहिए. इसे आपको जितनी जल्दी हो सके करना चाहिए. पर साथ ही इम्प्रूवमेंट पर भी ध्यान देना चाहिए. आपको ये भूलना नहीं है कि स्किल्स पाने के लिए आपको लगातार प्रैक्टिस करनी पड़ेगी.

द प्रिंसिपल्स ऑफ़ इफेक्टिव लर्निंग (The Principles of Effective Learning) 

स्किल पाने के लिए भले ही सिर्फ़ उसको सीखना काफ़ी न हो, पर सीखना इसका बहुत बड़ा पार्ट होता है. अपने स्किल को प्रैक्टिस करने से पहले आपको रिसर्च करनी चाहिए. ऐसा करने से आपका और भी टाइम और एनर्जी बचेगा. रिसर्च से आपको ये भी पता चलेगा कि आपको कौन से सबस्किल्स को पहले सीखना चाहिए. अपने टारगेट स्किल को इफेक्टिव तरीके से सीखने के लिए यहाँ कुछ प्रिंसिपल्स बताये गए है जिन्हे आपको फॉलो करना है.

1) स्किल और उससे जुड़े टॉपिक पर रिसर्च कीजिये. चाहे इंटरनेट से ढूंढ़कर हो या फिर किसी बुकस्टोर से लाकर, आपने कम से कम 3 source को अपने रिसर्च के लिए लेना है. नहीं, आपको इन किताबों या मैन्युअल को पढ़ना या रटना नहीं है. ऑथर सलाह देते है कि आपको इन sources को बस ज़रा-सा समझना है. आप इनको एक बार समझ लेंगे तो ये पता चल जायेगा कि इनमे कौन से आइडिया को बार-बार यूज़ किया गया है. इतना यूज़ होने का मतलब ये हो सकता है कि ये आइडिया स्किल प्रैक्टिस के लिए काफ़ी ज़रूरी है. क्योकि आपने पहले ही रिसर्च किया हुआ है इसलिए अब आपको ये पता होगा कि कौन से फैक्टर्स पर आपको ज़्यादा फोकस करना है.

2) आप ख़ुद को ऐसी सिचुएशन में पा सकते है जिसका आपको बहुत ज़्यादा पता न हो. अगर आपको confusion हो तो वह भी आपको स्किल प्रैक्टिस करने से रोकते है. हो सकता है कि आपको कोई शब्द या फिर कोई प्रोसेस समझ में ना आए, पर कोई बात नहीं. रिसर्च की कोई बात समझ में ना आए तो भी आप उस बात से भागे नहीं बल्कि उसे अपनाएं. अगर आपको किसी बात का मतलब समझ ना आए तो अगली बार उसके बारे में रिसर्च ज़रूर करें और फिर अगली प्रैक्टिस में उसे ज़रूर अप्लाई करें. फिलहाल के लिए जो कुछ भी आपको समझ आया है, उस पर काम करें. आप में जितना कम confusion होगा, आप उतना ही फ़ास्ट सीखेंगे.

3) अपने सोच के मेन्टल मॉडल (mental model) और मेन्टल हुक्स (mental hooks) को पहचाने. ये मेन्टल मॉडल वह आइडिया और टेक्निक्स है जो आपके रिसर्च में बार-बार सामने आते है. आपको इन मॉडल्स को अपने साथ रखना है क्योकि ये आपको जल्दी-जल्दी सीखने में मदद करेंगे. किसी भी चीज़ और आइडिया के बीच के कनेक्शन को आप इन मेन्टल मॉडल्स की मदद से समझ पाएँगे. अपने साथ-साथ आप उन दूसरे लोगों को भी समझा पाएंगे जिनको कोई कांसेप्ट समझ नहीं आ रहा हो. जैसे एक बार जॉश ने अपने पिताजी को वेबसाइट बनाने में मदद करने की कोशिश की. जॉश को अपने पिताजी को वेबसाइट का प्रोसेस समझाना बहुत ही मुश्किल लगा क्योकि उनके पिताजी को किसी भी टर्म की समझ नहीं थी. पर एक टर्म– "सर्वर" उनके सामने काफ़ी बार आया .

फिर जब जॉश के पिताजी ने "सर्वर" का मतलब समझा तो फिर उनको वेबसाइट बनाने का सारा प्रोसेस आसानी से समझ में आ गया.

दूसरी तरफ़. मेन्टल हुक (mental hook) analogy और metaphor को यूज़ करती है जिससे आप नए-नए कॉन्सेप्ट्स को समझ पाते है. अगर आपको "सर्वर" का मतलब नहीं पता तो लाइब्रेरी की देखरेख करने वाले को याद कीजिये. आप जब एक लाइब्रेरियन से कोई ख़ास किताब मांगते है तो उन्हें सबसे पहले किताब को ढूंढ़ना होता है .उनको अगर वह किताब मिल जाती है तो वह आपको दे देते है पर अगर नहीं मिलती तो आपको समझाते हैं कि किताब क्यों नहीं मिला. एक वेब सर्वर भी ऐसे ही काम करता है. जब आप एक वेब पेज ढूंढ़ते है तो सर्वर आपके लिए वह ढूँढ देता है. अगर वह मिल जाता है तो आपको वह वेब पेज दे देता है. और, अगर नहीं मिलता तो सर्वर बताता है. "Error 404: Page Not Found" .

4) आप जो भी चाहते है, उसका बिलकुल उल्टा सोचिये. ये टेक्निक इनवर्ज़न (inversion) है जो एक प्रॉब्लम सॉल्विंग टेक्निक है. ये आपको ज़रूरी चीज़ सीखने में मदद करेगा. जैसे कि मान लीजिये आपको white-water kayaking करनी है. ये एक ऐसी एक्टिविटी है जिसमे आपको एक कायाक (kayak) को पत्थरो से भरे हुए और तेज़ बहते हुए नदी के पानी के बीच संभालना पड़ता है. अब इनवर्ज़न की मदद से आप ये इमेजिन कीजिये कि अगर आप सब कुछ ग़लत कर देते है तो क्या होगा.

शायद आप अपने कायाक को उलट देंगे और आपका सिर पानी में डूब जाएगा. आप कायाक को पानी से भर भी सकते है जिससे आप शायद डूब जाएँगे. आप कायाक से गिरकर पानी में बह सकते है क्योकि नदियाँ बहुत तेज़ बहती है. ये सब इमेजिन करने पर आप जान जाएंगे कि ख़ुद को इन खतरनाक सिचुएशन से बचाने के लिए आपको क्या सीखना है.

5) अपने आस पास हो रहे डिस्ट्राक्शन्स को हटाइये. अगर आपका ध्यान भटकता है तो आप अपने प्रैक्टिस में फोकस नहीं कर पाएंगे. स्किल को पाने का प्रोसेस धीरे हो जाएगा. प्रैक्टिस करने से पहले अपने इलेक्ट्रॉनिक डिस्ट्राक्शन्स जैसे कि टीवी और फ़ोन को हटाइये. सिर्फ उन टूल्स को यूज़ कीजिये जो आपके प्रैक्टिस के लिए बहुत ही ज़रूरी है. आपकी फेमिली, फ्रेंड्स और साथ काम करने वाले आपके बायोलॉजिकल डिस्ट्राक्शन्स (biological distractions) है. आपके प्रैक्टिस सेशन को वे डिस्टर्ब न करें इसलिए आपको उन्हें पहले ही बता देना चाहिए कि आप प्रैक्टिस के टाइम मौजूद नहीं होंगे.

6) याद करने कि अपनी केपेबिलिटी (capability) को reinforcement के ज़रिए बढ़ाते रहिये. हमारे दिमाग़ को हमेशा बहुत सारा इनफार्मेशन लेना पड़ता है. इसलिए हमारी मेमोरी यानी याददाश्त कभी भी परफेक्ट नहीं होती. अगर आपको कुछ ज़रूरी इनफार्मेशन याद रखनी है तो आपको reinforcement करना पड़ेगा. इसके लिए आपको उस बात को बार-बार दोहराना पड़ेगा ताकि वह आपके लॉन्ग-टर्म मेमोरी में स्टोर हो जाए.

7) स्कैफ़ोल्ड (Scaffold) और चेकलिस्ट बनाइये. जब आपके पास कोई भी काम करने के लिए एक तरीक़ा हो, तब प्रैक्टिस करना काफ़ी आसान हो जाता है. चेकलिस्ट की मदद से आप हमेशा ये याद कर सकते है कि आपको प्रैक्टिस के लिए क्या करना है. और, स्कैफोल्डस (scaffolds) आपको याद दिलाता रहता है कि आपको स्किल्स को हमेशा एक ही तरीके से एप्रोच करना है. स्कैफोल्डस (scaffolds) का बहुत बड़ा एग्जाम्पल है बास्केटबॉल प्लेयर, वो जब भी बॉल फैंकता है तब वह अपने कंधे को ढीला करता है और एक लम्बी-सी सांस लेता है.

 8) अपने बायोलॉजी का ध्यान रखिये. अगर आपका बॉडी और माइंड आपको प्रैक्टिस करने से रोकते है तो आपको ज़रूर रुकना चाहिए. "The Power of Full Engagement" बुक के ऑथर टोनी स्वार्ट्ज़ ने लर्निंग साईकल के बारे में बातें बताई है .टोनी के अनुसार हमारा माइंड और बॉडी सिर्फ़ 90 मिनट के लिए ही पूरी तरह से किसी चीज़ पर कॉन्सेंट्रेट कर पाते है. 90 मिनट से ज़्यादा होते ही आपका माइंड और बॉडी आपको रोक देते है. ऐसे टाइम पर आप टाइमर का इस्तेमाल कर सकते है.

अगर आपको 90 मिनट प्रैक्टिस के लिए बहुत लम्बा समय लगता है तो आप इसे छोटे-छोटे पार्ट में बाँट लीजिये. आप 20 मिनट के लिए प्रैक्टिस कर सकते है. फिर आप 10 मिनट के लिए ब्रेक ले लें और ब्रेक के बाद फिर से प्रैक्टिस शुरू कर सकते है.

 कन्क्लूज़न (Conclusion) 

इस बुक में आपने सीखा कि शुरू के पहले 20 घंटो में आप कैसे कोई स्किल पा सकते हैं . आपको 20,000 घंटे लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि इतना डेडिकेशन और एफर्ट तो सिर्फ़ किसी वर्ल्ड क्लास परफ़ॉर्मर को ही लगानी पड़ती है. आपको अगर कोई नई हॉबी का मज़ा लेना है या फिर थोड़ा सेल्फ-कॉन्फिडेंस बढ़ाना है तो 20 घंटे काफ़ी है.

आपने ये भी सीखा कि किसी स्किल को पाने में और उसको सिर्फ़ सीखने के बीच में क्या फ़र्क होता है. स्किल पाने का सबसे असरदार तरीक़ा है उसको प्रैक्टिस करना. सीखना ज़रूरी होता है पर स्किल को सिर्फ़ सीखने से नहीं पाया जा सकता है. आपको उसे अप्लाई भी करना पड़ता है.

किसी स्किल को अच्छे से जानने के लिए आपको 10 प्रिंसिपल्स को मानना होगा. एक, आपको वह प्रोजेक्ट चुनना चाहिए जो आपको बहुत पसंद हो. दो, सिर्फ़ और सिर्फ़ स्किल में ही अपना फोकस रखें. तीन, आप पहले से ही जान ले कि आपको अपना परफॉरमेंस किस लेवल तक पहुंचानी है. चार, स्किल्स को सब-स्किल्स में बाँटिये जिससे आप पर ज़्यादा भार ना आये. पांच, प्रैक्टिस शुरू करने से पहले सारी तैयारी कर लें.

छ, उन सब बाधाओं को तोड़ दें जो आपको डिस्टर्ब करते है. सात, कम से कम 20 घंटे लगाने का कमिटमेंट कीजिये. आठ, जल्दी-जल्दी फीडबैक लीजिये. नौ, 20 घंटों को 20 मिनट के छोटे-छोटे के पीरियड में बांटे और बीच-बीच में ब्रेक लें. दस, स्पीड और क्वांटिटी को अपना aim बनाएं.

आजकल हमें कोई भी जानकारी एक क्लिक पर ही मिल जाती है. इस बात का फायदा उठाइये और उन सारे स्किल्स को सीखिए जिनको आप हमेशा से ही सीखना चाहते थे. अगर आप इन प्रिंसिपल्स को फॉलो करते है तो किसे पता आप कितने सारे स्किल्स सीख जाएं. वो स्किल कुछ भी हो सकती है जैसे एक नई लैंग्वेज या एक नया म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाना, एक नया स्पोर्ट या फिर एक नई हॉबी . शायद आप हैरान हो जाएँगे कि आप कितना कुछ सीख सकते हैं.

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