17 Anti Procrastination Hacks Summary in Hindi

17 Anti Procrastination Hacks Summary in Hindi

By- Dominic Mann

---------- ABOUT BOOK ----------

मैं भी इससे गुजर चुका हूँ। हम सब काम टालते हैं। मैं खुद गारंटी देता हूँ की आपकी सभी टालमटोल करने की आदत खत्म हो जाएँगी, अगर आप इस बुक में दिए हुए hacks यूज़ करते हैं। मुझे यह कैसे पता? दरअसल यह समरी एक ऐसे ही इंसान ने लिखी है जिसे काम टालने की आदत थी लेकिन किसी तरह इन टिप्स को यूज करते हुए उन्होंने यह समरी पूरी की। क्या आप अपनी टालमटोल वाली आदत की चेन को तोड़ना चाहते है? तो इसे पढ़े।

ये समरी किस-किसको पढ़नी चाहिए? 
· एम्प्लॉईस 
· स्टूडेंट्स 
· सभी टालमटोल करने वाले लोग 
· वो सभी लोग जो कोई काम करना चाहते है पर कर नहीं पा रहे हैं 

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---------- SUMMARY ----------

इंट्रोडक्शन 

तो, असल में हम काम को कल पर क्यों टालते हैं? हमारे दिमाग में ऐसा क्या होता है जो हमें ऐसी गंदी आदत लग जाती हैं?

क्या ये काम को टालने वाली आदत कभी खत्म हो सकती है? खुद को बर्बाद करने वाली इस आदत को सुधारने का कोई तरीका है? हाँ, बिलकुल है!
इस बुक में आप एक नहीं बल्कि 17 ऐसे तरीकों के बारे में पढेंगे! 

ये बुक आपको जिंदगी के ऐसे hacks बताएगी जिससे आप अपनी टालमटोल वाली आदत छोड़ देंगे। hack का मतलब है किसी काम को आसानी और efficient तरीके से करने के लिए बहुत ही सिंपल और स्मार्ट technique. आप ऐसे कई लोगों की कहानियां पढ़ेंगे जिन्होंने इन hacks को अपनाया और अपनी जिंदगी बदल ली। 
चलिए शुरू करते हैं।

Why Intelligent People Procrastinate (And How Not to?)

एक जवान, पागल आदमी हर जगह अपनी उँगलियों को injure करता रहता था। वह बार बार यही करता रहता था। क्यों? क्योंकि वह भविष्य नहीं बता पा रहा था।  वह पार्टी में खूब मस्ती करता था। उससे बात करना भी मजेदार था और वह ऐसे बर्ताव करता था जैसे उसके एक्शन का कोई नतीजा ना हो और उसके दिमाग में वाकई इनका कोई रिजल्ट या अंजाम नहीं था.

उसकी ऐसी हालत के बावजूद, उस नौजवान आदमी ने कभी टालमटोल नहीं की। अपनी जिंदगी में एक बार भी नहीं। क्यों? क्योंकि लोग टालमटोल तब करते हैं जब वे रिजल्ट के बारे में सोचते हैं और उस आदमी के अनोखे दिमाग के लिए, रिजल्ट देख पाना असंभव था.

जब भी उसके पास कोई काम होता, वह कर लेता। वह नहीं सोचता कि वह उस काम को करने में मजा लेने वाला है या नहीं। वह कभी ज्यादा नहीं सोचता था । बस काम करता रहता है.

सोचो जरा, आप अपने एक दोस्त के साथ हो जिसने फल काटते वक़्त अपनी उँगलियाँ काट ली। आप वो तस्वीर अपने दिमाग में रख लेते हो, और फिर आप फल काटने से डरने लगते हो.

आपके पास एक ऐसा काम है जिसे करना आपके लिए बहुत जरुरी है, लेकिन असल में आप उसे कभी नहीं करते। आप हमेशा किसी ना किसी चीज से डरते हो। आप सोचते हो कि अगर आपने वो काम सही नहीं किया तो? अगर आपने वो काम गलत कर दिया तो? क्या होगा अगर आपको वो काम करने में मजा नहीं आया तो? 

तो, ऐसा लगता है की टालमटोल एक ऐसा बोझ है जिसे हर किसी को अपने साथ लेकर चलना पड़ता है। हम सोचते है और सोचते ही रहते हैं। हम हर काम को करने से पहले इतनी बारीकी से इतना ज्यादा सोचते हैं कि फिर उस काम को करने का वक़्त ही नहीं बचता.

लेकिन इसका एक उपाय है जो है “नेक्स्ट एक्शन” करने की आदत डालना। 

Develop the “Next Action” Habit and Build Momentumh

Joshua को एक बहुत बड़ा काम करना हैं। उसके बॉस ने उसे 3000 पिक्चर को उनके सब्जेक्ट के हिसाब से लगाने के लिए कहा है। Joshua को उन्हें अलग अलग फ़ोल्डर के हिसाब से organize करना था: स्पोर्ट्स का सब्जेक्ट अलग, सेलिब्रिटीज का अलग, और खाने पीने का अलग.
इतना बड़ा काम करना बहुत मुश्किल होता है। ये सोचना भी नामुमकिन लगता है कि काम कहाँ से शुरू किया जाये। लेकिन आपको पता है Joshua ने क्या किया? उसने उस बड़े से काम को छोटे छोटे कामों में बांट दिया.

Joshua ने सबसे पहले 3000 पिक्चर को 100 में बांटा। देखा आपने? अब, उसे सारी पिक्चर के साथ डील करने की जरूरत नहीं है। उसे बस पहली 100 को organize करना है। ऐसे करते करते Joshua अगले 100 करता गया, जब तक उसने पूरा काम deadline से पहले नहीं निपटा लिया. कुछ भी नहीं बदला। 3000 पिक्चर के काम में 3000 पिक्चर ही थी। जो बदला वो था, Joshua का उससे डील करने का तरीका.

उसने अपने दिमाग को ट्रिक किया कि काम बहुत आसान और छोटा सा है। Joshua ने उसे कई सारे छोटे छोटे टुकड़ों में बांट दिया जबतक उसने पूरा काम नहीं कर लिया। और आपको पता है, physics ने इसमें एक बड़ा रोल निभाया।  Newton का पहला लॉ बताता है कि एक बॉडी जो रैस्ट पर होती है वो तब तक रैस्ट पर ही रहती है जब तक उसपर कोई force ना लगाई जाये। इसका यह भी मतलब है कि एक बॉडी जो काम कर रही है, वो तब तक काम करती रहती है जब तक कोई force उसे रोकती नहीं है। 

जब आप टालमटोल करते हैं, आप करते ही रहते हैं जब तक कुछ बदलता नहीं है। आपको सिर्फ एक momentum की जरुरत है जो आपको अपना काम करने के लिए force करेगी। जब आप एक काम कर रहे होते हो, दूसरा काम करने का momentum अपने आप बन जाता है।

जब आप एक टास्क पूरा कर लेते हो, आप अपने आराम कर रहे दिमाग के लिए momentum बना लेते हो। फिर आप अपने दिमाग को दूसरा काम करने के लिए ज़ोर देते हो, फिर तीसरा और फिर चौथा, और ऐसे ही सारे काम हो जाते हैं. यहाँ ट्रिक ये है कि आपको अपने बड़े मुश्किल काम को छोटे छोटे कामों में बाँटना है। आपको अपने दिमाग को समझाने की जरूरत है कि ये बड़ा काम आसानी से किया जा सकता है. आपको अपना ध्यान किसी ऐसे काम की तरफ लाने की जरूरत है, जिसे आपका दिमाग असंभव समझता है लेकिन वो असल में पॉसिबल है। 

और जब आप एक बड़े मुश्किल काम को छोटे छोटे कामों में बांट लेंगे, तब आपका दूसरा स्टेप होगा, सबसे आसान और छोटे काम को सबसे पहले पूरा करना। छोटे छोटे काम करते रहो जब तक आपका बड़ा काम ना हो जाये. अपना momentum बनाये रखें.

The Two-Minute Rule and Making a Tasty To-Do List

चाहे आपने अपने टास्क को छोटे छोटे काम में बांट लिया हो, फिर भी कभी कभी आप खुद को पीछे पाएंगे . इनके कुछ एक्सम्प्लस है, कोई छोटी सी ईमेल जिसका आपने जवाब नहीं दिया है, या फिर आपके कपड़े जिन्हे आपने धोया नहीं है, आदि.

देखते देखते, आप खुद को छोटे छोटे कामों के एक ऐसे जाल में फसा लेते है जो बाद में मिलकर एक बहुत बड़े काम में बदल जाता है। 
तो, अब आप क्या करेंगे ? आप two मिनट रूल अप्लाई कर सकते हैं.
अगर किसी काम को करने में दो मिनट या उससे भी कम समय लगने वाला है, तो उसे तुरंत कर दें। इंतज़ार ना करे। उस काम को बढ़ने मत दीजिये। 
अगर आपको healthy खाना खाना है तो, कोई भी फल उठाये और उसे खा ले। इसमें एक पल भी नहीं लगेगा। ऐसा रोज करें और फिर आप खुद को इस रूटीन के आदि पाएंगे। इसके लिए हमे Newton के फर्स्ट लॉ को थैंक्स करना चाहिए.
Mark नाम के इंसान का example लेते हैं। जब उसने सबसे पहले अपनी टू-डू लिस्ट बनाई, उसने अपने सारे काम लिखे जैसे कि “कार की खिड़कियां बदलनी हैं”। लेकिन Mark ने देखा कि टू-डू लिस्ट बनाने के बाद भी, वह असल में कोई काम नहीं कर रहा है। 

Mark ने फिर अपनी लिस्ट को मजेदार बनाने का सोचा। उसने महसूस किया कि उसकी पुरानी वाली लिस्ट बोरिंग है। ऐसे काम जैसे “कार की खिड़कियां बदलनी हैं”, आपको काम टालने के लिए मजबूर करते हैं।  इस काम को करने के लिए, Mark ने उस टास्क को बदलकर “दुकान पर फ़ोन करके कार की खिड़कियों के पैसे पूछने हैं” रखा। उसने ये भी रखा, “आस पास की दुकान जाकर देखनी हैं.”

जब आप एक टू-डू लिस्ट बनाते हो, आपको ध्यान रखना चाहिए कि वो इतनी sufficient हो कि आप जो काम असल में करना चाहते हो, वो पूरा हो। आपको खुद के लिए साफ़ और सटीक इंस्ट्रक्शन बनाने की जरूरत है। ऐसी स्टेटमेंट जो साफ़ ना हो या ऐसे गोल को सटीक ना हो, को फॉलो करना मुश्किल होता है.

कौन सा टास्क ज्यादा मजेदार लग रहा है? “कार की खिड़कियां बदलनी हैं” या फिर “आस पास की दुकानों पर फ़ोन करके कार की खिड़कियों के पैसे पूछने हैं”? दोनों में से कौन सा ऐसा है जो आसानी से किया जा सके और जिसे टाला ना जाये?

अब, आप जवाब जानते हैं ।   

Time Blocks and Setting Macro Goals and Micro Quotas 

Anthony Trollope 19 सेंचुरी के बड़े सफलs राइटर थे। उन्होंने 47 नॉवल, 18 प्ले, और काफी सारी दूसरी चीजें लिखी हैं.

चौंका देने वाली बात यहाँ यह है कि Anthony ने ये सब काम अपनी 9-5 की जॉब करते करते किये हैं। वो ऐसा कैसे कर पाए?

Macro goals और micro quotas को सैट करके, वो ये सब कर पाए थे। Anthony का बड़ा गोल, बेशक नॉवल लिखना था। हालांकि, उनके micro quotas ही उन्हें दूसरे से अलग करते हैं.

Anthony ने हर रोज के लिए टाइम ब्लॉक सैट किया था। वे सुबह उठते और ठीक 5.30 बजे अपने डेस्क पर बैठ जाते और ठीक 8.30 बजे लिखना बंद कर देते. उन्होंने अपने टाइम को 15 मिनट के ब्लॉक्स में बांटा। हर ब्लॉक में उन्हें 250 वर्ड्स लिखने थे, जिससे वे हर घंटे में 1000 शब्द लिख पाएं और हर रोज 10 पेज लिख पाएं। इस हिसाब से, Anthony एक साल में 3 नॉवल पूरी कर सकते थे.

लोग काम को तब टालते है जब उन्हें उस काम का अंत नहीं दिख पाता। टालमटोल ऐसा लगता है जैसे आप किसी खुले समुद्र में तैर रहे हो और आपको किनारा नहीं दिख रहा। इसलिए, जाहिर सी बात है की आप अपनी मोटिवेशन खो दोगे और आखिर में काम छोड़ दोगे.

Anthony के 15 मिनट वाले micro quota ने जो रिजल्ट दिया वो कमाल का था। उनसे उन्हें सफलता महसूस हुई। हर 15 मिनट के बाद, उनका दिमाग उन्हें एनर्जी और सैटिस्फैक्शन का रिवॉर्ड देता था क्योंकि उन्होंने 250 शब्द लिखने का छोटा सा काम पूरा कर लिया होता था।  आपको भी यही करने की जरूरत है। आपको एन्ड तक देखने की जरुरत है। ये काम बड़ा है। इसी को हम macro goal कहते हैं। और फिर, उन स्टेप्स को छोटे छोटे लेकिन मजबूत micro quota स्टेप्स में बांटें जिन्हें आप हासिल करना चाहते हैं.

हर micro quota के लिए टाइम ब्लॉक सैट करना नहीं भूलना है और उनपर टिके भी रहना है।  आजकल, ऐसे बहुत सारे टूल्स मौजूद हैं जो टाइम ब्लॉक के दौरान सभी distractions से दूर रहने में आपकी मदद कर सकते हैं। आप Go Fucking Work  नाम की वैबसाइट यूज कर सकते हो, ये एक टाइम ब्लॉकर वैबसाइट है जो आपको उस चीज के अलावा हर चीज करने से रोकता है जो आपको उस वक़्त करना चाहिए.

इस तरह से, आप ये पक्का कर लेंगे कि हर micro quota को पूरा करने के बाद आपको सक्सेस  महसूस होगी। अच्छा महसूस करने के लिए पूरा macro goal खत्म करने से बेहतर है micro quota खत्म करना.

टाइम ब्लॉक्स आपको ज्यादा purposeful और productive बनने में भी मदद करता है। ये आपको यह specify करने देते  है कि आपको असल में किस समय किस जगह पर क्या करना है। टाइम ब्लॉक्स यूज करके आप ये जान पाएंगे कि हर चीज के लिए सही जगह और सही वक़्त होता है। 

The Butt-In-Chair Method and Airplane Days Linda एक मैनेजर है। वे कहती हैं कि जब वे इंटरनेशनल फ्लाइट लेती हैं, तब वे सबसे ज्यादा प्रोडक्टिव होती हैं। Linda बताती हैं कि जब भी वे फ्लाइट से कहीं जा रही होती है, तब वे पूरी फ्लाइट के दौरान बहुत प्रोडक्टिव होतीं है और वे अपने प्लान किये गए कई काम खत्म कर लेती हैं. क्यों? ऐसा इसलिए क्योंकि वे butt-in-chair मेथड का इस्तेमाल करती हैं.

Butt-in-chair मेथड का मतलब है कि आपको सही में अपना butt चेयर पर रखना है और कुछ समय के लिए वही बैठे रहना है। चाहे आप कुछ भी ना करें, पर बिना किसी डिस्ट्रैक्शन के वहां बैठे रहें। 

यहाँ ट्रिक यह है कि आखिर में आप खुद को वो काम करते हुए पाएंगे जो आप करना चाहते हैं।  
ये मेथड आप सिर्फ तब यूज नहीं कर सकते जब आप किसी इंटरनेशनल फ्लाइट में हैं, बल्कि आप butt-in-chair मेथड को अपने ऑफिस या अपने घर पर भी अप्लाई कर सकते हैं।  अपने फ़ोन को "airplane mode" में डालें और उसे खुद से दूर कर दें। अपने butt को चेयर पर रखें और अपने डेस्क के सामने आराम से बैठ जाएँ। आपको टास्क पूरा करने में कितना वक़्त लगेगा, इसके हिसाब से टाइम सैट करें.

जब भी आपको कोई काम करना हो, इन टेक्निक्स को फॉलो करें। आखिर में आप खुद को वही काम करते हुए पाएंगे.

Create a Distraction To-Do List 

इस बुक के ऑथर, Dominic Mann, कहते हैं कि जब भी उन्हें कोई काम करना होता था उन्हें बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था.

जब भी वे अपने कंप्यूटर के सामने बैठते है, वो खुद को गूगल पर ढूंढ़ते हुए पाते है की आज Donald Trump ने क्या किया? बिल्लियाँ म्याऊं म्याऊं क्यों करती है? क्या Neil Armstrong सच में चाँद पर गए थे? वे ऐसी चीजें ही गूगल पर देखते रहते थे.

फिर, Dominic महसूस करते थे की उन्होंने article ब्राउज करने में अपने 30 मिनट बर्बाद कर दिए.
रिसर्च बताती है कि ऐसी छोटी छोटी distraction सिर्फ आपका टाइम बर्बाद नहीं करती बल्कि ये आपको आपके टास्क पर फोकस भी नहीं करने देती। फिर आप और 25 मिनट अपने काम पर फोकस करने में ही बर्बाद कर देते हैं. तो, Dominic ने इस मुश्किल को कैसे हल किया?

जब भी वे distracted होते थे, Dominic उस वजह को “Distraction To-Do List” में लिख लेते थे.” इस Distraction To-Do List में आप क्या लिखेंगे? पहले आप लिखेंगे की आपको कौन कौन से टास्क करने हैं। फिर आप लिखेंगे कि कौन कौन सी चीजें आपको वो काम करने में distract करती हैं। आपको ये भी लिखना है कि आपको अपने काम को पूरा करने से पहले distract नहीं होना है और आपको सिर्फ फोकस्ड रहना है।   

Distraction To-Do List बनाने से आपको अपने काम पर टिके रहने में मदद मिलेगी।  The “(10+2) x5” Method and Utilizing the Power of Deadlines

“ये मेरे लिए काम नहीं करेगा। किसी काम को करने के लिए अलग से टाइम ब्लॉक बनाना मेरे लिए बहुत मुश्किल है,” Tyson ने कहा.

“ऐसा हो ही नहीं सकता। मैं अपना फ़ोन एयरप्लेन मोड पर नहीं डाल सकती। अगर मेरे बॉस का फ़ोन आया तो? मुझे जॉब से निकाल दिया जायेगा,” Carol ने कहा.

क्या आप Tyson और Carol की बात से सहमति रखते हैं? अगर हाँ, तो  आप (10+2) x5 मेथड अप्लाई कर सकते हैं।  इस मेथड का मतलब है की आपको 10 मिनट का टाइम सैट करना है और काम शुरू करना है। 10 मिनट तक आपको सिर्फ उसी काम पर ध्यान देना है जिसे पूरा करना है. फिर, जब टाइमर बजेगा, आप 2 मिनट तक अपनी मर्जी का कुछ भी कर सकते हो। आप फेसबुक, यू टुब, वॉट्सएप कुछ भी चेक कर सकते हैं.

उन 2 मिनट के बाद, आपको वापस अपने काम की तरफ जाना है। आपको ये रूटीन, 10 मिनट काम करना साथ में 2 मिनट का आराम, चार बार और करना है। इसमें  x5 का यही मतलब है की इसे पांच बार करना है। 

इससे आपको काम के पांच 10 मिनट के  burst मिलते हैं और 2 -2 मिनट के पांच ब्रेक। इस तरह (10+2) x5, एक पूरे productive घंटे के बराबर होता है.
ये मेथड आपको अगले ब्रेक की तरफ बढ़ने के लिए और फिर अपने काम की तरफ जाने के लिए मोटीवेट करेगा। प्रोडक्टिव फील करना अच्छा लगता है, हैं ना?
क्या आप जानतें है इससे बेहतर क्या है? अपनी deadline को पाना. ऐसा आपके साथ भी जरूर हुआ होगा। आप अपने एग्जाम से पहले पूरी रात जाग कर पढ़ते थे ताकि आप एग्जाम पास हो पाएं.
यहाँ भी deadline है, जो आपका टेस्ट है। अगर आपने अपनी पढाई पूरी नहीं की, तो आप fail हो जायेंगे।  इसलिए, अगर आपको कोई काम पूरा करना है, तो पहले खुद के लिए एक deadline बनायें। चाहे उस काम की कोई भी deadline ना हो, फिर भी अपने लिए एक deadline बनायें जिससे आप उस काम को वक़्त पर पूरा कर पाएं।  

  Kill Your Inner Perfectionist  Perfection किल्स। Xerox ने दुनिया की सबसे सक्सेसफुल कम्पनी बनने का अपना मौका खो दिया था। क्यों? perfection की वजह से.

1973 में, Xerox ने “Alto” नाम का एक पर्सनल कंप्यूटर बनाया। उस वक़्त वह सबको बहुत पसंद आया, लेकिन फिर भी Xerox ने उसे रिलीज़ नहीं किया। उसके मालिकों ने उसे उसमे और बेहतर इम्प्रेस करने वाली टेक्नोलॉजी को डालने के लिए इंतज़ार किया। वे उस कंप्यूटर को परफेक्ट बनाना चाहते थे.

Xerox ने Alto को 1981 में रिलीज़ किया, जिसकी कीमत थी 50000 डॉलर। इसी दौरान, IBM ने एक पर्सनल कंप्यूटर रिलीज़ किया जो परफेक्ट नहीं था और ना ही उसमे सारी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी थी।  

लेकिन IBM का कंप्यूटर काफी सस्ते दाम पर आया था, सिर्फ 1565 डॉलर का। इसलिए, IBM ज्यादा कामयाब रही।  गूगल ने Xerox की गलती से सीख ली। गूगल ने 2005 में Gmail रिलीज़ किया और 2009 तक उसे “beta” version पर ही रखा। गूगल चार साल तक एक अधूरे प्रोडक्ट को ही चलाता रहा। मगर उन चार सालों में, Gmail पूरी दुनिया में सबसे सक्सेसफुल ईमेल सर्विस बन गयी.

यहाँ पॉइंट ये है कि कुछ ना होने से बेहतर है थोड़ा होना। आप एक खाली पेज को ठीक नहीं कर सकते। सबसे पहले शुरुआत करनी है। उसे परफेक्ट होने की जरूरत नहीं है। फिर आप अपने प्रोजेक्ट को ठीक और बेहतर कर सकते हैं।    

How to Procrastinate Productively 

Dexter के ऑफिस का दिन बहुत थका देने वाला था। अभी घर जाकर उसे बहुत सारे काम भी करने थे। लेकिन वह इतना थक गया कि बस टीवी के सामने बैठकर पिज़्ज़ा खाना चाहता था.

लेकिन Dexter जानता था कि अगर उसने ऐसा किया तो, वह अपनी productivity की चलती हुई चेन तोड़ देगा। वह अपना momentum नहीं रोकना चाहता था। इसलिए, Dexter ने छोटे टास्क करने का फैसला किया, जैसे कि कुछ ऐसी ईमेल का जवाब देना जिनका reply उसने अभी तक नहीं दिया था.

वह उठा और उसने अपने उस आर्टिकल में थोड़े बहुत बदलाव किए जिस पर वह काम कर रहा था, इस काम में उसे 10 मिनट का समय भी नहीं लगा, लेकिन उसने काम की टालमटोल नहीं की.

कभी कभी हम भी काम को टाल देते हैं, जब हम बहुत थके हुए होते है या जब कोई भी काम नहीं करना चाहते हैं. यहाँ redirect technique यूज करने की जरूरत है. पूरे दिन कुछ भी काम ना करने से बेहतर है छोटे छोटे जरुरी काम कर लेना, जैसे की कुछ ईमेल का जवाब देना या ऐसे ही कुछ छोटे और आसान काम करना। 

 

The Kind of Visualization That Leads to Procrastination (And the Kind That Leads to Action) 

हमारी ही तरह, Kelly पूरे दिन अपने सभी सपनों के बारे में सोचती रहती है जिन्हे वह जिंदगी में पाना चाहती है। वह बस प्लान ही करती रही। Kelly अपने गोल्स को पूरा करने के बाद खुद के खुश होने की कल्पना करती हैं.

लेकिन आगे क्या होगा? कुछ भी नहीं। क्यों? रिसर्च से पता चलता है कि उस सक्सेस की कल्पना हमारे दिमाग को ये सोचने के लिए ट्रिक करती है कि हमने इसे पहले ही हासिल कर लिया है! और इस वजह से हमारे उस काम को करने की संभावना कम हो जाती है.

तो, वह इस मुश्किल को कैसे हल कर सकती है? Kelly को दिन भर अपने गोल्स को हासिल करने से जुड़े काम के बारे में सोचने की जरूरत है, ना की सिर्फ गोल के बारे में। 

उसे एक अच्छी टिकाऊ जॉब चाहिए। इसलिए, सिर्फ उस जॉब के मिलने की कल्पना के बजाय, उसे ये कल्पना करनी चाहिए की वह इसे कैसे पा सकती है। उसे ढेर सारी जॉब्स के लिए अप्लाई करने के और इंटरव्यू देने के बारे में सोचना चाहिए. दुनिया के सभी बड़े athlete कभी भी खुद को No। 1 की पोजीशन पर खड़े देखने की कल्पना नहीं करते हैं.

बल्कि, वे लोग उसके लिए लड़ने की कल्पना करते हैं। वे अपनी बॉडी की फुर्ती के बारे में सोचते है और खुद को वहाँ तक पहुंचाने के लिए जोर देते हैं। बड़े athlete उन सभी मुश्किलों के बारे में सोचते हैं जो उनके और उनकी मंजिल के बीच आती हैं। 

इसलिए, जब भी आप कुछ पाना चाहते है या कोई गोल हासिल करना चाहते है, आपको उसे पाने के रास्तों के बारे में सोचना है, ना कि बस मंज़िल के बारे में.  

The One Word That Kills Procrastination

Research करने वालों ने एक स्टडी की जिसमे उन्होंने “नहीं कर सकता” को “नहीं करना है” से बदला. उन्होंने लोगो को दो ग्रुप में बाँट दिया। दोनों ग्रुप के लोग healthy बनना चाहते थे.

पहले ग्रुप के लोगों को ये बोलना सिखाया गया “मैं जिम जाना छोड़ना नहीं चाहता हूँ” या फिर “मैं उस चॉकलेट केक को नहीं खाना चाहता हूँ.”

दूसरे ग्रुप के लोगो को ये बोलना सिखाया गया, “मैं ये मिठाई नहीं खा सकता” या “मैं अपनी excercise नहीं छोड़ सकता.”

कुछ महीनो बाद, researchers ने उन दोनों ग्रुप के लोगों को इनाम के तौर पर कुछ चॉकलेट और कुछ ग्रेनोला बार्स में से एक चुनने को कहा। पहले ग्रुप की healthy ऑप्शन चुनने की दुगनी सम्भांवना थी.

इस एक्सपेरिमेंट ने क्या साबित किया? यही की शब्दों में बड़ी ताकत होती है। “नहीं कर सकता” और “नहीं करना है” दिखने में एक से लगते है, लेकिन असल में है नहीं.

“नहीं कर सकता” आपके दिमाग को ये सोचने को कहता है कि आप कोई काम करना चाहते हो लेकिन कर नहीं सकते. दूसरी तरफ, “नहीं करना है” आपके दिमाग को ये सोचने के लिए कहता है कि आप खुद अपनी मर्जी से वो काम नहीं करना चाहते हैं। ये आपकी खुद की इच्छा है और ये ज्यादा प्रभाव डालती है.

इसलिए, जब भी आप काम नहीं टालना चाहते हैं। ये कहने की बजाय कि “मैं नहीं बदल सकता” या फिर “मैं और बेहतर नहीं बन सकता”, खुद को कहना है कि “मैं नहीं छोड़ना चाहता” या फिर “मैं एक हारा हुआ इंसान नहीं बनना चाहता.”   

How to Cheaply and Quickly Outsource Tasks 

खैर, हम जानते है कि ये समरी हमे टालमटोल करने से दूर होने के लिए कह रही है, और अपना काम किसी और से करवाना हमारे आलस्य को दूर नहीं करेगा, लेकिन कभी कभी हम ऐसा करने का सोच सकते हैं.

कुछ टास्क इतने जरुरी नहीं होते की आप उन्हें करने में अपना वक़्त ज़ाया करे। ऐसा नहीं है कि आप वो काम कर नहीं सकते या फिर आप उन्हें टाल रहे हो। बस बात इतनी है कि वो काम आपका कुछ ज्यादा ही समय ले लेंगे और वे इतने भी जरुरी नहीं है.
तो, क्यों ना ऐसे लोगों को ढूंढा जाये जो आपके लिए ये काम करेंगे?

जैसे की, upwork, एक ऐसा प्लेटफार्म है जो आपको ऐसे लोगों को hire करने का मौका देता है जो हर वो काम आराम से कर सकते हैं जिनके लिए आपके पास वक़्त नहीं है। खासकर वो काम जिन्हें सही तरह से करना आपको नहीं आता है, ऐसे काम करने के लिए आप दूसरों की मदद ले सकते हैं। 

कन्क्लूज़न 

टालमटोल करना बेहद बुरा है। ऐसा करने से इतने सारे कामों का ढेर बन जाता है जिन्हे करने का अब आपका मन नहीं करता। इस समरी में, आपने ऐसे 17 हैक्स के बारे में सीखा जिनके इस्तेमाल से आप अपने काम को टालने की आदत को रोक सकते हैं। उन सभी को एक बार फिर पढ़ते है
1। समझदार लोग काम को टालते नहीं है.
2। Next Action Habit डेवलप करनी है। 
3। Momentum बनाये रखना है.
4।  अपनी टू डू लिस्ट को मजेदार बनाना है.
5। 2 मिनट रूल को यूज़ करना है.
6। अपने Macro Goals और Micro Quota को सैट करना है.
7। टाइम ब्लॉक का इस्तेमाल करना है.
8 Butt in the chair मेथड का इस्तेमाल करना है.
9। अपने फ़ोन को एयरप्लेन मोड पर डालकर काम करना है.
10। अपनी distraction टू डू लिस्ट बनानी है.
11। (10+2) x5 मेथड को याद रखना है.
12। अपने लिए Deadlines बनानी है.
13। हमेशा परफेक्ट होने के बारे में नहीं सोचना है.
14। Productive तरीके से टालमटोल करना है 
15। गोल को हासिल करने के रास्ते के बारे में सोचना है
16। “मैं नहीं कर सकता” ऐसा नहीं कहना है.
17। दूसरों से अपना काम करवा कर उनसे मदद लेनी है।

उम्मीद है कि आप इनमे से कुछ हैक्स अपनी जिंदगी में लागू करेंगे। ये कभी नहीं कहना है कि “मैं ये नहीं कर सकता.” हमेशा ये कहना है कि “मैं काम को टालना नहीं चाहता.” अगर आप हेमशा अपने काम को टालने के आदि है तो, भरोसा रखे की आप बदल सकते हैं। जिन भी लोगों ने यह बुक पढ़ी है, उन सभी ने अपनी जिंदगी में कई बड़े बदलाव किये हैं। अब जब आप 17 हैक्स के बारे में जानते हैं, तो अब खुद को बदल कर आगे बढ़ने का वक़्त है।   
Hope you like the summary.


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